मेल क्षेत्र में 15 हजार से अधिक सफाईकर्मी तैनात हैं। जब भी आप महाकुंभ मेला क्षेत्र में निकलेंगे तो आपको जगह-जगह पर सफाई कर्मी झाड़ू लगाते, कचरा उठाते हैं और घाटों को साफ करते दिखेंगे।
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मेल क्षेत्र में 15 हजार से अधिक सफाईकर्मी तैनात हैं। जब भी आप महाकुंभ मेला क्षेत्र में निकलेंगे तो आपको जगह-जगह पर सफाई कर्मी झाड़ू लगाते, कचरा उठाते हैं और घाटों को साफ करते दिखेंगे। 40 कम्पेक्टर और 120 टिपर कूड़ा उठाने के लिए मेला क्षेत्र में दिन-रात दौड़ रहे हैं। 25 हजार से अधिक कचरा पात्र रखवाए गए हैं। गंगा, यमुना और संगम में दूषित पानी न जाए, इसको लेकर सरकार की व्यवस्थाएं सुदृढ़ नजर आती हैं। 200 किलोमीटर से लंबी ड्रेनेज लाइन डाली गई हैं। इसके अलावा, दो नए एफएसटीपी (फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट), तीन अस्थाई व 10 स्थाई एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) सरकार ने लगाए हैं, ताकि जल निर्मल बना रहे।
सरकार ने सफाई कर्मियों के लिए स्वच्छ कुंभ कोष की भी स्थापना की, जिसमें 15 हजार सफाई कर्मियों के लिए बीमा, स्वास्थ्य समेत 6 योजनाओं को संचालित किया जा रहा है। सफाई कर्मियों के लिए आवासीय व्यवस्था (सेनिटेशन कॉलोनी), उनके बच्चों के लिए स्कूल (विद्या कुंभ) और आंगनबाड़ी केंद्र की सुविधा दी जा रही है। सफाई मित्रों को कोई आर्थिक दिक्कत न हो, इसके लिए प्रत्येक 15 दिन की अवधि में उनके खातों में धनराशि स्थानांतरित की जा रही है।
उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि महाकुंभ में 45 करोड़ श्रद्धालु और देश-विदेश से पर्यटक आने वाले हैं।
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स्वच्छता से जुड़ा प्लास्टिक का भी बड़ा विषय है। इस बार महाकुंभ मेला क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त घोषित किया गया है। कुल्हड़, दोना-पत्तल और कपड़े व जूट थैला की दुकान सभी 25 सेक्टरों में खोली गई हैं। मेला में उपयोग में लाई गई प्रचार सामग्री भी प्लास्टिक मुक्त है। सरकार ने व्यापक स्तर पर प्लास्टिक उपयोग न करने को लेकर जन-जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन की गतिविधियों को चलाया है। इस मुहिम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। संघ ने देशभर से 50 लाख स्टील की थाली और कपड़े के थैले इकट्ठा कर महाकुंभ क्षेत्र में भेजे हैं। अखाड़ों ने महाकुंभ मेले को प्लास्टिक मुक्त बनाने का संकल्प लिया है।
उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि महाकुंभ में 45 करोड़ श्रद्धालु और देश-विदेश से पर्यटक आने वाले हैं। लोगों की इतनी बड़ा संख्या को देखते हुए स्वच्छ महाकुंभ का संकल्प हिमालय जैसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। पहले दो प्रमुख स्नान के बाद निश्चित रूप से मेला प्रशासन अपनी तैयारियों का एक बार पुर्नावलोकन करेगा, लेकिन जिस तरह से सफाई कर्मी, गंगा सेवादूत और मेला प्रशासन 4200 हेक्टेयर में फैले मेला क्षेत्र को स्वच्छ और साफ बनाने में जुटा है, स्पष्ट है कि एक नया स्वच्छता का अनुभव देश-दुनिया से आकर पावन संगम में डुबकी लगाने वालों को मिल रहा है। महाकुंभ से एक बार फिर स्वच्छ भारत का संदेश देशभर में जाने वाला है।
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