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महाकुंभ 2025: करोड़ों श्रद्धालुओं के बीच स्वच्छता का हिमालय जैसा संकल्प, आधुनिक तकनीक और सेवा भाव का संगम

सार

महाकुंभ 2025 में स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पहले दो स्नान में 5 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं, फिर भी मेला क्षेत्र साफ-सुथरा है। स्वच्छता को डिजिटल माध्यम से भी जोड़ा गया है, ताकि 4200 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले मेला क्षेत्र में स्थापित 1.5 लाख शौचालयों की मॉनिटरिंग की जा सके।

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स्वच्छता को डिजिटल माध्यम से भी जोड़ा गया है, ताकि 4200 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले मेला क्षेत्र में स्थापित 1.5 लाख शौचालयों की मॉनिटरिंग की जा सके। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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वर्ष 2019 के कुंभ प्रयागराज में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सफाईकर्मियों के पैर धोए थे और कहा था-

'सफाई कर्मियों के योगदान से कुंभ की पहचान स्वच्छ कुंभ के रूप में हुई है, दिव्य कुंभ को भव्य बनाने में सबसे बड़ा योगदान सफाई कर्मियों का है' तो यह समाचार राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियां बना था। इस बार भी जब प्रधानमंत्री बीते 13 दिसंबर महाकुंभ प्रयागराज में संगम पूजन के लिए आए तो उन्होंने महाकुंभ जैसे दिव्य और भव्य आयोजन को सफल बनाने में स्वच्छता की बड़ी भूमिका की चर्चा की थी।

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विश्व के सबसे बड़े मेले महाकुंभ में पहले दो प्रमुख स्नान बीत चुके हैं और सरकारी आंकड़ों के अनुसार 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालु संगम में डुबकी लगा चुके हैं। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने के बावजूद मेला क्षेत्र में स्वच्छता व्यवस्था में कोई कमी नहीं देख रही है। गंगा, यमुना और संगम के न केवल घाट साफ-सुथरे दिख रहे हैं, बल्कि सड़कों पर 24 घंटे सफाई कर्मी स्वच्छता का विशेष ध्यान दे रहे हैं।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का विशेष फोकस महाकुंभ मेले में स्वच्छता को लेकर शुरुआत से रहा है। इसकी व्यापक तैयारियां पिछले कई महीनों से मेला क्षेत्र में देखी जा रही हैं। इस बार स्वच्छता को डिजिटल माध्यम से भी जोड़ा गया है, ताकि 4200 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले मेला क्षेत्र में स्थापित 1.5 लाख शौचालयों की मॉनिटरिंग की जा सके। शौचालयों की सफाई में कोई कमी ना रहे, इसके लिए 2500 से अधिक गंगा सेवादूत मोबाइल के साथ तैनात हैं, जो बार कोड स्कैन के माध्यम से शौचालय की स्वच्छता और साफ- सफाई की व्यवस्था करते हैं। जेट स्प्रे से शौचालय तत्काल साफ हो रहे हैं। सफाई व्यवस्था के लिए आईसीटी (इनफार्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी) आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम एक्टिव किया गया है।

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मेल क्षेत्र में 15 हजार से अधिक सफाईकर्मी तैनात हैं। जब भी आप महाकुंभ मेला क्षेत्र में निकलेंगे तो आपको जगह-जगह पर सफाई कर्मी झाड़ू लगाते, कचरा उठाते हैं और घाटों को साफ करते दिखेंगे। - फोटो : Amar Ujala

मेल क्षेत्र में 15 हजार से अधिक सफाईकर्मी तैनात हैं। जब भी आप महाकुंभ मेला क्षेत्र में निकलेंगे तो आपको जगह-जगह पर सफाई कर्मी झाड़ू लगाते, कचरा उठाते हैं और घाटों को साफ करते दिखेंगे। 40 कम्पेक्टर और 120 टिपर कूड़ा उठाने के लिए मेला क्षेत्र में दिन-रात दौड़ रहे हैं। 25 हजार से अधिक कचरा पात्र रखवाए गए हैं। गंगा, यमुना और संगम में दूषित पानी न जाए, इसको लेकर सरकार की व्यवस्थाएं सुदृढ़ नजर आती हैं। 200 किलोमीटर से लंबी ड्रेनेज लाइन डाली गई हैं। इसके अलावा, दो नए एफएसटीपी (फिकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट), तीन अस्थाई व 10 स्थाई एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) सरकार ने लगाए हैं, ताकि जल निर्मल बना रहे।


सरकार ने सफाई कर्मियों के लिए स्वच्छ कुंभ कोष की भी स्थापना की, जिसमें 15 हजार सफाई कर्मियों के लिए बीमा, स्वास्थ्य समेत 6 योजनाओं को संचालित किया जा रहा है। सफाई कर्मियों के लिए आवासीय व्यवस्था (सेनिटेशन कॉलोनी), उनके बच्चों के लिए स्कूल (विद्या कुंभ) और आंगनबाड़ी केंद्र की सुविधा दी जा रही है। सफाई मित्रों को कोई आर्थिक दिक्कत न हो, इसके लिए प्रत्येक 15 दिन की अवधि में उनके खातों में धनराशि स्थानांतरित की जा रही है।
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उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि महाकुंभ में 45 करोड़ श्रद्धालु और देश-विदेश से पर्यटक आने वाले हैं। - फोटो : Vinod Kumar Pathak
स्वच्छता से जुड़ा प्लास्टिक का भी बड़ा विषय है। इस बार महाकुंभ मेला क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त घोषित किया गया है। कुल्हड़, दोना-पत्तल और कपड़े व जूट थैला की दुकान सभी 25 सेक्टरों में खोली गई हैं। मेला में उपयोग में लाई गई प्रचार सामग्री भी प्लास्टिक मुक्त है। सरकार ने व्यापक स्तर पर प्लास्टिक उपयोग न करने को लेकर जन-जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन की गतिविधियों को चलाया है। इस मुहिम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। संघ ने देशभर से 50 लाख स्टील की थाली और कपड़े के थैले इकट्ठा कर महाकुंभ क्षेत्र में भेजे हैं। अखाड़ों ने महाकुंभ मेले को प्लास्टिक मुक्त बनाने का संकल्प लिया है।

उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि महाकुंभ में 45 करोड़ श्रद्धालु और देश-विदेश से पर्यटक आने वाले हैं। लोगों की इतनी बड़ा संख्या को देखते हुए स्वच्छ महाकुंभ का संकल्प हिमालय जैसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। पहले दो प्रमुख स्नान के बाद निश्चित रूप से मेला प्रशासन अपनी तैयारियों का एक बार पुर्नावलोकन करेगा, लेकिन जिस तरह से सफाई कर्मी, गंगा सेवादूत और मेला प्रशासन 4200 हेक्टेयर में फैले मेला क्षेत्र को स्वच्छ और साफ बनाने में जुटा है, स्पष्ट है कि एक नया स्वच्छता का अनुभव देश-दुनिया से आकर पावन संगम में डुबकी लगाने वालों को मिल रहा है। महाकुंभ से एक बार फिर स्वच्छ भारत का संदेश देशभर में जाने वाला है।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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