मंत्रियों के सामने पहली चुनौती होगी कोरोना के संकट से निपटना
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22 साल पहले के प्रतिद्वंद्वी अब साथ-साथ
यह उलटबासियांं राजनीति में ही संभव हैं। मप्र में जब कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार थी और ताकतवर विपक्ष भाजपा जोरदार संघर्ष करती थी, तब भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष थे कमल पटेल और युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे गोविन्द राजपूत। दोनों अपने-अपने दलों के विधायक बने और अपने अपने दलों की सरकारो में मंत्री भी बने। लेकिन मंत्री पद और विधायकी छोड़कर अपने गुटीय नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में आए गोविन्द राजपूत ने कमल पटेल के साथ आज शिवराज सिंह चौहान के मंत्री के रूप में शपथ ली।
फर्क इतना है कि गोविन्द राजपूत को मंत्री बनने के लिए फिर विधायक बनना होगा, उसी भाजपा के टिकट पर जिसने उन्हें तीन बार विधानसभा और एक बार लोकसभा चुनाव हराया था। राजपूत तीन बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने दो बार भूपेन्द्र सिंह को हराया था, जो दो बार उन्हें विधानसभा चुनाव में और एक बार लोकसभा चुनाव में हरा चुके हैं।
भूपेंद्र सिंह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सबसे खास माने जाते हैं, बीती सरकार में ग्रह और परिवहन मंत्री थे लेकिन फिलहाल संक्षिप्तीकरण में मंत्री नहीं बनाए गए। गोविंद और भूपेन्द्र सिंह एक ही जिले सागर के हैं, जहांं के विधायक पूर्व नेता प्रतिपक्ष लगातार 15 साल मंत्री रहे लगातार आठवीं बार के विधायक अब तक अजेय बने हुए गोपाल भार्गव भी फिलहाल मंत्री नहीं बनाए गए।
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