फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मध्य प्रदेश: कोरोना काल में संधि वाले विस्तार में शिवराज के पंच मंत्री     

विज्ञापन
कोरोना के चलते प्रदेश में शपथ लेेने वालेे 5 मंत्री जनता के लिए सबसे बड़ी जरूरत हैं। - फोटो : ANI
विज्ञापन

कोरोना संकट के भयावह होने लगने के दिनों में तत्कालीन कमलनाथ सरकार के तख्तापलट के बाद चौथी दफा मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान ने अंततः 29 वे दिन मंत्रिमंडल कर ही दिया। फिजिकल डिस्टेंस का पालन करते हुए राजभवन मे हुए शपथग्रहण समारोह में तीन विधायकों और दो पूर्व विधायको ने मंत्री पद की शपथ ली।

विज्ञापन


मंत्री पद और विधायकी छोड़कर सिंधिया के साथ भाजपा में आए छह में से दो तुलसीराम सिलावट और गोविन्द सिंह राजपूत फिर मंत्री बन गए हैं। भाजपा से पूर्व मंत्री डॉ.नरोत्तम मिश्रा, कमल पटेल और मीना सिंह फिर मंत्री बने। अब भी शिवराज सरकार में 25 और मंत्री बनाए जाने की गुंजाइश है, अब विस्तार कोरोनाकाल के बाद और 24 सीटों पर विधानसभा उपचुनाव के बाद ही होने के आसार हैं।

असंतोष तो अवश्यंभावी है
भले ही कोरोना काल के चलते 28 दिन मंत्रीमंडल गठन टाला गया, लेकिन इसमें से करीब 15 दिन कम मंत्री बनाने और संतुलन की रस्साकशी में बीते। इस दौरान प्रदेश में अकेले ही कोरोना से जूझते रहे। कांग्रेस लगातार मंत्रिमंडल गठन न होने पर तंज करती रही। इतना ही नहीं कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य वरिष्ठ वकील विवेक तन्खा ने संवैधानिक सवाल उठा दिया था। अब मंत्रीमंडल गठन हो तो गया है लेकिन भाजपा में अंदरूनी असंतोष से इनकार नहीं किया जा सकता। सवाल ये है कि वरिष्ठतम विधायक गोपाल भार्गव और इन्दौर की भाजपाई राजनीति के सबसे ताकतवर राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय इस संक्षिप्त मंत्रीमंडल में दरकिनार होने को किस तरह से व्यक्त करेंगे।
विज्ञापन


इंदौर से धुर कांग्रेसी रहे और सिधिया के सिपहसालार नव भाजपाई तुलसीराम सिलावट के मंत्री बनने का इन्दौर की सियासत पर अवश्य ही पड़ेगा। वहांं से तीसरी बार के भाजपा विधायक रमेश मेंदोला मंत्री पद के दावेदार रहे ही, वे विजयवर्गीय के बेहद करीबी हैं। मंत्री पद छोड़ भाजपा में आए चार मंत्रियों समेत कुल 20 पूर्व विधायकों में से चार में भी निराशा पनप सकती है। लेकिन समूचे देश के साथ  मप्र भी कोरोना के अभूतपूर्व संकट से जूझ रहा है। ऐसे में कोरोना मामले में पांचवी पायदान पर बने हुए मप्र की 8 करोड़ जनता को मदद, राहत, भरोसा देने के काम को ज्यादा प्रभावी बनाने की जरूरत है। ये पांंच मंत्री मुख्यमंत्री के पहले से जारी अभियान को और अधिक प्रभावी बनाएंं, उनकी यही भूमिका अब कसौटी पर होगी।                                 
 

विज्ञापन

मंत्रियों के सामने पहली चुनौती होगी कोरोना के संकट से निपटना - फोटो : Amar Ujala
22 साल पहले के प्रतिद्वंद्वी अब साथ-साथ 
यह उलटबासियांं राजनीति में ही संभव हैं। मप्र में जब कांग्रेस की दिग्विजय सिंह सरकार थी और ताकतवर विपक्ष भाजपा जोरदार संघर्ष करती थी, तब भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष थे कमल पटेल और युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष थे गोविन्द राजपूत। दोनों अपने-अपने दलों के विधायक बने और अपने अपने दलों की सरकारो में मंत्री भी बने। लेकिन मंत्री पद और विधायकी छोड़कर अपने गुटीय नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में आए गोविन्द राजपूत ने कमल पटेल के साथ आज शिवराज सिंह चौहान के मंत्री के रूप में शपथ ली।

फर्क इतना है कि गोविन्द राजपूत को मंत्री बनने के लिए फिर विधायक बनना होगा, उसी भाजपा के टिकट पर जिसने उन्हें तीन बार विधानसभा और एक बार लोकसभा चुनाव हराया था। राजपूत तीन बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने दो बार भूपेन्द्र सिंह को हराया था, जो दो बार उन्हें विधानसभा चुनाव में और एक बार लोकसभा चुनाव में हरा चुके हैं।

भूपेंद्र सिंह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सबसे खास माने जाते हैं, बीती सरकार में ग्रह और परिवहन मंत्री थे लेकिन फिलहाल संक्षिप्तीकरण में मंत्री नहीं बनाए गए। गोविंद और भूपेन्द्र सिंह एक ही जिले सागर के हैं, जहांं के विधायक पूर्व नेता प्रतिपक्ष लगातार 15 साल मंत्री रहे लगातार आठवीं बार के विधायक अब तक अजेय बने हुए गोपाल भार्गव भी फिलहाल मंत्री नहीं बनाए गए। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें