मरामाधो ग्राम पंचायत क्षेत्र के जल स्त्रोतों के आसपास वॉटर रिजार्च सिस्टम बनाए गए हैं। हैंडपंप के रिजार्च सिस्टम का जायजा लेने पहुंची पंचायत विभाग की उपायुक्त मंजू खरे व केसली जनपद सीईओ पूजा जैन।
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• कूप खुदाई व जीर्णोंद्धार
इन तीन वर्षों में कपिल धारा योजना के माध्यम से 40 कुंए खोदे गए। वहीं जल संरक्षण के एक अन्य कार्यक्रम ‘निर्मल नीर‘ के तहत भी दो कूपों का खनन करवाया गया। इसके अलावा ग्राम पंचायत में पहले से मौजूद कुंओं में से पांच का जीर्णोंद्धार भी किया गया। ग्राम पंचायत स्तर पर सरकारी हैंडपंपों के पास रिचार्ज सिस्टम बनाने के भी कार्य आरंभ है।
• स्टॉप डेम व बोरी बंधान
ग्राम पंचायत की सीमा से गुजरने वाली सुनार नदी के जल को लंबे समय तक रोके रखने के लिए 9 स्टाॅप डेम निर्मित किए गए हैं। इन स्टाॅप डेमस के माध्यम से रोके गए नदी के पानी से किसान फसलों की सिंचाई आसानी से कर सकते हैं। बरसाती नालों के पानी को रोककर उससे जलस्तर बढ़ाने के लिए बोरी बंधान के कार्य भी किए गए हैं। बारिश के पानी की प्रत्येक बूंद को बचाने के लिए ग्राम पंचायत में लूज बोल्डर संरचना के 42 और गेबियन संरचना के 11 कार्य किए गए हैं।
• केंद्र सरकार ने थपथपाई पीठ
केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने जल संरक्षण के उद्देश्य से ‘जलाभिषेक अभियान‘ शुरू किया है। करीब तीन वर्ष तक जल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने के बाद ग्राम पंचायत की 90 हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचिंत रकवे में आने लगी है। जल संरक्षण के क्षेत्र में ग्राम पंचायत वासियों के साथ ही शासन और प्रशासन की मेहनत का ही परिणाम जल शक्ति मंत्रालय के ‘राष्ट्रीय पुरस्कार‘ के रूप में मरामाधो को मिला है। इससे पूर्व में ग्राम पंचायत को ‘स्वच्छता मिशन‘ के तहत भी केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह एक कार्यक्रम में पुरस्कृत कर चुके हैं।
• अब भू-समतलीकरण की पहल
जल संकट से उबरने के बाद मरामाधो में शुरू किए गए भू-समतलीकरण कार्य के बारे में जानकारी देते हुए केसली जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी पूजा जैन बताती हैं कि आदिवासियों को वन भूमि अधिकार अधिनियम के तहत जमीन के पट्टे प्रदान किए गए हैं। हालांकि वन भूमि काफी उबड़-खाबड़ और पथरीली होने से इस पर कृषि करना कठिन है। ऐसे में वन भूमि को समतल कर कृषि योग्य बनाने के लिए मनरेगा योजना के तहत भू-समतलीकरण का कार्य किया जा रहा है।
• अब गांव की 245 एकड़ जमीन पर होगी खेती
सरपंच माखन अहिरवार बताते हैं कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में अब तक भू-समतलीकरण से करीबन 15 हितग्राही लाभान्वित हुए हैं और इस कार्य के तहत 45 एकड़ जमीन को सुधारा जा चुका है। सचिव अजय सिंह सोलंकी बताते हैं कि भूमि सुधार के 75 काम जारी हैं, जिनके पूरा होते ही अनुमानित 225 एकड़ भूमि पर कृषि की जा सकेगी।
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