शिवराज सरकार को झटका देने वाले दूसरे दो सबसे अहम मुद्दे रहे नोटबंदी और जीएसटी के
- फोटो : File Photo
नोटबंदी-जीएसटी और फिर अकेले शिवराज
शिवराज सरकार को झटका देने वाले दूसरे दो सबसे अहम मुद्दे रहे नोटबंदी और जीएसटी के। केंद्र सरकार की ओर से अचानक लागू की गई नोटबंदी ने खुद बीजेपी शासित राज्यों को भी संभलने और समझने का मौका नहीं दिया गया। नोटबंदी का घूंट सभी बीजेपी शासित राज्य के सीएम पीकर रह गए और उन्होंने दबी जुबान में ही सही इसकी तारीफ की, भले ही वे एटीएम और बैंकों की कतारों में खड़े आम आदमियों की मुश्किलों को संभालने और समझने में असहाय साबित हो रहे थे।
नोटबंदी का मामला तो ऐसा था कि मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में नोटबंदी ने गरीब और आम आदमी की कमर तोड़ दी जबकि रही-सही कसर जीएसटी ने पूरी की। जमीनी रिपोर्ट कहती है कि जीएसटी की मार तो ऐसी पड़ी भाजपा के पारंपरिक वोर्टर विशेष रूप से बनिया और व्यापारी शिवराज और भाजपा दोनों से ही नाराज नजर आए।
नोटबंदी पर इधर, विपक्ष सड़कों पर था और सरकार को घेर रहा था, जबकि मीडिया नोटबंदी का असली चेहरा धीरे-धीरे सामने ला रहा था। जीएसटी का मुद्दा भी बीजेपी के अपने ही वोट वर्ग के लिए सबसे बड़ा संकट लेकर आया। मप्र में चूंकि व्यापारी वर्ग बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक रहा है, ऐसे में जीएसटी का लागू होना भी शिवराज सिंह सरकार के खिलाफ नाराजगी की वजह बना। राज्य के बड़े शहरों और विशेष रूप से शहरी वोट बैंक नोटबंदी और जीएसटी के कारण बीजेपी से छिटकता नजर आया।
मप्र में किसानों का रोष, नोटबंदी और जीएसटी की इसी नाराजगी को भुनाने में दिग्विजय, कमलनाथ और सिंधिया की कांग्रेसी त्रयी सफल रही।
- फोटो : Twitter Congress @INCIndia
दिग्विजय, कमलनाथ, सिंधिया और अकेले शिवराज
इधर एक ओर 3 मुद्दे थे तो वहीं दूसरी ओर 3 ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने मप्र में किसानों के रोष, नोटबंदी और जीएसटी की इसी नाराजगी को भुना लिया। दिग्विजय दिखे हाशिये पर लेकिन अपना काम नर्मदा यात्रा में ही कर गए, कमलनाथ सामने थे और नये आकर्षण सिंधिया बने। ये तीनों ही लोग तीन मुद्दों के साथ शिवराज सिंह चौहान को बिल्कुल अकेला कर गए। यह कांग्रेस त्रयी ग्रामीण इलाकों में अपने पारंपरिक वोटर्स को लुभाने और शिवराज सिंह की छवि को किसान विरोधी बताने में सफल रही।
दूसरी ओर राहुल गांधी ने खुद ही मोर्चा संभाला और कांग्रेस सरकार के आने पर 10 दिनों के अंदर किसानों का कर्ज माफ करने की गारंटी देकर वोटर्स पर कांग्रेस का भरोसा लौटाने का प्रयास किया और वे सफल भी रहे।
ऐसे ही प्रदेश में नोटबंदी और जीएसटी के लागू करने की विफलता से उपजी छोटे व्यापारी वर्ग और जनता की पीड़ा को भी कमलनाथ से लेकर सिंधिया ने अपने पक्ष में करने का प्रयास किया। एक तरह से देखा जाए तो मप्र में किसान,नोटबंदी और जीएसटी के इन मुद्दों की त्रयी को कांग्रेस की त्रयी ने अपने पक्ष में कैश कर लिया।
बहरहाल, मप्र में चुनाव परिणाम तो सामने आ रहे हैं, लेकिन यहां फिलहाल कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। कांग्रेस और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर है। परिणाम जो भी हो इस बात में कोई दो राय नहीं है कि वे 3 लोग दिग्विजय, कमलनाथ और सिंधिया अकेले शिवराज पर भारी पड़े और भारी पड़े जीएसटी, किसान और नोटबंदी के वे 3 मुद्दे।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.