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मध्य प्रदेश चुनाव 2023: कपड़े फाड़ जैसे जुमले क्यों उछल रहे हैं चुनाव में, क्या कांग्रेस में मची है उथल-पुथल?

सार

इस दिलचस्प जुमले को कमलनाथ ने बाकायदा दिग्विजय सिंह के सामने दोहराया भी। दिग्विजय ने अपने अंदाज में जवाब भी दिया। ये अलग बात है कि दोनों का ही अंदाज (दोनों बार) तल्ख नहीं था बल्कि हास-परिहास के मूड में सार्वजनिक रूप से पत्रकारों के सामने यह गुफ्तगू हुई।
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कमलनाथ शाजापुर में संबोधित करते हुए। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में चुनाव सिर पर हैं, चुनावी सरगर्मी अपने चरम पर है और उधर नेता से लेकर कार्यकर्ता "कपड़े फाड़ने" में लगे हुए हैं। इस कपड़ा फाड़ चुनाव में कोई किसी और के कपडे फाड रहा है, या फाड़ने को कह रहा है, तो कोई अपने ही कपड़े फाड़ रहा है। दरअसल, इस ‘कपड़ा फाड़’ जुमले को ईजाद करने का काम मध्य प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष और कांग्रेस के घोषित मुख्यमंत्री प्रत्याशी कमलनाथ ने किया।

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हुआ यूं कि 15 अक्टूबर को टिकट की पहली सूची जारी होने के तत्काल बाद टिकट से वंचित कुछ असंतुष्ट कांग्रेसियों ने कमलनाथ को घेर लिया और कोलारस के विधायक वीरेन्द्र रघुवंशी के टिकट को लेकर एंग्री यंगमेन की तरह कमलनाथ से सवाल करने लगे। जवाब में कमलनाथ बोले  ‘आप यहां गदर मत कीजिए। दिग्विजय और जयवर्धन (दिग्विजय के विधायक पुत्र) के पास जाइए और उनके कपडे फाडिए। और हां, ये मत कहिएगा कि मैंने कहा था।’

बाद में इस दिलचस्प जुमले को कमलनाथ ने बाकायदा दिग्विजय सिंह के सामने दोहराया भी। दिग्विजय ने अपने अंदाज में जवाब भी दिया। ये अलग बात है कि दोनों का ही अंदाज (दोनों बार) तल्ख नहीं था बल्कि हास-परिहास के मूड में सार्वजनिक रूप से पत्रकारों के सामने यह गुफ्तगू हुई। इस बार अवसर था कांग्रेस के घोषणा पत्र जारी होने का। कमलनाथ ने कहा  ‘ मैंने कहा था कि बात न मानें तो उनके 'कपडे़ फाडिए।' जवाब में दिग्विजय बोले ‘भैया, ए फार्म पर किसके दस्तखत होते हैं, पीसीसी चीफ के. तो कपडे़ किसके फटने चाहिए।’  
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नहले पर दहला मारते हुए कमलनाथ बोले ‘मैंने बहुत पहले इन्हें पॉवर ऑफ अटॉर्नी दी थी कि कमलनाथ के लिए आप गालियां खाइए, ये आज भी वैलिड है।’ 

दिग्विजय का जवाब, ‘लेकिन गलती कौन कर रहा है ये भी पता होना चाहिए। कमलनाथ ‘गलती हो या न हो, गाली खानी है।’ दिग्विजय समर्पण अंदाज में बोले ‘अब शंकरजी का काम यही है विष पीने का तो पिएंगे।’ कमलनाथ ने यह कहकर बात खत्म की ‘इन्होंने बहुत कड़वे घूंट पिए हैं,  मेरे लिए, आगे भी पीने पडेंगे।’ इससे पहले कमलनाथ सिंह ने ये भी कहा  ‘मेरा और दिग्विजय का संबंध राजनीतिक नहीं है,  हंसी-मजाक का है,  प्यार का है। मेरा संबंध इनसे बहुत पुराना है,  पारिवारिक है।’ कुछ समय पहले कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता और प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला भी कमलनाथ-दिग्विजय की जोड़ी को ‘जय-वीरू’ की जोड़ी बता चुके हैं।  

कमलनाथ-दिग्विजय के बीच भले ही तल्खी न हो, लेकिन विपक्ष ने जुमले को लपकने में देर नहीं की। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह लगातार इस मुद्दे पर तंज कसते नजर आ रहे हैं। उन्होंने कहा ‘ये कांग्रेस का असली चेहरा है, एक पूर्व मुख्यमंत्री दूसरे पूर्व मुख्यमंत्री के लिए कह रहा है – जाओ उनके कपडे़ फाड़ो,  उनके बेटे के कपडे़ फाड़ो,  यही कांग्रेस का असली स्वरूप है।’

बाद में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने दिग्विजय के तो नहीं, अपने खुद के कपडे जरूर फाड़ डाले, दिग्विजय के  पुतले जलाए। कमलनाथ के बंगले पर पंगत की। इस पर कांग्रेसी भले ही ये बोलें कि  ‘टिकट पाने के लिए नेताओं की ये आपाधापी उनका ये मूड और हुजूम बता रहा है कि अगली सरकार कांग्रेस की बन रही है।' लेकिन शिवराज ने कपडे़ फाड़ने और पुतले जलाने पर अपने अंदाज में तंज कसा,  बोले ‘एक दिल के टुकडे हुए हजार कुछ इधर गिरे कुछ उधर गिरे।’ इससे पहले कमलनाथ-दिग्विजय की रोचक गुफ्तगू पर टिप्पणी करते हुए शिवराज ने कहा कि ‘ऐसे काम करते ही क्यों हो कि गाली खाना पडे।’

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ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस पूरे घटनाक्रम पर वयंग्य किया। - फोटो : Social Media
कांग्रेस के हर बयान और घटनाक्रम पर ज्योतिरादित्य सिंधिया जरूर व्यंग्य कसते हैं। सो कपड़ा फाड़ बयान पर भी वो कहां चुप रहने वाले थे,  बोले ‘मेरी कांग्रेसियों की सोच नहीं, जो पकड़-पकड़ कर फाडे़।' भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी इस टिप्पणी को लेकर कांग्रेस को घेरा। लेकिन इस कपड़ा फाड़ प्रतियोगिता में भाजपाइ भी पीछे नहीं हैं। उन्होंने जबलपुर में केन्द्रीस मंत्री और मध्य प्रदेश चुनाव के प्रभारी भूपेन्द्र यादव के सामने आपस में खूब लात घूंसे चलाए।

वे जबलपुर उत्तर से अभिलाष पांडे के टिकट का विरोध कर रहे थे। बेशक यहां व्यवहारिक रूप से कपड़े नहीं फाड़े पर सांकेतिक तो थे ही। इसी तरह सिंधिया समर्थक मुन्नालाल गोयल का टिकट कटने पर उनके समर्थकों ने जय विलास के अंदर प्रदर्शन किया। मुन्ना लाल गोयल का टिकट काटकर सिंधिया की मामी माया सिंह को टिकट दिया गया है।

‘कपडे़ फाड़ना’ हिंदी का रोचक और वर्सटाइल मुहावरा है। यह मुहावरा अकसर खुद को साहसी,  प्रभावशाली या दूसरों से बड़ा बताने के लिए प्रयुक्त होता है। ‘कपडे़ फाड़ना’ का उपयोग व्यक्तिगत जीवन के अन्य साथी,  प्रतिस्पर्धी या दूसरे लोगों के साथ आत्मप्रशंसा दिखाने के लिए भी किया जा सकता है। इसका शाब्दिक अर्थ ये होता है कि खुद को अधिक महत्वपूर्ण,  प्रमुख या प्रभावशाली दिखाना। ऐसा व्यक्ति अपने प्रतिद्वंदी के लिए कहता है ‘वो कपडे फाड़ रहा है तो मैं क्या कर सकता हूं।’ इसका प्रयोग दूसरे अर्थ में भी हो सकता है। जिस अर्थ में कमलनाथ ने किया।

लेकिन कपडे़ सिर्फ राजनीतिज्ञ नहीं फाड़ रहे हैं। कपडे़ दूसरे लोग भी फाड़ रहे हैं। एक पत्रकार इसलिए आक्रोशित होकर कपडे़ फाड़ने लगे कि उन्होंने जो खबर छापी थी वो बाद में सही साबित नहीं हुई। एक और जर्नलिस्ट ने इसलिए कपडे़ फाडे़ कि कांग्रेस की दूसरी लिस्ट में सरप्राइजिंग एलीमेंट नहीं है। एक और जर्नलिस्ट ने इसलिए फाडे़ कि आज कोई मसालेदार खबर नहीं मिली। कुल जमा ये कि कपड़े फाड़ने के कारणों में भरपूर विविधता है।

चुनावी घोषणाओं में जब गरीबों के लिए कल्याणकारी वादे सामने आते हैं तो मध्यम वर्गीय और उच्च मध्यमवर्गीय विशेष रूप से अपने कपडे़ फाड़ने लगते हैं , उनका कहना है कि  ‘टैक्स हम दें, और मजे वो करें’। जब सभी कपडे़ फाड़ रहे हों तो जनता भला क्यों पीछे रहे, वो पूछ रहे हैं कि  ‘ये राजनीतिक दल हमें ठगने को उतारू हैं, तो भला हम कपडे़ नहीं फाड़ें तो क्या करें ?’ आप ही बताइए...?

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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