कन्हैया की रैली में भीड़
- फोटो : कन्हैया के ट्विटर अकाउंट से
आसान नहीं है गिरिराज सिंह की राह
इस बार भी चुनाव परिणाम कमोबेश ऐसी ही होने की उम्मीद है। कन्हैया की जीत तभी मुमकिन है जब वे कम से कम आधे सवर्णों को वोट हासिल कर सकें और राजद के आधार वोट में वैसी सेंधमारी कर सकें जैसा कि पिछली बार राजेंद्र प्रसाद सिंह की थी। वहीं गिरिराज सिंह के लिए भी इस बार यह चुनाव आसान नहीं है। उनकी जीत का फॉर्मूला सवर्ण वोटरों पर आधारित है। इसमें टूट हुई तो बेगूसराय से गिरिराज का खाली हाथ लखीसराय लौटना संभव हो जाएगा। गिरिराज सिंह मूल रूप से लखीसराय जिला के निवासी हैं। कन्हैया कुमार ने उन्हें बाहरी कहकर निशाना बनाया है।
तनवीर हसन की जीत और हार के बीच कोई और नहीं बल्कि राजद के आधार वोटर हैं। भूमिहार और अन्य सवर्णों ने न तो पिछली बार उन्हें अपना वोट दिया था और न ही इस बार उन्हें वोट देने की संभावना है क्योंकि कन्हैया के कारण सवर्ण वोटरों में बिखराव होगा। इसका फायदा तनवीर हसन को मिल सकता है।
बहरहाल, वर्तमान में जो संकेत मिल रहे हैं, उसे देखते हुए यह कहना अतिश्योक्ति नहीं कि इस बार बेगूसराय इतिहास रचने को तैयार है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.