फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सीएम योगी ने अखिलेश यादव की 'उड़ान' रोककर चुकता किया एक पुराना हिसाब

विज्ञापन
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक कदम ने अचानक पूरा परिदृश्य बदल दिया। - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

पिछले दो दिनों से मीडिया में प्रियंका गांधी छाई थीं, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के एक कदम ने अचानक पूरा परिदृश्य बदल दिया। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में छात्रों के एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहे अखिलेश यादव को रोककर योगी सरकार ने समाजवादी पार्टी को बैठे बिठाए एक मुद्दा दे दिया है।  दरअसल, चुनावी माहौल में सपा-बसपा गठबंधन के लिए सड़कों पर उतरने का, योगी सरकार की पुलिस को सख्ती बरतने का और प्रियंका गांधी की तथाकथित ‘आंधी’ को रोकने का इससे बेहतर मौका और क्या हो सकता है। प्रयागराज में अखिलेश के जाने से जो कुछ नहीं भी होता, उससे कहीं ज्यादा अब हो रहा है। पूरी समाजवादी लखनऊ और प्रयागराज में ही नहीं प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सड़कों पर उतर आई है। राजभवन के सामने धरना प्रदर्शन जारी है और तय है कि आने वाले कई दिनों तक ये मुद्दा गरम रहने वाला है।

विज्ञापन


आखिर क्यों उठाया सीएम योगी ने ये कदम?
दरअसल, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और महागठबंधन के नेताओं को संदेश देने के नाम पर योगी ने ये कदम उठाया और ये जताने की कोशिश की है कि ममता ने अमित शाह या योगी के हेलिकॉप्टर को रोककर, वहां होने वाली भाजपा की प्रस्तावित रथयात्राओं को अशांति फैलने की आशंका बहाने रोककर जो काम किया है, वही काम भाजपा शासित प्रदेशों में भी हो सकता है। ममता ने भाजपा नेताओं के हेलीकॉप्टर उतरने नहीं दिए, तो योगी ने अखिलेश का प्लेन उड़ने ही नहीं दिया। सत्ता की मनमानी क्या हो सकती है, इसे इस दिलचस्प चुनावी माहौल में दोनों राज्यों में देखा जा सकता है।

लेकिन उत्तर प्रदेश और बंगाल में फर्क है। उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा एक बड़ी ताकत रही है। सपा का छात्र और युवा संगठन भी काफी मज़बूत रहा है। खासकर अखिलेश के कमान संभालने के बाद पार्टी में युवाओं की संख्या बढ़ी है। अक्टूबर 2018 में हुए इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनाव में अध्यक्ष पद समाजवादी छात्र सभा के उदय प्रकाश ने एबीवीपी को हराकर जीता और फिर एबीवीपी के नेता हिंसा पर उतर आए।
विज्ञापन


छात्रों की राजनीति और उनकी ताकत की बदौलत ही सियासी पार्टियां अपना खेल खेलती रही हैं। इसलिए योगी ने भी मौका नहीं छोड़ा और इस चुनावी मौसम में अपना पुराना हिसाब चुकता कर लिया। आरोप है कि 2015 में अखिलेश यादव ने भी योगी को इलाहाबाद जाने से रोक दिया था और ताजा घटनाक्रमों में ममता बनर्जी के रवैये ने भी आग में घी डालने का काम किया।

विज्ञापन

अखिलेश ने योगी के खिलाफ दर्ज मामले भी सार्वजनिक किए और पलट कर वार किया। - फोटो : amar ujala
तो क्या उस तरफ ममता का दांव उल्टा पड़ गया?
उधर ममता बनर्जी ने मोदी और सीबीआई के खिलाफ धरना देकर दो-तीन दिनों तक मीडिया का ध्यान खींचा, लेकिन उस दौरान भी महागठबंधन ने उनका खास साथ नहीं दिया। माना गया कि ममता का दांव उल्टा पड़ गया और इसका कमोबेश फायदा भाजपा के पक्ष में दिखने लगा। उत्तर प्रदेश में योगी का यह कदम कहीं न कहीं सपा को फायदा पहुंचाने वाला साबित हो रहा है। अखिलेश की पार्टी को गुंडा ब्रिगेड कहा गया, मुख्यमंत्री ने अखिलेश पर ऐसे ही आरोप लगाए और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अखिलेश के जाने से छात्र गुटों में हिंसा की आशंका जताई, अराजकता फैलने की बात कही।

अखिलेश ने प्रेस कांफ्रेंस करके साफ कहा कि उन्होंने 27 दिसंबर को ही अपने इलाहाबाद जाने की जानकारी सरकार को दे दी थी, फिर उन्हें जाने से रोकना सीधे-सीधे इस बात का संकेत है कि योगी सरकार और भाजपा सपा-बसपा गठबंधन से डर गई है। अखिलेश ने योगी के खिलाफ दर्ज मामले भी सार्वजनिक किए और पलट कर वार किया।

जाहिर है आरोप-प्रत्यारोप के खेल में कोई किसी से पीछे नहीं रहता, लेकिन चुनावी माहौल में हर सियासी दांव कई सवाल जरूर खड़े करता है। यूपी सबसे बड़ा रणक्षेत्र है और यहां जिस तरह कांग्रेस ने प्रियंका को उतार कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और जिस तरह सपा-बसपा गठबंधन भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में जंग और दिलचस्प होने जा रही है। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।  
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें