अखिलेश ने योगी के खिलाफ दर्ज मामले भी सार्वजनिक किए और पलट कर वार किया।
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तो क्या उस तरफ ममता का दांव उल्टा पड़ गया?
उधर ममता बनर्जी ने मोदी और सीबीआई के खिलाफ धरना देकर दो-तीन दिनों तक मीडिया का ध्यान खींचा, लेकिन उस दौरान भी महागठबंधन ने उनका खास साथ नहीं दिया। माना गया कि ममता का दांव उल्टा पड़ गया और इसका कमोबेश फायदा भाजपा के पक्ष में दिखने लगा। उत्तर प्रदेश में योगी का यह कदम कहीं न कहीं सपा को फायदा पहुंचाने वाला साबित हो रहा है। अखिलेश की पार्टी को गुंडा ब्रिगेड कहा गया, मुख्यमंत्री ने अखिलेश पर ऐसे ही आरोप लगाए और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अखिलेश के जाने से छात्र गुटों में हिंसा की आशंका जताई, अराजकता फैलने की बात कही।
अखिलेश ने प्रेस कांफ्रेंस करके साफ कहा कि उन्होंने 27 दिसंबर को ही अपने इलाहाबाद जाने की जानकारी सरकार को दे दी थी, फिर उन्हें जाने से रोकना सीधे-सीधे इस बात का संकेत है कि योगी सरकार और भाजपा सपा-बसपा गठबंधन से डर गई है। अखिलेश ने योगी के खिलाफ दर्ज मामले भी सार्वजनिक किए और पलट कर वार किया।
जाहिर है आरोप-प्रत्यारोप के खेल में कोई किसी से पीछे नहीं रहता, लेकिन चुनावी माहौल में हर सियासी दांव कई सवाल जरूर खड़े करता है। यूपी सबसे बड़ा रणक्षेत्र है और यहां जिस तरह कांग्रेस ने प्रियंका को उतार कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और जिस तरह सपा-बसपा गठबंधन भाजपा के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में जंग और दिलचस्प होने जा रही है।
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