राहुल गांधी ने इस बात को लेकर बेहद गंभीरता से रणनीति बनाई है
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क्या है आखिर राहुल गांधी की प्लानिंग
दरअसल, जिस तरह राहुल गांधी ने खुलकर ये कहा है कि यूपी में किए गए संगठनात्मक बदलाव और प्रियंका या ज्योतिरादित्य जैसे कर्मठ युवाओं को दी गई ज़िम्मेदारियां सिर्फ 2 महीने के लिए नहीं, बल्कि लंबे समय तक हैं, इससे साफ है कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव के साथ साथ उत्तर प्रदेश में भी योगी सरकार को उखाड़ने का संकल्प लेकर चल रही है। ये बात गौर करने की है कि राहुल ने अखिलेश यादव और मायावती का सम्मान करने और भाजपा को हराने के लिए हर सीट पर उनका सहयोग करने की बात कहकर भाजपा को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।
जाहिर है कांग्रेस ने और खासकर राहुल गांधी ने इस बात को लेकर बेहद गंभीरता से रणनीति बनाई है कि आखिर क्यों मायावती और अखिलेश ने कांग्रेस से दूरी बना ली, क्या उनकी पार्टी की उनके ही प्रदेश में इतनी बुरी हालत है और आखिर कबतक कांग्रेस यूपी में दूसरों के भरोसे अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ती रहेगी? बुजुर्ग और वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद को यूपी के प्रभार से मुक्त करके हरियाणा की जिम्मेदारी देना और यूपी को प्रियंका और ज्योतिरादित्य सरीखे युवा नेतृत्व के हाथों सौंपकर वह जिस नई योजना के तहत काम कर रहे हैं, उससे आने वाले वक्त में सियासत बेहद दिलचस्प होने जा रही है।
प्रियंका गांधी को भी लगने लगा है कि अब उनके सक्रिय राजनीति में आने का सही वक्त आ गया है।
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कांग्रेस अपने भविष्य को लेकर चिंतित
प्रियंका गांधी को ऐसे वक्त में यहां की ज़िम्मेदारी देने और लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराने के लिए उनका सक्रिय इस्तेमाल करने का कांग्रेस के लिए यही सबसे सही वक्त लग रहा है। खासकर ऐसे समय में जब सोनिया गांधी की सेहत ठीक नहीं रहती और जब प्रियंका गांधी अपने बच्चों की ज़िम्मेदारियों से अब खुद को करीब करीब मुक्त पा रही हैं। प्रियंका के दोनों बच्चे बड़े और समझदार हो चुके हैं। रिहान 18 साल के हो चुके हैं और मिराया 16 साल की।
पढ़ाई-लिखाई, खेलकूद से लेकर देहरादून में पढ़ते हुए ये बच्चे अपने करियर और भविष्य को लेकर निश्चिंत हैं। दूसरी तरफ भाजपा सरकार ने जिस तरह रॉबर्ट वाड्रा पर अपना शिकंजा कसा है, उससे भी प्रियंका को लगने लगा है कि अब उनके सक्रिय राजनीति में आने का सही वक्त आ गया है। जाहिर है अपनी दादी इंदिरा गांधी का अक्स लिए और बोलने की उनकी शैली के साथ साथ उनका अंदाज़ तक रखने वाली प्रियंका के लिए ज़मीन तो पहले से तैयार है। बस, देखने की बात होगी कि 2019 के इस जंग में, आरोप-प्रत्यारोपों के खेल में और भाजपा के लगातार तंज कसने के सिलसिले के बीच प्रियंका किस तरह अपनी रणनीति तय करती हैं।
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