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पश्चिम बंगाल में अमित शाह के इस मास्टर प्लान से उड़ी ममता बनर्जी की नींद, ये है बीजेपी की रणनीति?

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सिलवासा में अमित शाह
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इन दिनों उत्तरी बंगाल की मालदा लोकसभा सीट चर्चा में है। वजह है वहां 22 जनवरी को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की होने वाली चुनावी रैली। इस रैली से ज्यादा चर्चा है अमित शाह के हेलीपैड को लेकर। भाजपा का आरोप है कि ममता बनर्जी जानबूझकर अमित शाह को आने से रोकना चाहती हैं इसलिए हेलीकॉप्टर उतारने की मंजूरी नहीं दे रही हैं जबकि ममता की सफाई आई है कि फिलहाल वहां निर्माण का काम चल रहा है इसलिए वहां हेलीकॉप्टर उतारना खतरनाक होगा। बहरहाल अब भाजपा अध्यक्ष का हेलीकॉप्टर होटल के आसपास ही कहीं उतरेगा।

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आखिर क्यों हो रहा है ऐसा?  
दरअसल, ममता ने 19 जनवरी को जिस तरह विपक्षी एकता और महागठबंधन की एक विशाल झलक दिखाई, उसे लेकर अमित शाह की रैली को बेहद अहम माना जा रहा है। भाजपा की उम्मीदें पश्चिम से ज्यादा उत्तर बंगाल की सीटों पर टिकी हैं, इसलिए अमित शाह अपना चुनावी अभियान मालदा से शुरू करने जा रहे हैं। 2014 में मोदी लहर के दौरान भाजपा ने बंगाल से दो सीटें जीती थीं–आसनसोल और दार्जिलिंग की।

मालदा के आसपास उत्तर बंगाल की आठ लोकसभा सीटें हैं–कूच बिहार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, अलीपुरद्वार, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा। इनमें से 4 तृणमूल कांग्रेस के पास है, जबकि दो कांग्रेस के पास। एक-एक सीट भाजपा और सीपीएम के पास है। इन आठ जिलों की खासियत ये है कि ये बिहार, झारखंड, असम और सिक्किम के अलावा नेपाल और भूटान की सीमा से भी लगे हैं। भाजपा इन इलाकों में अपनी स्थिति को मजबूत करने और बंगाल में अपनी सीटें बढ़ाने की कोशिश में लगी है।
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ममता बनर्जी - फोटो : Facebook
भाजपा को है इस बात का डर
दरअसल, 2014 में जिस तरह भाजपा ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ औऱ राजस्थान जैसे राज्यों में शानदार प्रदर्शन किया था, इस बार उसे पूरी आशंका है कि इन राज्यों में अब उसकी सीटें बेहद कम हो रही हैं। ऐसे में जिन राज्यों में अपनी सीटें पहले से ज्यादा बढ़ाने की कोशिश में भाजपा है, उनमें से एक बंगाल भी है। इसके लिए अमित शाह पिछले दो सालों से लगातार बंगाल के दौरे कर रहे हैं और ये दावा कर रहे हैं कि इस बार भाजपा बंगाल में 2 से 22 पर पहुंच जाएगी।

इसी कोशिश के तहत भाजपा ने दिसंबर में जो तीन रथयात्राओं की योजना बनाई थी औऱ जिसे ममता बनर्जी सरकार और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट तक ने इजाजत नहीं दी, उसी को अब नए सिरे से करने की योजना भाजपा ने बनाई है। सुप्रीम कोर्ट ने रथयात्राओं से माहौल बिगड़ने की आशंका जताते हुए भाजपा को सिर्फ सभाएं और रैलियां करने की इजाजत दी थी और अपनी चुनावी यात्राओं की नए सिरे से योजना बनाने को कहा था।

क्या है आखिर भाजपा का रणनीति?
जाहिर है भाजपा अपनी जिस रणनीति के तहत बंगाल में अपनी चुनावी तैयारियां करना चाह रही है, उसे कामयाबी नहीं मिल पा रही। दूसरे 19 जनवरी को हुई महागठबंधन की विशाल रैली का जो संदेश गया है, उससे भी भाजपा खेमे में खलबली है। ऐसे में मंगलवार को मालदा में होने वाली अमित शाह की रैली को लेकर भाजपा उम्मीदों से भरी है और अपनी लोकतंत्र बचाओ रथयात्रा को नए तरीके से आयोजित करने की तैयारियों में जुटी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पार्टी ने 40 की जगह 20 दिनों में अपने रथयात्रा अभियान को समेटने और इसका स्वरूप बदलने का भी फैसला किया है। उम्मीद की जा रही है कि मालदा की रैली में अमित शाह इसका खुलासा कर सकते हैं।  

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.
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