भाजपा को है इस बात का डर
दरअसल, 2014 में जिस तरह भाजपा ने उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ औऱ राजस्थान जैसे राज्यों में शानदार प्रदर्शन किया था, इस बार उसे पूरी आशंका है कि इन राज्यों में अब उसकी सीटें बेहद कम हो रही हैं। ऐसे में जिन राज्यों में अपनी सीटें पहले से ज्यादा बढ़ाने की कोशिश में भाजपा है, उनमें से एक बंगाल भी है। इसके लिए अमित शाह पिछले दो सालों से लगातार बंगाल के दौरे कर रहे हैं और ये दावा कर रहे हैं कि इस बार भाजपा बंगाल में 2 से 22 पर पहुंच जाएगी।
इसी कोशिश के तहत भाजपा ने दिसंबर में जो तीन रथयात्राओं की योजना बनाई थी औऱ जिसे ममता बनर्जी सरकार और यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट तक ने इजाजत नहीं दी, उसी को अब नए सिरे से करने की योजना भाजपा ने बनाई है। सुप्रीम कोर्ट ने रथयात्राओं से माहौल बिगड़ने की आशंका जताते हुए भाजपा को सिर्फ सभाएं और रैलियां करने की इजाजत दी थी और अपनी चुनावी यात्राओं की नए सिरे से योजना बनाने को कहा था।
क्या है आखिर भाजपा का रणनीति?
जाहिर है भाजपा अपनी जिस रणनीति के तहत बंगाल में अपनी चुनावी तैयारियां करना चाह रही है, उसे कामयाबी नहीं मिल पा रही। दूसरे 19 जनवरी को हुई महागठबंधन की विशाल रैली का जो संदेश गया है, उससे भी भाजपा खेमे में खलबली है। ऐसे में मंगलवार को मालदा में होने वाली अमित शाह की रैली को लेकर भाजपा उम्मीदों से भरी है और अपनी लोकतंत्र बचाओ रथयात्रा को नए तरीके से आयोजित करने की तैयारियों में जुटी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पार्टी ने 40 की जगह 20 दिनों में अपने रथयात्रा अभियान को समेटने और इसका स्वरूप बदलने का भी फैसला किया है। उम्मीद की जा रही है कि मालदा की रैली में अमित शाह इसका खुलासा कर सकते हैं।
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