ये परिणाम कांग्रेस के लिए भी चेतावनी भरा संदेश लाए हैं।
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कांग्रेस के लिए है चेतावनी
ये परिणाम कांग्रेस के लिए भी चेतावनी भरा संदेश लाए हैं। यह पुरानी पार्टी अपने संक्रमण काल से गुज़र रही है। साल डेढ़ साल पहले नये जवान नेतृत्व ने कमान संभाली है। कांग्रेस को अपनी पराजय के कारण खोजने होंगे और अपनी प्राथमिकताओं को देश की प्राथमिकताओं से जोड़ना पड़ेगा। नई और पुरानी पीढ़ी के बीच अंदरुनी खिंचाव इस चुनाव में पूरे भारत ने देखा है। अब नये ख़ून को पूरी तरह मौका देना होगा। 5 वर्ष संगठन की कमजोरियों से मुक्त होने के लिए काफी हैं। यही नहीं, पूरे साल चुनाव के लिए तैयार रहने वाली एक रचनात्मक कांग्रेस समय की आवश्यकता है।
कांग्रेस को ध्यान देना होगा कि प्रचार में भाषा और आक्रोश की अभिव्यक्ति मर्यादित होना चाहिए। भले ही बीजेपी ने इसकाअधिक अतिक्रमण किया हो मगर कांग्रेस को उससे अलहदा ही रहना होगा। इंदिरागांधी, राजीव गांधी और सोनिया गांधी के ख़िलाफ़ बीजेपी ने निंदनीय अभियान चलाया। राजीव गांधी को चोर तो बीजेपी ने ही कहा था। जब-जब पार्टी ने यह अभद्र अभियान चलाया,उसे नुकसान हुआ।
चौकीदार चोर है का उपयोग करने से कांग्रेस को बचना था। मोदी के भ्रष्टाचार को अगर उजागर करना ही था तो उसके अनेक अन्य तऱीके हो सकते थे। यह कांग्रेस के चरित्र से उलट है। क्षेत्रीय दलों के लिए भी सत्रहवीं लोकसभा का चुनाव एक सबक हैं। जाति और उपजाति के समीकरणों पर सियासत का वक़्त अब चला गया। अब उन्हें राष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीरता से विमर्श करना होगा और अपने दलों के भीतर आंतरिक लोकतंत्र की खिड़की भी खोलनी होगी।
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