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भाजपा की जीत के 10 बड़े कारण, कांग्रेस समझ ही नहीं पाई शाह का गणित और मोदी की ये अलग रणनीति

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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बीते 19 मई को लोकसभा चुनाव-2019 के अंतिम चरण के मतदान के बाद जब एक्जिट पोल सामने आए तब दस में से नौ एजेंसियाें ने पूर्ण बहुमत के साथ मोदी राज की वापसी के संकेत दिए। आज मतगणना के दौरान अब तक जो रूझान सामने आए हैं एक्जिट पोल के आंकड़ों से मेल खाते हैं। यानी यह साफ हो गया है कि देश में एक बार फिर मोदी सरकार। आइए, देखें भाजपा की जीत के नौ बड़े कारण। 

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1. राष्ट्रवाद के कारण मिली जीत
लोकसभा चुनाव के पहले यह माना जा रहा था कि विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई और राफेल के सवाल को लेकर भाजपा को दबोच लेगी। ऐसा लगने भी लगा था जब पिछले साल कांग्रेस को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और कर्नाटक आदि राज्यों में सफलता मिली थी। लेकिन चुनाव के ठीक पहले नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रवाद का ऐसा डंका बजाया कि सारे मुद्दे हवा हो गए।

भाजपा की लगातार दूसरी जीत में सबसे अहम भूमिका नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी की है। - फोटो : अमर उजाला

2. विकल्प का अभाव
इस बार के चुनाव में लोगों में नरेंद्र मोदी सरकार से नाराजगी थी। इस एंटी इनकंबेंसी फैक्टर से नरेंद्र मोदी और उनके मुख्य सिपाहसलार अमित शाह भी वाकिफ थे। इसके बावजूद प्रारंभ से ही वे जीत के प्रति आशावन थे। इसकी बड़ी वजह यह रही कि विपक्ष के पास नेता का अभाव था। विपक्ष कोई एक चेहरा प्रस्तुत नहीं कर सका। अपने चुनावी रैलियों में नरेंद्र मोदी ने यह कहकर जनता को प्रभावित किया कि यदि यूपीए को जीत मिली तो देश को हर सप्ताह नया पीएम मिलेगा।

3. नरेंद्र मोदी-अमित शाह की जोड़ी
भाजपा की लगातार दूसरी जीत में सबसे अहम भूमिका नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जोड़ी की है। इन दोनों नेताओं ने चाहे भले ही भाजपा पर अपना कब्जा बना लिया हो, लेकिन व्यूह रचना में उनका कोई सानी नहीं है, यह साबित भी कर दिया है। सात चरणों में हुए मतदान के क्रम में इन दोनों नेताओं ने चरण दर चरण रणनीतियां बनायी और उन्हें नेता के बजाय प्रोफेशनल की तरह अंजाम दिया।

4. ‘मैं भी चौकीदार’ ने दिखाया रंग
भाजपा के लिए खास बात यह रही कि विपक्ष राष्ट्रीय स्तर पर नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ कोई एजेंडा तय करने में पूरी तरह विफल रहा। एक राफेल को लेकर राहुल गांधी ने ‘चौकीदार ही चोर है’ का उपयोग कर हमला किया। लेकिन जब नरेंद्र मोदी ने ‘मैं भी चौकीदार’ कहकर हमला किया तब राहुल के नारे हवा में उड़ गए। रही सही कसर सुप्रीम कोर्ट ने उतार दी जब राहुल गांधी को इस मामले में माफी मांगने को कहा गया।

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भाजपा को मिली इस जीत में जितनी भूमिका नरेंद्र मोदी और अमित शाह की थी, विपक्ष की भूमिका भी कुछ कम नहीं थी।

5. पहले से ही बिखरा था विपक्षी खेमा
भाजपा को मिली इस जीत में जितनी भूमिका नरेंद्र मोदी और अमित शाह की थी, विपक्ष की भूमिका भी कुछ कम नहीं थी। एक ओर एनडीए खेमे के सभी घटक दल एकजुट नजर आए तो विपक्षी खेमे में सभी अलग-अलग थे। कांग्रेस तो अधिकांश राज्यों में जूनियर पार्टी के रूप में रही। क्षेत्रीय दलों के साथ तालमेल व सामंजस्य के अभाव में बिखरा विपक्ष जनता के समक्ष कोई विकल्प देने में सक्षम नहीं हो सका।

6. येन-केन प्रकारेण चर्चा में बने रहे नरेंद्र मोदी
भाजपा की जीत में बड़ी वजह उनका हमेशा चर्चा में बने रहना रहा। इसके लिए भाजपा ने पहले से ही तैयारी कर रखी थी। चरण-दर-चरण उनकी आक्रामकता बढ़ती गयी। भारतीय सेना के नाम पर वोट मांगने से लेकर अभिनेता अक्षय कुमार के साथ उनके गैर राजनीतिक इंटरव्यू ने भी उन्हें चर्चा में बनाए रखा। जबकि विपक्षी नेताओं के चेहरे मीडिया में आए तो जरूर लेकिन जनता को उनसे कोई मसाला नहीं मिला जो उन्हें या तो गुदगुदा सके या फिर प्रेरित कर सके। उनके भाषणों में केवल नरेंद्र मोदी का विरोध था। जबकि नरेंद्र मोदी के भाषणों में किसी सुपरहिट फिल्म के जैसे सारे मसाले थे।

7. अजहर मसूद पर प्रतिबंध
भारतीय जनता का नरेंद्र मोदी पर विश्वास उस समय और बढ़ गया जब संयुक्त राष्ट्र संघ ने पाकिस्तानी आतंकी अजहर मसूद को अंतरराष्ट्रीय आतंकी करार दिया। इसे भाजपा और नरेंद्र मोदी ने इस रूप में पेश किया कि यह सब उनके प्रयासों के कारण ही संभव हुआ। चीन को मनाने का श्रेय भी इन्हें ही मिला। भाजपा की रणनीति ही रही कि आम जनता के दिमाग से वह तथ्य भी गायब हो गया कि इसी अजहर मसूद को अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने रिहा किया था।

8. नोटबंदी और जीएसटी मामले में भी विपक्ष को मिली हार
यह नरेंद्र मोदी के प्रति भारतीय जनता का विश्वास ही रहा कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण अर्थव्यवस्था की डांवाडोल स्थिति भी मुद्दा नहीं बन सका।हालांकि इसकी पूरी कोशिश विपक्ष ने की, लेकिन जनता ने नरेंद्र मोदी के इन दोनों फैसलों का समर्थन किया। नरेंद्र मोदी अर्थशास्त्री नहीं होने के बावजूद यह बताने में सफल रहे कि इन दाेनों फैसलों से देश की आर्थिक स्थिति सुदृढ हुई है।

9. मजबूत नेता की छवि का लाभ
नरेंद्र मोदी को इस बार के चुनाव में सबसे अधिक लाभ इस छवि के कारण मिला कि वे मजबूत नेता हैं। जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले के बाद बालाकोट हमले को उन्होंने जिस तरीके से चुनावी लाभ के लिए भुनाया विपक्षी दलों ने उनकी आलोचना अवश्य की। लेकिन देश की जनता इससे संतुष्ट दिखी कि भारत अब केवल हमले सहता नहीं है बल्कि पलटकर जवाब भी देता है।

10.  अमित शाह का प्रबंधन और चुनावी गुणा-भाग 
इस चुनाव में भाजपा के रणनीतिकार और अध्यक्ष अमित शाह की रणनीति एक बार फिर कारगर साबित हुई। लगातार काम, छोटे से छोटे कार्यकर्ताओं से सीधा संपर्क, बेहतर मैनजमेंट, विपक्षी को उसी के मुद्दों पर जाकर घेरना और सही उम्मीदवारों का चयन एक बार फिर से भाजपा को केंद्र की सत्ता में ले आया। 

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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