फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

समझदारी से जीना भी एक कला है: खुद को समझें, असहमति के बावजूद दूसरों का सम्मान करें

Thu, 22 Oct 2026 08:41 AM IST
ज्योति भास्कर कैली मैकगोनागल

सार

समझदारी से जीने का अपना एक अलग ही मजा है। यह इस बात में नहीं कि जीवन में कठिनाइयां नहीं आतीं, बल्कि इसमें है कि उन कठिनाइयों के बीच भी हम अपना विवेक नहीं खोते।
विज्ञापन
खुद को समझने की यात्रा पर निकलना जरूरी (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला प्रिंट ग्राफिक्स / एजेंसी
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अक्सर हम सोचते हैं कि जीवन तभी अच्छा होगा, जब हमारे सारे संकट दूर हो जाएंगे, चिंताएं नहीं होंगी, सब कुछ हमारी इच्छा के मुताबिक ही चलेगा और भविष्य को लेकर मन में कोई अनिश्चितता या डर नहीं रहेगा। और, ऐसा करके हम अपने सुख को आने वाले कल से बांध देते हैं। लेकिन, क्या जीवन की सार्थकता मुश्किलों के खत्म हो जाने में ही है? क्या शांति का अर्थ यही रह जाता है कि हमारे आसपास कुछ भी ऐसा घटित न हो, जो हमें विचलित कर सके?

विज्ञापन


जीवन की बड़ी सच्चाई यह है कि हम अपनी कोशिशों व फैसलों को नियंत्रित कर सकते हैं, पर हर परिस्थिति, व्यक्ति या परिणाम को अपनी इच्छानुसार नहीं ढाल सकते। परिपक्वता इसी अंतर को पहचानने से शुरू होती है। समझदारी से जीने का अपना एक अलग ही मजा है। यह इस बात में नहीं कि जीवन में कठिनाइयां नहीं आतीं, बल्कि इसमें है कि उनके बीच भी हम अपना विवेक नहीं खोते।

कल्पना कीजिए कि आपकी कोई योजना असफल हो गई, किसी करीबी ने धोखा दे दिया या भविष्य वैसा दिखाई नहीं दे रहा, जैसा सोचा था। ऐसे क्षणों में परिस्थिति से अधिक कष्ट कभी-कभी हमारी अपनी ही प्रतिक्रिया देती है। हम बार-बार सोचते हैं कि ऐसा होना ही नहीं चाहिए था। तब हम बीती घटनाओं को मन में दोहराते हैं, खुद को दोष देते हैं या उन परिणामों को बदलने की कोशिश करते हैं, जो हमारे नियंत्रण से बाहर हैं। दुख होना स्वाभाविक है। लेकिन, दुख महसूस करना और अपना विवेक खो देना, दो अलग-अलग बातें हैं। समझदारी यह नहीं कि हमें दुख न हो, बल्कि यह है कि दुख के बीच भी हम अपने लिए सही रास्ता खोजने की क्षमता बनाए रखें।
विज्ञापन


दरअसल, जीवन की कुछ परिस्थितियां ऐसी होती हैं, जिन्हें जीत पाना संभव नहीं होता। समय बीत जाता है। कुछ अवसर लौट कर नहीं आते। कुछ संबंध बदल जाते हैं और कभी पूरी ईमानदारी से प्रयास करने के बाद भी परिणाम हमारी इच्छा के उलट ही मिलते हैं। यदि हम हर परिस्थिति को जीतने की कसौटी पर ही परखेंगे, तो जीवन का एक बड़ा हिस्सा हमें पराजय जैसा ही दिखाई देने लगेगा। असफलता हमें अपनी सीमाएं पहचानना सिखाती है। कभी किसी संबंध का बदलना हमारी अपेक्षाओं पर फिर से विचार करने का अवसर देता है।

जीवन की खूबसूरती कभी किसी समस्या को बेहतर ढंग से समझ लेने में होती है और कभी प्रतिक्रिया देने के बजाय सोचने का चुनाव करने में। हम अक्सर मानते हैं कि साहसी लोगों को डर नहीं लगता। पर, असल जीवन में साहस यह होता है कि डर लगने के बावजूद हम अपनी जिम्मेदारी निभाएं, अपनी गलती स्वीकारें, क्षमा मांग लें या जरूरत पड़ने पर मदद लें। साहस कभी आगे बढ़ने में होता है और कभी रुक जाने में। कभी अपने विचार पर डटे रहने में और कभी पुरानी धारणा को बदल लेने में। कभी कमजोरी को ईमानदारी से स्वीकार करना ही सबसे बड़ा साहस होता है।

सूत्र: खुद को समझें
असहमति के बावजूद दूसरों का सम्मान करें। दूसरों की तरह आप भी गलतियां करते हैं। अपनी गलतियों को स्वीकार करने से आप छोटे नहीं हो जाएंगे, बल्कि यह तो अपने आप में एक गुण है। अपने व्यवहार व कर्मों को लेकर यह सजगता जीवन का एक नया पक्ष दिखाएगी और यहीं से आप खुद को समझने की यात्रा पर निकल सकेंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें