मैं आपसे एक घटना का जिक्र करता हूं। वर्ष 1871 में एक युवा मेडिकल छात्र ने एक पुस्तक में कुछ शब्द पढ़े। वे शब्द थे, ‘हमारा मुख्य काम यह देखना नहीं है कि दूर क्या धुंधला-सा दिखाई दे रहा है, बल्कि वह करना है, जो हमारे सामने स्पष्ट रूप से मौजूद है।’ इन शब्दों ने उस युवक का पूरा जीवन बदल दिया। वह युवा छात्र आगे चलकर सर विलियम ऑस्लर के नाम से विश्व के सबसे सम्मानित चिकित्सकों में गिना गया। जब लोग उनकी असाधारण सफलता का रहस्य पूछते थे, तो उन्हें लगता था कि यह उनकी असाधारण बुद्धिमत्ता का परिणाम है। लेकिन, सच्चाई कुछ और थी। उनका रहस्य था-वर्तमान में जीना। उन्होंने अपने जीवन को ‘दिन-प्रतिदिन’ जीना सीखा। वह कल की असफलताओं और आने वाले कल की चिंताओं को वर्तमान पर हावी नहीं होने देते थे।
मेरा मानना है कि बीते हुए कल को कोई भी बदल नहीं सकता और भविष्य पूरी तरह हमारे नियंत्रण में कभी नहीं होता। हमारे पास केवल वर्तमान क्षण है। यदि हम इसी क्षण का सर्वोत्तम उपयोग कर लें, तो हमारा भविष्य स्वयं बेहतर बनने लगता है। भविष्य की सबसे अच्छी तैयारी भविष्य के बारे में चिंता करना नहीं, बल्कि आज के कार्य को पूरी ईमानदारी और उत्कृष्टता के साथ करना है। मैंने यह भी देखा है कि सफलता अक्सर उन्हीं लोगों के पास जाती है, जो अपने वर्तमान की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाते हैं। वे अवसरों की प्रतीक्षा नहीं करते, बल्कि अपने सामने मौजूद अवसरों का पूरा लाभ उठाते हैं। समय का सही उपयोग ही उन्हें दूसरों से अलग बनाता है। अत्यधिक चिंता मनुष्य की शक्ति, आत्मविश्वास और उत्साह को धीरे-धीरे समाप्त कर देती है। उसी प्रकार अतीत के दुखों को बार-बार याद करना भी जीवन की शांति छीन लेता है। बुद्धिमानी इसी में है कि हम अतीत से सीख लें, भविष्य के लिए उचित योजनाएं बना लें, लेकिन अपनी पूरी शक्ति वर्तमान के कर्मों में लगा दें।
मैं हमेशा कहता हूं कि कल की चिंता आज की शक्ति को कमजोर कर देती है। यदि आप आज को श्रेष्ठ बना लेते हैं, तो आने वाला हर कल अपने आप बेहतर होता चला जाएगा। इसलिए अपने सामने मौजूद अवसरों को पहचानिए, पूरे विश्वास के साथ मेहनत कीजिए और सकारात्मक सोच बनाए रखिए।