सशस्त्र बल (विशेषाधिकार) कानून
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शांति के लिए दूरदर्शी कदम
नगालैंड के मोन जिले की घटना के बाद केंद्र सरकार ने पूरी विनम्रता के साथ उस घटना पर अफसोस जताकर दूरदर्शी कदम उठाया है। उस घटना के बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि ''गलत पहचान के कारण ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी है। केंद्र सरकार उच्च स्तरीय जांच करेगी और जो कुछ हुआ है, उस पर भारत सरकार खेद व्यक्त करती है।''
गृह मंत्री के इस बयान से नगालैंड के लोगों को यह जरूर महसूस होगा कि भारत सरकार पूरी तरह संवेदनशील है और सुरक्षाबलों की भूल की वजह से दुखी भी है। ऐसे समय में गृहमंत्री के उस बयान ने नगा समुदायों को बीच कुछ हद तक मलहम का काम किया था।
सुरक्षाबलों पर हमले के बाद केंद्र सरकार की तरफ से संयम भरा बयान आया। इसके पहले तक तो सुरक्षाबल अपनी गलती को छिपाने का प्रयास करते थे, लेकिन उस घटना के बाद ऐसा नहीं हुआ।
वह ऐतिहासिक क्षण आ ही गया। गत 30 मार्च की रात्रि को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अफस्पा के अधिकार क्षेत्र को सीमित करने की जानकारी दी तो पूर्वोत्तर के लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। हालांकि अभी उन इलाके में यह कानून लागू रहेगा, जहां पर उग्रवादी हिंसा की आशंका है।
मोदी सरकार का साहसिक कदम
यह साहसिक कदम मोदी सरकार ने उठाया। यह भी सच है कि असम समेत पूर्वोत्तर के कई उग्रवादी संगठनों के साथ हुए लोकतांत्रिक समझौते और आने वाले दिनों में भी अल्फा समेत कई उग्रवादी धड़ों के साथ शांति वार्ता चल रही है। मोदी सरकार के लगातार प्रयासों से पूर्वोत्तर के क्षेत्रों में सुरक्षा स्थिति में सुधार और विकास कार्यों में तेजी आई है, जिसके परिणामस्वरूप दशकों के बाद अफस्पा के तहत घोषित अशांत क्षेत्रों में भी स्थिरता देखी गई है।
केंद्र सरकार ने अफस्पा कानून के दायरे को कम करने का फैसला किया है। अमित शाह ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों के दौरान भारत सरकार ने पूर्वोत्तर में उग्रवाद समाप्त करने और स्थायी शांति लाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वप्न को साकार करने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।
केंद्र सरकार की अफस्पा सीमित करने के फैसले को लेकर घोषणा का पूर्वोत्तर के विभिन्न दलों और संगठनों ने स्वागत किया है। आसू के सलाहकार समुज्जवल भट्टाचार्य ने केंद्र के फैसले का स्वागत करते हुए संपूर्ण पूर्वोत्तर से इस कानून को हटाने की मांग की है। असम गण परिषद के अध्यक्ष अतुल बोरा ने पूर्वोत्तर के लोगों की भावनाओं का सम्मान करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया है।
गत 4 अप्रैल को दीमापुर में विभिन्ना नगा संगठनों ने केंद्र के फैसले को सकारात्मक कदम बताया है। दरअसल केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद से पूर्वोत्तर का माहौल बदल रहा है। वे लोग आम भारतीय की तरह भयमुक्त होकर जीना चाहते हैं। लेकिन इस कानून से मिले अधिकारों के बल पर सुरक्षाबलों की ज्यादती से भूमिगत संगठनों को मदद मिल रही थी।
केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर के नागरिकों की एक सही मांग का तार्किक आधार दिया है। इससे पूर्वोत्तर में राष्ट्रीयता मजबूत होगी और आम लोगों को महसूस होगा कि उनकी बात दिल्ली में बैठी सरकार अब सुनने लगी है।
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