फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जीवनधारा: हमारे भीतर हमेशा एक घर होता है, पेड़ और प्रकृति से सीखें शांति और संतुलन

Mon, 23 Mar 2026 08:49 AM IST
Shivam Garg हरमन हेस

सार

तुम इसलिए बेचैन हो, क्योंकि तुम्हारे जीवन का मार्ग और तुम्हारी यात्रा तुम्हें घर और मां से दूर ले जा रही है। पर सच तो यह है कि हर दिन, हर पल तुम एक कदम और करीब जाते हो उस असली घर की ओर, जो तुम्हारे भीतर है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पेड़ मेरे लिए हमेशा सबसे गहरे उपदेशक रहे हैं। मैं उनका आदर करता हूं जब वे जंगलों और उपवनों में अपने समूहों के साथ खड़े होते हैं, और उससे भी अधिक तब, जब वे अकेले खड़े होते हैं-अडिग, शांत, और आत्मनिर्भर। वे किसी पलायनवादी साधु की तरह नहीं, जो किसी कमजोरी के कारण दुनिया से भाग गए हों, बल्कि उन महान, एकाकी पुरुषों की तरह, जैसे बीथोवेन और नीत्शे, जो अकेले रहकर भी संपूर्ण होते हैं। उनकी ऊंची शाखाओं में दुनिया की सरसराहट गूंजती है और उनकी जड़ें अनंत की गहराइयों में विश्राम करती हैं, फिर भी वे खुद को खोते नहीं। वे पूरे जीवन-बल के साथ एक ही प्रयत्न करते हैं-अपने स्वभाव के अनुसार पूर्ण होना, अपने अस्तित्व को गढ़ना और स्वयं को प्रकट करना।

विज्ञापन


एक सुंदर और सशक्त वृक्ष से अधिक पवित्र और प्रेरणादायक कुछ भी नहीं। जब एक पेड़ कटता है और उसके तने की परतें उजागर होती हैं, तब उसमें उसकी पूरी जीवन-कथा लिखी होती है। ऊंचे पहाड़ों और निरंतर विपरीत परिस्थितियों में ही सबसे मजबूत वृक्ष पनपते हैं। पेड़ एक पवित्र स्थान की तरह हैं। जो उन्हें सुनना और उनसे संवाद करना जानता है, वह जीवन का सत्य समझ सकता है। वे किसी किताबी ज्ञान और उपदेशों का प्रचार नहीं करते, बल्कि जीवन के उस प्राचीन नियम को जीते हैं, जो हर परिस्थिति में स्थिर रहता है।

एक वृक्ष मानो कहता है- ‘मेरे भीतर एक बीज है, एक चिंगारी, एक विचार। मेरी शक्ति मेरा विश्वास है।

जब हम पर कोई विपत्ति आती है और हम अपनी जिंदगी और नहीं झेल पाते, तब एक पेड़ हमसे कुछ कहना चाहता है: शांत हो जाओ! शांत हो जाओ! मेरी तरफ देखो! जिंदगी न आसान है, न मुश्किल। अपने भीतर ईश्वर को बोलने दो, और तुम्हारे विचार शांत हो जाएंगे। तुम इसलिए बेचैन हो, क्योंकि तुम्हारे जीवन का मार्ग और तुम्हारी यात्रा तुम्हें घर और मां से दूर ले जा रही है। लेकिन सच तो यह है कि हर दिन, हर पल तुम एक कदम और करीब जाते हो उस असली घर की ओर, जो तुम्हारे भीतर है। घर सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि एक मानसिक और भावनात्मक स्थिति है, जो तुम्हारे दिल में बसी हुई है। शाम की हवा में जब पेड़ों की सरसराहट सुनाई देती है, तो मन में एक अनोखी तड़प जागती है, भटकने की, खोजने की। लेकिन यह भागने की इच्छा नहीं, बल्कि अपने असली घर की खोज है। हर रास्ता अंततः उसी ओर ले जाता है। हर कदम एक जन्म है, हर कदम एक अंत, और हर अंत एक नई शुरुआत। पेड़ हमें सिखाते हैं कि उनके विचार गहरे, धीमे और स्थिर होते हैं। वे हमसे अधिक बुद्धिमान हैं-जब तक कि हम उन्हें सुनना न सीख लें। और जब हम सुनना सीख जाते हैं, तब हमारे भीतर एक अद्भुत शांति और आनंद जन्म लेता है। तब हम कुछ और बनने की इच्छा नहीं रखते। हम वही बनना चाहते हैं जो हम हैं। यही घर है। यही खुशी है। -बाउम: बेट्राचटुंगेन एंड गेडिचटे के अनूदित अंश

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें