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जीवन किसी एक नियम से संचालित नहीं होता: परिस्थितियों की बदली लय को सीखना जरूरी

Tue, 09 Jun 2026 06:55 AM IST
नितिन गौतम निकोलो मैकियावेली, अमर उजाला

सार

जीवन अक्सर उन्हीं का साथ देता है, जो परिस्थितियों की बदलती लय के साथ स्वयं को बदलना सीख लेते हैं। शायद यही वह सूक्ष्म ज्ञान है, जो मनुष्य को केवल सफल नहीं, बल्कि सचमुच बुद्धिमान बनाता है।
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ब्लॉग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मैंने अपने जीवन में अनेक लोगों को देखा है। कुछ ऐसे थे, जो हर कदम सोच-समझकर रखते थे, और कुछ ऐसे, जो तूफान की तरह आगे बढ़ते थे। कुछ धैर्य के सहारे अपनी राह बनाते थे, तो कुछ साहस और जोखिम के बल पर मंजिल तक पहुंचने का प्रयास करते थे। उन्हें देखते हुए मेरे मन में अक्सर एक प्रश्न उठता था कि सफलता का रहस्य आखिर कहां छिपा है? क्या वह बुद्धि में है, स्वभाव में है, अथवा भाग्य के किसी अदृश्य हाथ में? समय के साथ मुझे लगा कि उत्तर इनमें से किसी एक में नहीं है।
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जीवन किसी एक नियम से संचालित नहीं होता। नदी हर जगह एक जैसी नहीं बहती। कहीं वह शांत होकर धरती को सींचती है, कहीं प्रचंड होकर चट्टानों को काटती हुई आगे बढ़ती है। जो नाविक केवल शांत जल को जानता है, वह तूफान में भटक सकता है। और जो केवल तूफानों से लड़ना जानता है, वह शांत धाराओं की दिशा को समझने में चूक सकता है। मनुष्य भी कुछ ऐसा ही है। हम अपने स्वभाव को ही अपनी सबसे बड़ी शक्ति मान लेते हैं। सावधान व्यक्ति सोचता है कि हर समस्या का समाधान सावधानी में है। साहसी व्यक्ति मानता है कि हर द्वार साहस से खोला जा सकता है। पर समय किसी एक स्वभाव का पक्ष नहीं लेता। समय बदलता रहता है, और उसके साथ जीवन की परिस्थितियां भी बदल जाती हैं। मैंने ऐसे लोगों को देखा है, जो एक दौर में अत्यंत सफल थे, लेकिन वही तरीके दूसरे दौर में उन्हें असफलता की ओर ले गए। वहीं कुछ साधारण क्षमताओं वाले लोग आगे बढ़ गए, क्योंकि उन्होंने समय की धड़कन को सुन लिया था। भाग्य को लेकर भी मनुष्य अनेक भ्रम पालता है। वह अपनी सफलता का पूरा श्रेय स्वयं को देता है, तो असफलताओं का दोष भाग्य पर डाल देता है।

किंतु जीवन इन दोनों के बीच कहीं स्थित है। भाग्य समुद्र की हवा की तरह है, वह हमारे अधिकार में नहीं। लेकिन अपने पालों को किस दिशा में मोड़ना है, यह हमारे हाथ में है। जो केवल हवा पर निर्भर रहता है, वह हवा बदलते ही भटक जाता है। और जो हवा की उपेक्षा करता है, वह भी बहुत दूर तक नहीं पहुंच पाता। बुद्धिमानी केवल महान लोगों की नकल करने में नहीं है, बल्कि उनके दृष्टिकोण को समझने में है। एक कुशल धनुर्धर दूर स्थित लक्ष्य पर निशाना लगाते समय तीर को लक्ष्य से कुछ ऊपर साधता है। वह जानता है कि उसकी शक्ति सीमित है, फिर भी ऊंचा लक्ष्य उसे सही दिशा देता है। जीवन में भी बड़े आदर्श इसलिए आवश्यक हैं कि वे हमें हमारी सर्वोत्तम संभावनाओं तक पहुंचने की प्रेरणा दें। सफलता समय को पहचानने की कला है। यह जानने की क्षमता है कि कब धैर्य रखना है, कब साहस दिखाना है, कब प्रतीक्षा करनी है और कब आगे बढ़ना है। जीवन अक्सर उन्हीं का साथ देता है, जो परिस्थितियों की बदलती लय के साथ स्वयं को बदलना सीख लेते हैं। शायद यही वह सूक्ष्म ज्ञान है, जो मनुष्य को केवल सफल नहीं, बल्कि सचमुच बुद्धिमान बनाता है।
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 समय की लय को समझें
सफलता केवल साहस, धैर्य, बुद्धि या भाग्य का परिणाम नहीं होती; वह समय की बदलती धड़कनों को पहचानने और स्वयं को उनके अनुरूप ढालने की कला है। जो व्यक्ति अपने स्वभाव का कैदी बनने के बजाय परिस्थितियों की भाषा पढ़ना सीख लेता है, वही जीवन की हवाओं को अपने पक्ष में मोड़ पाता है। सही समय पर सही रूप में स्वयं को बदलें।
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