राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान की घोषणा
इस कार्यक्रम के होने से तात्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह से घोषणा की कि कोई बेटी जब अपने घर आती है तो उसे विदाई में कुछ न कुछ दिया जाना चाहिए, इसी समारोह में राष्ट्रीय लता मंगेशकर सम्मान समारोह की घोषणा हुई, जोकि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा दिया जाने वाला देश का सुगम संगीत का सबसे बड़ा पुरस्कार है। आज इस सम्मान को 28 बरस हो गए हैं। इसमें एक वर्ष संगीतकार और एक वर्ष गायक और गायिका को सम्मानित किया जाता है। पहला पुरस्कार नौशाद साहब को दिया गया था। लता जी के नाम से शुरू हुए इस पुरस्कार का सिलसिला आज भी जारी है।
मेरी जिंदगी का सबसे अनमोल क्षण था वो...: संजय पटेल
लता जी के गीतों पर एक किताब बाबा तेरी सोन चिरैंया लता दीनानाथ मंगेशकर ग्रामोफोन रिकॉर्ड संग्रहालय से प्रकाशित हुई। इस किताब के कवर को मैंने डिजाइन किया था। जैसे ही ये पुस्तक मुंबई में लता जी के घर प्रभु कुंज में पहुंची वे इसके कवर को देखती रहीं। उस किताब के डिजाइन में फर वाली टोपी पहने दीनानाथ मंगेशकर यानी उनके पिता की तस्वीर थी। किताब के कवर को देखकर उनका पहला सवाल था- इसे किसने बनाया है? कई दिनों बाद मुझे मुंबई से फोन आया कि लता जी आपसे बात करना चाहती हैं... उन्होंने कहा- मैं लता बोल रही हूं। मेरे लिए वो इस सृष्टि का सबसे अनमोल क्षण था। तकरीबन 6 मिनट उन्होंने मुझसे बात की और पूछा कि ये विचार आपके दिमाग में कैसे आया? इसमें बाबा का चित्र लगाने की प्रेरणा आपको कैसे मिली? ये सवाल मुझे मौन कर गया। उन्होंने इसे अनमोल बताया। किसी कलाकार के लिए इससे बड़ी बात नहीं हो सकती।
इंदौर से रहा आत्मीय रिश्ता
80 के दशक से पहले लता जी का इंदौर से आत्मीय रिश्ता रहा। जैसे कोई अपने वतन को कभी नहीं भूलता उसी तरह लता जी के लिए कोल्हापुर, सांगली और इंदौर रहा। इंदौर बहुत आती रहीं...इंदौर उनका अपना वतन था। वहां की रातें कैसी होती हैं, क्या वहां का सर्राफा अभी भी वैसा ही है? इन सभी बातों को जानने में उनकी दिलचस्पी जिंदगी भर रही... उन्हें इंदौर के सराफा की खाऊ गली हमेशा याद रही। यहां के गुलाब जाबुन, रबड़ी और दही बडे़ उन्हें बेहद पसंद थे। इंदौर के लोगों से मिलकर वे अक्सर पूछती थीं- क्या सराफा अभी भी वैसा ही है।
बेसुरी हो गई दुनिया...
मुझे लगता है आजादी के बाद आज वो दिन आया है जब भारत भूमि थोड़ी बेसुरी सुनाई दे रही है। ऐसा लग रहा है जैसे एक सुर कहीं खो गया है। सा रे ग म प ध नी सा सात सुर होते हैं, आठवां सुर अगर कोई था तो वो लता मंगेशकर थीं। वो सुर आज विलुप्त हो गया है। ये सुनिश्चित है कि ये दुनिया बदलेगी, जमाना चलता रहेगा। प्रगति होती रहेगी..विकास होता रहेगा लेकिन मेरा मानना है कि एक समय चक्र ऐसा होता है जिसके बाद प्रलय आता है और सृष्टि समाप्त हो जाती है। प्रलय के बाद भी अगर कोई चीज बची रहेगी तो वो होगा लता का स्वर...जो कभी इस कायनात से गुम नहीं होगा।