लॉकडाउन में जो दो चीजें कोरोना की पीड़ा के अलावा सबसे ज्यादा हुई हैं वो हैं शादियां और बच्चों का जन्म। गोया कि जीवन के ये सबसे महत्वपूर्ण दो पड़ाव ऐसी ही इत्मीनान वाली छुट्टियों का इंतजार कर रहे थे। आखिर सब देखभाल कर करेंगे भई। ऐसे ही थोड़े न। तो अपने कैटरीना और विक्की भी वैवाहिक जीवन की ओर कदम बढ़ा गए हैं। बीच में भांजी मारी मुए कोरोना के ओमीक्रॉन नाम के विलन ने।
अब भाई, हीरो है हीरोइन है तो विलेन का होना तो बनता है न। अब इतने हैप्पनिंग समय में इतने हैप्पनिंग जोड़े की, इतनी हैप्पनिंग शादी हो और उसकी चर्चा न हो तो क्या खाक हैप्पनिंग एंडिंग... मतलब हैप्पी एंडिंग होगी! इसलिए जब से अखबारों और न्यूज़ चैनल्स ने बिना इनविटेशन शादी के वेन्यू से लेकर विक्की के दूर के, चाचा के, साले के परिवार के एक्साइटमेंट और मेहमानों की लिस्ट से लेकर मेन्यू तक की ब्रेकिंग न्यूज़ बनानी शुरू की थी। तबसे इस आम की कॉलोनी के लोगों की ज़िंदगी भी 'मेंटोज' जिंदगी बन गई थी। भई, पेट मे भरपेट खाना हो, सिर पर
छत का आसरा हो और खुद की जिंदगी में कोई एक्साइटमेंट न बचा हो तो गॉसिप का अनलिमिटेड पैक सुकून और एक्साइटमेंट दोनों का जुगाड़ कर देता है। फिर जब वो गॉसिप किसी ऐसी घटना से जुड़ी हो जिसमें मसाला ही मसाला हो कहने ही क्या। सो इस आम सी लेकिन खुद को खास से बिल्कुल नीचे न समझने वाली कॉलोनी में भी कुछ ऐसी ही चर्चा जोरों पर थी।
तो जी, ग्रैंड वेडिंग वाले जोड़े की लिस्ट में शामिल होने जा रहे हैं विक्की कौशल और कैटरीना कैफ यानी 'कैटीक्की'। हम तो यही नाम रखेंगे जी। हमारी कैटरीना छोरों से कम है के? और ये नाम लगता भी कितना प्यारा सा है। बिल्कुल छोले-टिक्की की माफिक। स्वाद और रस से भरा। मानो कैटरीना वाले आम के रस की कुछ बूंदें यहां भी छलक गई हों। यूं कहने को भले ही विक्की कौशल के फिल्मी करियर से कहीं ज्यादा लम्बा समय कटरीना को हिंदी प्रैक्टिस करते हुए हो चला हो पर लड़की ने कभी घमंड नहीं किया।
ऐसा परसों इसी कॉलोनी वाली एक आंटी अपनी छत से चिल्लाते हुए सामने की छत पर धूप सेकती खड़ी दूसरी आंटी से कह रही थीं। भले ही चाहे इधर वाली आंटी की लड़की घर की पाबंदियों से तंग आकर मैराथन जैसी भागी थी घर से और फिर एक अदद लड़का जीत कर ही घर आई। या फिर उधर वाली आंटी के लाड़ के लड्डू ने अपनी ही बहन की सहेली को छेड़ने के बाद उसकी चप्पलों से अपनी सेवा करवाई थी, ये अलहदा बात है। फिलहाल की चिंता तो कैटरीना के ब्याह की है।
तो भई, इधर वाली आंटी को चिंता हुई कि छोरी (कैटरीना के लिए फिलहाल पूरे समय अभी यही सम्बोधन मान लेते हैं। क्योंकि वो भी हमारी बहन-बेटी ही है) तो बहुत ही गोरी है लेकिन छोरा (यानी विक्की) सांवला। तो छोरा निकला 'लक्की'। लेकिन उधर वाली आंटी ने दिलासा दिया- 'अरे चिंता मत करो अपना छोरा अच्छा कमाता है। वैसे भी लड़कों का रूप थोड़े ही देखा जाता है। तो छोरी ही लक्की है।'
आंटियों की चर्चा को सुन रहे गट्टू भैया जिन्होंने कुछ समय पहले ही शहर के एक बड़े नेता के, पीए के, भाई के, साले के, बेटे के, दोस्त के साथ छुटभैय्ये नेता होने का खाता खोला था और इसके बावजूद पिछले हफ्ते तमाम सिग्नल्स देने के बाद कॉलोनी की कैटरीना अपनी शादी में इनवाइट करते हुए कह गई- 'भैया, आप तो इतने बड़े नेता हैं। थोड़ा घर आकर पापा की मदद कर देंगे तो बहुत सपोर्ट हो जाएगा।
आपके रहने से पापा को हिम्मत भी मिल जाएगी।' और गट्टू भैया ने अच्छे भैया की तरफ विदाई तक मजाल है जो लघुशंका के लिए तक मोहलत मांगी हो। बतौर इनाम जाते-जाते कैटरीना मतलब भैया की कैटरीना (असली नाम तो भैया को अब पता चला कि बिंदिया था) भैया के गले लग कर भी इतना रोई, इतना रोई की भैया अब तक लाल रंग पर पीले दिल और नीले फूल बने रुमाल से आंखें और नाक पोंछते जा रहे हैं। तो गट्टू भैया का दुख और घाव दोनों ताजे थे, सो आंटियों की चर्चा सुनकर उन्होंने गहरी सांस लेते हुए बस इतना कहा- 'बिचारे भाईजान।'
सिर पर छबड़ी रखकर अदरक बेचने वाली अम्मा भी थोड़े से प्राकृतिक विटामिन को अपने नाम करते हुए धूप के एक टुकड़े की तरफ बढ़ीं, जमीन पर बैठते हुए और इस चर्चा में शामिल होते हुए बोलीं- 'इत्ती मेंगी (महंगी) सादी हो री हे। मामेरा करने में कित्ती मुस्किल आएगी जब। बिचारा मायका का लोग तो जनम भर देता ही रे।'