फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कर्नाटक चुनाव: दक्षिण भारत के सबसे बड़े दुर्ग को फतह करने में जुटी पार्टियां, पर राह इतनी आसान नहीं

सार

जैसे जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है राजनीतिक बयानबाजियां और एक-दूसरे को घेरने की कोशिशें भी तेज होती जा रही हैं। कांग्रेस ने घोषणापत्र में बजरंग दल की तुलना पीएफआई से कर दी है। पीएम मोदी और अमित शाह सहित पूरी बीजेपी इसे लेकर हमलावर हो गई है।
विज्ञापन
कर्नाटक चुनाव 2023 - फोटो : Amarujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

कर्नाटक विधानसभा चुनाव अब अपने आखिरी चरण में है, सभी पार्टियों की तैयारियां जोरों पर है। बीजेपी सत्ता में वापसी करना चाहती है लेकिन कर्नाटक की जनता ने हाल के वर्षों में सत्ताधारी दल को दोबारा सत्ता सौंपी नहीं है। दक्षिण भारत में इकलौता दुर्ग होने की वजह से पार्टी इसे किसी भी कीमत पर नहीं खोना चाहती है। यही नहीं, बीजेपी के लिए दक्षिण में पैर पसारने के लिहाज से यह शानदार मौका भी है। पार्टी ने इसके लिए कोई कसर भी नहीं छोड़ी है। पब्लिक रैली हो या वर्चुअल रैली, वीडियो मैसेज हो या पदयात्रा, सभी माध्यमों का इस्तेमाल कर खुद को मतदाताओं से जोड़ने का काम किया जा रहा है।

विज्ञापन


जैसे जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है राजनीतिक बयानबाजियां और एक-दूसरे को घेरने की कोशिशें भी तेज होती जा रही हैं। इसी कोशिश में कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में बजरंग दल की तुलना पीएफआई से कर दी है। पीएम मोदी और अमित शाह सहित पूरी बीजेपी इसे लेकर हमलावर हो गई है। बीजेपी ने इस पूरे मामले को श्रीराम और हनुमान से जोड़ते हुए दिल्ली से लेकर बेंगलुरु तक प्रदर्शन शुरू कर दिया है। संभावना इस बात की है कि मामला बढ़ने पर कांग्रेस को विरोध का सामना करना पड़े।
 

बीजेपी ने अपने घोषणापत्र के जरिए भी सभी वर्ग के मतदाताओं को लुभाने की कोशिश की है, जोकि स्वाभाविक है। जहां एक तरफ हर बीपीएल परिवार को रोज आधा किलो नंदिनी दूध देने, लोगों को सस्ता अनाज मुहैया कराने और उगादी, गणेश चतुर्थी तथा दीपावली पर तीन गैस सिलिंडर मुफ्त देने जैसे आश्वासन देकर कमजोर तबकों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है। वहीं, समान नागरिक संहिता और एनआरसी लागू करने का वादा करके पार्टी ने राष्ट्रीय मुद्दों को भी हवा दे दी है। पार्टी ने शहरी इलाकों में 5 लाख और ग्रामीण इलाकों में 10 लाख घर बनाने का प्रस्ताव भी रखा है।

 

भाजपा का चुनावी मास्टरस्ट्रोक

कर्नाटक में मुसलमानों के लिए आरक्षण को खत्म करने और इसे लिंगायत और वोकालिंगा में बांटने का बीजेपी सरकार का फैसला इस चुनाव का सबसे बड़ा मास्टरस्ट्रोक है। पार्टी का तर्क है कि भारतीय संविधान में धर्म आधारित आरक्षण का प्रावधान नहीं है। दरअसल, राज्य में यह मांग लंबे समय लंबित थी। वहीं, विपक्ष का आरोप है कि पार्टी ने दोनों ताकतवर समुदायों को लुभाने के लिए इस कोटा को दोनों समुदायों में बांट दिया है।

विज्ञापन


यहां की राजनीति पर लिंगायत और वोकालिंगा समुदाय का वर्चस्व है। लिंगायत करीब 18% और वोकालिंगा 16% है और ये किसी भी राजनीति समीकरण को बदलने की ताकत रखते हैं।

पीएम किसान निधि योजना 2019 के बाद से बीजेपी के लिए मुख्य कैंपेन में से एक रहा है। चुनावी अभियानों में बीच में ही पार्टी ने तेरहवीं किस्त की 16,000 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि बेलगावी में जारी कर इसे और मज़बूती दे दी। यही नहीं, इसके बाद मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने 48 लाख किसानों के लिए 975 करोड़ रुपये का राज्य का हिस्सा भी जारी कर रही सही कसर पूरी कर दी। दरअसल इस योजना के तहत, तय शर्तें पूरी करने वाले किसान परिवारों को एक वर्ष के दौरान तीन बराबर किश्तों में 6000 रुपये का लाभ दिया जाता है।



इसके अलावा टिकटों के बंटवारे को लेकर बीजेपी का रुख अन्य राज्यों की तरह यहां भी साफ है। पार्टी की कोशिश पुराने नेताओं को धीरे-धीरे बाहर करने और नए चेहरों को लाने की है। इसका सबसे पुख्ता प्रमाण जगदीश शेट्टार जैसे वरिष्ठ नेताओं को टिकट नहीं देने का फैसला है। पार्टी ने वंशवाद को लेकर भी सख्त स्टैंड लिया है। इसके लिए पार्टी ने कई वरिष्ठ नेताओं के बेटों का टिकट भी काट दिया है। हालांकि, अपवाद के तौर पर बी.एस. येदियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र को टिकट मिला है लेकिन इसके लिए शर्त रख दी गई है कि येदियुरप्पा खुद चुनाव नहीं लड़ेंगे।

पार्टी ने अपनी सूची में 50 से अधिक नए चेहरों का शामिल किया है, जिसका मतलब साफ है कि वह राज्य को एक नई लीडरशीप देने की तैयारी कर रही है। जब बात लीडरशिप की आए तो पीएम मोदी का जिक्र होना लाजिमी है। चुनाव कोई भी हो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे की भूमिका पार्टी के लिए हमेशा से अहम रही है। कर्नाटक चुनाव भी इससे अछूता नहीं है। यहां भी पीएम की छवि का इस्तेमाल किया जा रहा है। बीजेपी का मानना है कि केवल पीएम मोदी के सहयोग से ही राज्य की तकदीर बदल सकती है।

मोदी पार कराएंगे बीजेपी का नैया?

पार्टी ने भ्रष्टाचार को लेकर भी कांग्रेस के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार किया है। चाहे बीजेपी की चुनावी रैली हो या कार्यकर्ता सम्मेलन, 'कांग्रेस मतलब भ्रष्टाचार की गारंटी' का नारा लगता दिख जाएगा। इसके लिए पार्टी सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली पिछली कांग्रेस सरकार पर निशाना साध रही है और कांग्रेस पर भ्रष्टाचार खत्म करने में दिलचस्पी नहीं लेने का आरोप लगा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में पार्टी ने चुनावी फोकस में विकास के एजेंडे को प्राथमिकता दी है और कमान युवा नेताओं के हाथ में दिया है। इसके अलावा, पार्टी ने राज्य के विकास के लिए 'डबल इंजन सरकार' की ज़रूरत को भी दोहराया है। 

इन सबके अलावा, बीएस येदियुरप्पा और बसवराज बोम्मई, ऐसे फैक्टर हैं जिनके जिक्र के बिना कर्नाटक चुनाव अधूरा है।  येदियुरप्पा कर्नाटक में एक बड़ा फैक्टर हैं क्योंकि कर्नाटक में पार्टी को खड़ा करने में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। पार्टी को खड़ा करने से लेकर सत्ता तक लाने में येदियुरप्पा की भूमिका को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता। साथ ही, लिंगायत समुदाय के बीच येदियुरप्पा का काफी दबदबा माना जाता है और पार्टी इस बात को पूरी तरह से समझती है।

दरअसल, राज्य में करीब 17 प्रतिशत मतदाता लिंगायत समुदाय से आते हैं। राज्य के किसानों के बीच भी उनकी लोकप्रियता काफी है। वहीं, बसवराज बोम्मई भले ही कर्नाटक में बहुत ज़्यादा लोकप्रिय न हों, लेकिन तथ्य यह है कि वे लिंगायत हैं और उन्हें पार्टी नेतृत्व का पूरा समर्थन हासिल है। हालांकि, कर्नाटक चुनाव जीतने के बाद वे फिर से मुख्यमंत्री पद का चेहरा होंगे या नहीं इस बात की आधिकारिक घोषणा तो फिलहाल नहीं की गई है लेकिन उन्हें बदलने का भी कोई ठोस कारण नज़र नहीं आ रहा है।

क्या कहते हैं आंकड़े?

224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा में बहुमत हासिल करने के लिए 113 सीटें चाहिए। 2018 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 36.3% वोट शेयर के साथ सबसे ज़्यादा 104 सीटें मिली थी जबकि 38.1% वोट शेयर और 80 सीटों के साथ कांग्रेस दूसरे नंबर पर थी। वहीं, 18.3% वोट शेयर और 37 सीटों के साथ जेडीएस त्रिशंकु विधानसभा में किंगमेकर की भूमिका में थी।


----------------------------
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें