SSB इंटरव्यू के दौरान "आप फौज़ में क्यों आना चाहते हैं" के जवाब में कहे गए अपने शब्दों को कप्तान मनोज पांडेय ने चरितार्थ कर दिया था।
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23 साल के कप्तान मनोज कुमार पांडेय
नेशनल डिफेंस अकेडमी यानी कि NDA में जो लड़का एक बकरे के कटने पर पूरी रात न सो पाया और अपने मुंह पर पड़े खून के छीटों को कई बार धोया था, मातृभूमि की रक्षा की खातिर आज वो दुश्मन का खून पीने के लिए बर्फीली चोटियों पर खड़ा था। लखनऊ के रहने वाले तेईस साल के लड़के ने गोरखा खुखरी से अमेरिकी GPS की कमी पूरी कर दी।
दरअसल, 1/11 गोरखा राईफल्स की टुकड़ियों का नेतृत्व करते हुए लखनऊ के कप्तान मनोज कुमार पांडेय ने एक एक कर खालूबार, कूकरथांम और जब्बार की पहाड़ियों पर कब्ज़ा किए दुश्मनों को मौत की नींद सुला दी।
मनोज पांडेय ने अपनी दैनिक डायरी में लिखा था-
"यदि कर्तव्य को पूरा करने से पहले मुझे मृत्यु भी आती है, तो मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि मैं उस मृत्यु को भी मार दूंगा"। गोपीचंद पांडेय के यहां साधारण से परिवार में जन्म लेने वाले मनोज पांडेय ने असाधारण को छू लिया था। असम्भव को संभव करते हुए जब कप्तान मनोज पांडेय ने जब्बार टॉप पर आखिरी सांस ली, तो वो अपने लक्ष्य को भेद चुके थे।
'परमवीर चक्र' से सम्मानित
SSB इंटरव्यू के दौरान "आप फौज़ में क्यों आना चाहते हैं" के जवाब में कहे गए अपने शब्दों को कप्तान मनोज पांडेय ने चरितार्थ कर दिया था। उन्हें मरणोपरांत युद्ध समय के सर्वोच्च सैनिक पदक 'परमवीर चक्र' से सम्मानित किया गया और यहीं उनके SSB इंटरव्यू में पूछे गए सवाल का जवाब था "मैं परमवीर चक्र पाना चाहता हूं"।
कप्तान मनोज पांडेय के साथ ही साथ कप्तान विक्रम बत्रा, ग्रनेडियर योगेंद्र सिंह यादव, राइएफलमैन संजय कुमार को भी परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। पांच सौ से भी अधिक भारतीय वीरों ने अपने प्राणों की आहुति देकर पाकिस्तानी फौज की घुसपैठ को नाकाम करते हुए उन्हें LOC के उस पर धकेल दिया।
भारतीय थल सेना ने ऑपरेशन विजय चला कर पाकिस्तानी फौज़ की धज्जियां उड़ा दीं, और अंततः भारतीय वायु सेना ने ऑपरेशन सफेद सागर चला कर दुश्मन के बंकरों के साथ साथ उनके इरादों को भी नेस्तोनाबूद कर दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने पांच जुलाई को बिना शर्त अपनी सेना वापस बुलाने का एलान किया।
26 जुलाई 1999 को भारत के प्रधानमंत्री ने आधिकारिक तौर पर दुनिया को बताया -"कारगिल में तिरंगा लहरा रहा है"।
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