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कोरोना पर कंगना भारी, अब लंबी जंग की तैयारी

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मुंबई इन दिनों धधक रही है- फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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मुंबई इन दिनों धधक रही है। हुकूमत ने अपना असली चेहरा दिखा दिया है। कंगना रनौत का मामला बेशक आप सियासत से जोड़कर देख रहे हों, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि देवभूमि हिमाचल में सिर्फ बर्फ नहीं होती, वहां के जंगलों में भीतर ही भीतर आग भी धधकती रहती है।

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कुछ लोग कहते हैं कि कंगना ज्यादा बोलती हैं, अनाप शनाप बोलती हैं, संजय राउत उन्हें पागल कहते हैं, महाराष्ट्र के गृहमंत्री उन्हें धमकी देते हैं। लेकिन यह अकेली और जांबाज अभिनेत्री लंबे समय से जिस तरह जंग लड़ रही है और बॉलीवुड, शिवसेना, बीएमसी से लेकर ड्रग माफिया तक से जिस तरह एक शेरनी की तरह मुकाबला कर रही है, उसने बेशक कई अहम सवाल खड़े किए हैं।


सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद तो जैसे सारे नकाब ही उतर गए। बॉलीवुड माफिया, शिवसेना, मुंबई पुलिस, बीएमसी से लेकर वहां के सत्ता समीकरण तक सब सामने आ गए। कुछ सियासी लोग कहते हैं कि कंगना बीजेपी के हाथों खेल रही हैं। उन्हें वाई प्लस सुरक्षा मिलना भी उन्हें हजम नहीं हो रहा है।

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उनका खुलकर मोर्चा लेना इस गठजोड़ को पसंद नहीं आ रहा। शिवसेना का लंबे समय से बीएमसी पर कब्जा है और वह अपनी यह सत्ता किसी भी कीमत पर नहीं खोना चाहती। उसे इसके फायदे पता हैं। यहां जड़ जमा चुके भ्रष्टाचार और अरबों के खेल का आनंद वो बरसों से उठा रही है।

औद्योगिक नगरी, बॉलीवुड, चमक-दमक वाली मायानगरी पर कब्जा और मराठी कार्ड खेलकर बरसों से अपनी जमीन जमाने वाली शिवसेना को कंगना किसी एटम बम से कम नजर नहीं आ रहीं हैं।

बौखलाहट का आलम ये है कि महाराष्ट्र सरकार और शिवसेना गलतियां पर गलतियां किए जा रही है। सुशांत सिंह राजपूत की मौत को अब तो तीन महीने होने को आए हैं और जिस तरह इस मामले ने एक एक कर मायानगरी की माया की एक- एक परत उखाड़ी है, उसने वहां के पूरे माफिया गठजोड़ की नींद उड़ा दी है।

सब सहमे हुए हैं। कोई भी कुछ बोलने से डर रहा है। रिया चक्रवर्ती किसका-किसका नाम ले ले, सारे गिरफ्तार ड्रग गिरोह किसको-किसको फंसा दे और बॉलीवुड के बाहुबलियों से अपना हिसाब चुकता करने का मन बना चुकी कंगना क्या क्या कर दें, इससे सबकी नींद उड़ी हुई है।

जबानी जंग अब अपनी सड़कों पर उतर आई है। एक दूसरे से आगे निकलने की जंग में टीवी चैनल पार्टी बन चुके हैं और कुल मिलाकर हालात दिलचस्प हो गए हैं।

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लोग घर बैठे लॉकडाउन से ऊब चुके हैं। बॉलीवुड से मोह भंग हो चुका है...

कंगना रनौत और उद्धव ठाकरे- फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया

कहते हैं कि महाराष्ट्र पर कोरोना की मार सबसे भयंकर रही है। कई लाख मामले तो अकेले वहीं से आ चुके हैं। सैकड़ों लोग जान गंवा चुके हैं। लेकिन पिछले तीन महीनों से बॉलीवुड खुद एक दिलचस्प थ्रिलर की तरह टीवी के परदे पर छाया हुआ है।

बड़े-बड़े स्टार दुबके हुए हैं। सत्ता और पुलिस अपना घिनौना चेहरा दिखा रही है। कंगना का ऑफिस नेस्तनाबूत हो चुका है। संजय राउत, उद्धव ठाकरे सीधे-सीधे निशाने पर हैं।

इसे बीजेपी का खेल भी बताया जा रहा है। लेकिन सबसे बुरी हालत कांग्रेस की है। उसने वहां सरकार तो बनवा ली, लेकिन शिवसेना के इस खेल में उसने अपनी रही सही इमेज भी खत्म कर ली। अब उसे ये निवाला न निगलते बन रहा है, न उगलते।

सुशांत सिंह राजपूत की मौत और इसके पीछे के खेल ने सबकुछ सामने ला दिया है। जांच एजेंसियां हों, पुलिस हो, सरकार हो, मराठी बनाम गैर मराठियों की जंग हो, बॉलीवुड माफिया हो, अंडरवर्ल्ड हो, ड्रग्स का कारोबार हो, बिहार चुनाव हो या फिर कोरोना हो... सब के सब एंगल आपको इस खेल में नज़र आ रहे होंगे।

लोग घर बैठे लॉकडाउन से ऊब चुके हैं। बॉलीवुड से मोह भंग हो चुका है। फिल्म देखने का मन नहीं होता। बाजार में नौकरियां नहीं हैं। आलू पचास रूपए किलो बिक रहा है। पेट्रोल- डीजल की तो पूछिए ही मत।

अस्पताल में सिर्फ कोरोना-कोरोना हो रहा है। कोई दूसरा डॉक्टर मिल भी जाए तो उसकी फीस बढ़ चुकी है। लोग क्या करें, समझ नहीं पा रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार के लिए भी ये तमाशे फायदेमंद हैं- चीन हो, पाकिस्तान हो, नेपाल हो, राम मंदिर हो, और अब तो सबसे दिलचस्प एक युवा अभिनेता की मौत हो, रिया चक्रवर्ती हो, कंगना रनौत हो।

चैनल तो अपना काम कर ही रहे हैं। ऐसे में मन की बात करना और देसी खिलौने बनाने से बेहतर भला क्या हो सकता है।


बहरहाल फिलहाल कंगना और महाराष्ट्र सरकार की जंग का आनंद लीजिए। बुरा- भला कहिए। एक सितारे की मौत के बाद तमाम तरह के मीडिया ट्रायल देखिए। कभी रिया का कांफिडेंस देखिए तो कभी कंगना की बहादुरी देखिए।

कभी एनसीबी तो कभी सीबीआई। कभी पेंगांग तो कभी पूर्वी लद्दाख। कभी एलओसी तो कभी एलएसी। अद्भुत है कोरोना काल और देश का मिजाज। अभी ये कहानियां लंबी चलेंगी। बॉलीवुड तो वैसे भी  सबसे ज्यादा दिलचस्पी पैदा करने वाली एक ग्लैमरस दुनिया रही है, जब फिल्म वहीं की चल रही हो तो कोरोना काल में इससे दिलचस्प भला क्या हो सकता है। आनंद लीजिए। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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