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क्या निलंबित होने की तरफ बढ़ रही है मप्र की विधानसभा ?      

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मध्यप्रदेश आखिर किसकी बनेगी सरकार? - फोटो : self
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आज राज्यपाल का अभिभाषण भी होने के बावजूद नहीं होने जैसा रहने तथा राज्यपाल की सरकार और विपक्ष की नसीहत के बीच मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही 26 मार्च तक लिए स्थगित की जाने से प्रदेश में सरकार का संकट और गहरा गया लगता है। राज्यपाल लालजी टंडन के मुख्यमंत्री कमलनाथ को लिखे गए विश्वासमत हासिल करने संबंधी पत्रों को विधानसभा अध्यक्ष ने संज्ञान में ही नहीं लिया।

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उन्होंने बार-बार इन पत्रों का जिक्र कर सरकार के अल्पमत में आने की बात कह रहे नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान और भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक नरोत्तम मिश्रा की बातों का कोई जवाब नहीं दिया। अध्यक्ष ने कहा आपका पत्राचार राज्यपाल से चल रहा है,मुझसे पत्राचार नहीं किया गया है।

जाहिर है अध्यक्ष राज्यपाल की मंशा पर विधानसभा में अमल करने के मूड में नहीं हैं। मुख्यमंत्री ने भी राज्यपाल के पत्र की मंशा पर अमल के बारे में विधानसभा अध्यक्ष या सदन में कुछ नहीं कहा। जाहिर है कमलनाथ सरकार के सामने उपस्थित संकट विधानसभा से बाहर ही अपनी नई रणनीति में सामने आने के आसार हैं।
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सूत्रों का कहना है कि अब राज्यपाल विधानसभा को निलंबित करने और मुख्यमंत्री को उनके सामने बहुमत दर्शाने को कह सकते हैं। इस बीच सरकार और कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं। 22 बागी कांग्रेस विधायकाें में से छह के इस्तीफे मंजूर कर चुके विधानसभा अध्यक्ष ने बाकी 16 विधायकों के इस्तीफे एक ही आधार होने के बावजूद स्वीकार नहीं किए हैं।

सरकार के अल्पमत में आ जाने की बार-बार बात कह रहे विपक्ष ने भी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव विधानसभा अध्यक्ष को नहीं दिया है। ऐसे में सरकार पर उठ रहे सवाल तो यथावत् हैं ही विपक्ष और राज्यपाल की भूमिका भी चर्चा में है।

सवाल यह भी है कि 31 मार्च से पहले बजट पास नहीं किया गया तो प्रदेश में आर्थिक संकट गहरा सकता है। अब 26 मार्च को जब सदन की बैठक होगी तो क्या सरकार बिना चर्चा के ही बजट पारित कराएगी?

यह सवाल भी चर्चा में है और यह भी कि क्या राज्यपाल जिस सरकार को अल्पमत में मान रहे हैं उसके पारित बजट पर वे दस्तखत करेंगे? ऐसे में माना यह जा रहा है कि 26 मार्च से पहले ही राज्यपाल कोई एक्शन ले सकते हैं। इसमें विधानसभा के निलंबन की कार्यवाही भी हाे सकती है। ऐसे में सरकार कामचलाऊ ही रह जाएगी, लेकिन निलंबित विधानसभा के सदस्य 26 मार्च को राज्यसभा के निर्वाचन में मतदान कर ही सकेंगे।

अगले 10 दिन मप्र की सियासत का केंद्र एक बार फिर राजभवन और राज्यपाल बनने वाले हैं, इसमें केंंद्र सरकार की भी भूमिका रहेगी। इस बीच कांग्रेस सरकार बचाने के लिए कोर्ट का रुख करेगी, इसकी तैयारियां अंदरखाने चल रही हैं।  

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अब राज्यपाल विधानसभा को निलंबित करने और मुख्यमंत्री को उनके सामने बहुमत दर्शाने को कह सकते हैं। - फोटो : MP Vidhan Sabha
आज कुछ इस तरह चली विधानसभा
मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले दिन अभूतपूर्व घटनाक्रम के बीच और  राज्यपाल के अभिभाषण की औपचारिकता के बाद सदन की कार्यवाही 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यपाल 36 पेज के अभिभाषण के आखिरी दो पेरै की करीब 10 लाइनें ही पढ़ी। उन्होने सत्ता पक्ष और विपक्ष को संविधान का पालन करने की सलाह भी दी।

राज्यपाल के जाने के बाद विपक्ष ने सरकार को अल्पमत में बताते हुए फ्लोर टेस्ट की मांग की अध्यक्ष नर्मदा प्रसाद प्रजापति ने नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव से कहा कि विपक्ष राज्यपाल से पत्र व्यवहार कर रहा है, उन्हें या विधानसभा सचिवालय को कोई सूचना नहीं दी है। दोनों पक्षों के बीच नोंकझौक और हंगामे के बीच अध्यक्ष ने कार्यवाही पहले 10 मिनिट के लिए और फिर राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद का प्रस्ताव पेश हुए बिना ही 26 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी। दोनों पक्षों के बीच जमकर नारेबाजी होने लगी। भाजपा सदस्य स्थगित सदन में बैठ गये, जबकि सत्तापक्ष के सदस्य विधानसभा भवन के सेंट्रल हाल में नारेबाजी करने लगे।     

इससे पहले सुबह 11 बजे वंदेमातरम गान के साथ सत्र का आरंभ हुआ। भाजपा विधायक दल के मुख्य सचेतक डा.  नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि यह सरकार अल्पमत में है। अध्यक्ष ने कहा कि आप राज्यपाल से पत्राचार कर रहे हैं। इसके बाद अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष राज्यपाल लाल जी टंडन  की अगवानी के लिए चले गए। राज्यपाल सवा 11 बजे सदन में आए। उन्होने 36 पेज के लिखित अभिभाषण में से आखिरी दो पैरे भर पढ़े।

राज्यपाल ने कहा कि उनकी सरकार ने आवासहीन अधिमान्य पत्रकाराें को 25 लाख तक के आवास ऋण पर पांच प्रतिशत ब्याज अनुदान पांचवर्ष तक देने की योजना के क्रियान्वयन का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले एक वर्ष में प्रदेश के बहुआयामी विकास की तेज कोशिशें की हैं।

सरकार ने अपने वचन पत्र के वचनों की पूर्ति के लिए संकल्पित होकर कार्य किया है। साथ ही सरकार ने विजन टू डिलीवरी-2025 रोडमैप बनाकर गले पांच वर्ष की अपनी प्राथमिकताएं चिन्हित कर उस पर कार्य भी शुरू कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि वचन पत्र और रोडमैप पर अमल कर उनकी सरकार प्रदेश की एक नई प्रोफाइल बनाने में सफल होगी।

इसके बाद राज्यपाल ने लिखित अभिभाषण से भिन्न अपने वक्तव्य में पक्ष और विपक्ष से संविधान के प्रावधानों का पालन करने और विधानसभा की नियम प्रक्रिया का पालन करने को कहा। इस दौरान सदन में शोर की वजह से न तो उनकी बात और न ही पक्ष-विपक्ष के आरोप-प्रत्यारोप ठीक से सुने जा सके।  ऐसा मप्र विधानसभा के इतिहास में पहली बार ही हुआ। इससे पहले मप्र विधानसभा में ऐसे घटनाक्रम जरूर हो चुके हैं जब राज्यपाल ने हंगामे या अस्वस्थता के चलते शुरू और आखिरी के कुछ पैरे ही पढ़े और पूरा अभिभाषण पढ़ा हुआ मान लिया गया। 

राज्यपाल ने लिखित अभिभाषण से हटकर कोई बात नहीं की।  हालांकि इसके बाद कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव भी पेश हुए और उन पर चर्चा का समय अध्यक्ष ने निर्धारित किया। लेकिन आज राज्यपाल टंडन  ने आखरी दो ही पैरे पढ़े और उनके जाने के बाद हंगामे के कारण कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव भी पेश नहीं हुआ। 

राज्यपाल के सदन से जाते ही उनकी विदाई के बाद अध्यक्ष्र मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष सदन में लौटे। नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव राज्यपाल टंडन का मुख्यमंत्री को लिखा पत्र सदन में पढ़ने लगे, सत्ता पक्ष के सदस्य जमकर नारेबाजी करने लगे, इस बीच अध्यक्ष भी कुछ पढ़ने लगे लेकिन शोर शराबे में कुछ नहीं सुना जा सका।

अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी, लेकिन शोर में यह भी नहीं सुना जा सका कि कार्यवाही कितनी देर के लिए स्थगित की गई है। करीब 10 मिनिट अध्यक्ष आसंदी पर लौटे और सदन समवेत हुआ। पूर्व मुख्यमंत्री भाजपा विधायक शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार अल्पमत में है। इस पर सत्ता पक्ष के सदस्य भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। कार्य सूची में राज्यपाल के अभिभाषण के बाद कृतज्ञता ज्ञापन प्रस्ताव पेश होना था लेकिन शोर-शराबे के बीच अध्यक्ष प्रजापति ने सदन की कार्यवाही 26 मार्च तक के लिए स्थगति कर दी। स्थगित सदन में भी नारेबाजी होती रही।                        
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