एआई के दौर में इंसानों को भी बदलना अहम
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तकनीक लगातार बदलती रहती है, लेकिन सबसे कठिन काम मशीनों को नहीं, बल्कि लोगों की सोच को बदलना है। यदि अगले बारह महीनों में आप कभी यह कहें कि ‘हम तो हमेशा से ऐसा ही करते आए हैं’, तो समझ लीजिए कि आपने अपने विकास का रास्ता स्वयं रोक लिया है। केवल इसलिए किसी पुराने तरीके से चिपके रहना कि वह वर्षों से चला आ रहा है, प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। इसलिए, हर नए विचार को खुले मन से स्वीकार करना सीखिए।
मैंने हमेशा अपने वरिष्ठ सहयोगियों से कहा है कि दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि कोई भी व्यक्ति अकेले हर नई तकनीक या हर बदलाव को पूरी तरह नहीं समझ सकता। ऐसे में, अनुभव जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक है युवाओं के विचारों को सुनना और उन्हें महत्व देना। कई बार सबसे अच्छा विचार उस व्यक्ति के पास होता है, जो पद और अनुभव में सबसे छोटा होता है।
मैं यह बात उन सभी लोगों से कहना चाहती हूं, जो समाज की भलाई के लिए नए विचार लेकर आगे बढ़ना चाहते हैं। अक्सर उनके विचारों को शुरुआत में ही नकार दिया जाता है और उन्हें सबसे पहले ‘नहीं’ सुनने को मिलता है। लेकिन, याद रखिए कि पहली बार मिला ‘ना’ कभी भी अंतिम उत्तर नहीं होता। दुनिया में ऐसे बहुत-से लोग हैं, जो किसी भी नए सुझाव को पहली बार सिर्फ इसलिए अस्वीकार कर देते हैं, क्योंकि वे बदलाव से बचना चाहते हैं।
मैंने सीखा है कि कई बार अनुमति का इंतजार करने से बेहतर है, जिम्मेदारी के साथ सही काम की शुरुआत करना। दुनिया उन लोगों को याद नहीं रखती, जो नए विचारों से दूरी बनाए रहे। इतिहास उन्हें याद रखता है, जिन्होंने नए रास्ते बनाए और बार-बार मिलने वाली अस्वीकृतियों के बावजूद अपने विचारों पर काम करना नहीं छोड़ा। इसलिए, कभी भी पहले ‘नहीं’ को अपनी मंजिल का अंत मत समझिए। सीखते रहिए, प्रयोग करते रहिए और भविष्य को बेहतर बनाने का साहस रखिए।