मैं आपकी बातों को समझ सकता हूं। उम्र के इस पड़ाव पर स्मार्टफोन केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि अपनों से जुड़े रहने और अकेलापन दूर करने का सबसे बड़ा सहारा बन गया है। दूसरे शहरों या विदेश में रहने वाले बच्चों और पोते-पोतियों से वीडियो कॉल पर बात करना, समाचार पढ़ना, ऑनलाइन दवा या जरूरी सामान मंगाना जैसे कई काम अब मोबाइल से आसानी से हो जाते हैं। तकनीक ने वरिष्ठ नागरिकों को पहले से अधिक आत्मनिर्भर बनाया है। ऐसे में, साइबर ठगी की खबरों से घबराकर स्मार्टफोन से दूरी बनाने की नहीं, बल्कि उसे समझकर सही तरीके से इस्तेमाल करने की जरूरत है।
आजकल साइबर ठग पहले से कहीं अधिक चालाक हो गए हैं। वे किसी तकनीकी कमजोरी का नहीं, बल्कि लोगों के भरोसे, डर, जल्दबाजी और भावनाओं का फायदा उठाते हैं। यदि आप कुछ बुनियादी सुरक्षा नियम याद रखें, तो ऐसी ठगी से आसानी से बचा जा सकता है।
- ओटीपी और पिन कभी न बताएं: बैंक, पुलिस, बिजली विभाग या कोई भी सरकारी अधिकारी कभी फोन पर आपसे ओटीपी, पासवर्ड या एटीएम पिन नहीं मांगता। पेंशन या बैंक खाता बंद होने की धमकी मिलने पर भी यह जानकारी किसी अनजान के साथ साझा न करें।
- अनजान लिंक से सावधान रहें: व्हाट्सएप या मैसेज पर आने वाले लॉटरी, बिजली बिल बकाया या फ्री गिफ्ट वाले किसी भी लिंक पर क्लिक न करें।
- पैसे पाने के लिए क्यूआर कोड स्कैन न करें: ध्यान रखें, क्यूआर कोड केवल पैसे भेजने (भुगतान करने) के लिए स्कैन किया जाता है। पैसे पाने के लिए कभी भी स्कैनर या पिन की जरूरत नहीं होती।
- अज्ञात एप डाउनलोड करने से बचें: फोन पर बात करते हुए किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर एनीडेस्क या क्विक सपोर्ट जैसे स्क्रीन शेयरिंग एप इंस्टॉल न करें। इससे सामने वाला व्यक्ति आपके फोन को अपने नियंत्रण में ले लेता है। किसी भी अनजान नंबर से आने वाली व्हाट्सएप वीडियो कॉल उठाने से परहेज करें।
- अगर ठगी हो ही जाए, तो: सबसे पहले तो घबराएं नहीं। अपने बैंक को सूचना देकर कार्ड, यूपीआई या नेट बैंकिंग को तुरंत ब्लॉक करवाएं। फिर, बिना देर किए 1930 हेल्पलाइन पर फोन करके और cybercrime.gov.in पर ऑनलाइन माध्यम से शिकायत दर्ज करें। कोशिश करें कि शिकायत ‘गोल्डन आवर’, यानी शुरुआती एक घंटे के भीतर कर दें, इससे पैसे रोकने की संभावना बढ़ जाती है। मैसेज, स्क्रीनशॉट, ट्रांजैक्शन आईडी और कॉल नंबर जैसे सभी सबूत सुरक्षित रखें। साइबर पुलिस थाने में भी शिकायत करें। बैंकिंग एप्स में बायोमेट्रिक लॉक व टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखें।
सबसे जरूरी बात, यदि कोई फैसला लेने का दबाव बनाए, डराए या कोई लालच दे, तो पहले परिवार के किसी सदस्य से बात करें। तकनीक से डरिए नहीं, उसे समझिए। थोड़ी सतर्कता और सही जानकारी के साथ स्मार्टफोन आपके लिए सुविधा, सुरक्षा और अपनों से जुड़े रहने का भरोसेमंद साथी बन सकता है।
मददगार एप्स
- एडगार्ड: इंटरनेट पर दिखाई देने वाले अनचाहे विज्ञापनों, पॉप-अप, ट्रैकर्स और कई प्रकार के हानिकारक वेब अनुरोधों को रोकने में मदद करता है। इसके अलावा, कई संदिग्ध और हानिकारक वेबसाइटों तक पहुंचने से पहले ही चेतावनी देता है। कई प्रकार की भ्रामक या हानिकारक विज्ञापन सामग्री से सुरक्षा मिलती है।
- संचार साथी: इसके जरिये आप अपने नाम पर जारी सिम कार्ड की जानकारी देख सकते हैं, अनधिकृत सिम की शिकायत दर्ज करा सकते हैं, खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक या अनब्लॉक कर सकते हैं तथा फर्जी कॉल, एसएमएस, व्हाट्सएप संदेश और अन्य साइबर धोखाधड़ी के प्रयासों की रिपोर्ट कर सकते हैं।
- ट्रूकॉलर: यह अज्ञात नंबरों की पहचान करने, स्पैम या धोखाधड़ी वाले कॉल और संदेशों की चेतावनी देने तथा उन्हें ब्लॉक करने में मदद करता है।
- साइबर दोस्त व पीआईबी फैक्ट चेक: साइबर दोस्त साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी से बचाव के उपायों की जानकारी देता है। पीआईबी फैक्ट चेक का काम सरकारी योजनाओं, नीतियों व आदेशों से जुड़ी भ्रामक या फर्जी सूचनाओं की जांच कर सही जानकारी उपलब्ध कराना है।
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