आने वाली पीढ़ियां शायद ही कभी विश्वास कर पाएंगी कि हाड़-मांस का बना गांधी जैसा कोई व्यक्ति कभी इस धरती पर चला था। यदि मनुष्य जाति को आत्मविनाश की अंधी खाई से बचना है, तो उसे उस मार्ग को अपनाना होगा, जो गांधी ने हमें दिखाया है।
हमारे इस युग में, जो राजनीतिक संकीर्णता, क्रूरता और भौतिक विनाश की अंधी दौड़ से ग्रस्त दिखता है, महात्मा गांधी का जीवन मानवता के सम्मुख एक अद्वितीय प्रकाश बनकर खड़ा है। गांधी केवल भारत की एक राजनीतिक शख्सियत नहीं हैं; वह मानवीय चेतना के उच्चतम स्तर के प्रतीक हैं। उन्होंने राजनीति को सत्ता और कूटनीति के दलदल से निकालकर नैतिकता और आत्मिक शक्ति के धरातल पर प्रतिष्ठित किया है।
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गांधी का सबसे बड़ा अवदान यह सिद्ध करना रहा है कि हिंसा व शस्त्रों के बिना भी बुराई और दमनकारी सत्ता का प्रतिरोध किया जा सकता है। उन्होंने यह दिखा दिया कि एक दृढ़ संकल्पित मनुष्य, जो सत्य के प्रति निष्ठावान है और जिसके हृदय में वैर-भाव नहीं है, वह साम्राज्यवादी ताकतों की नींव हिलाने की क्षमता रखता है। जहां समकालीन राजनीति का आधार चालाकी और पाशविक बल रहा है, वहीं उन्होंने ‘अहिंसा’ और ‘सत्याग्रह’ को सामूहिक शक्ति का माध्यम बनाया। उन्होंने पीड़ित जनमानस को आत्मसम्मान के साथ सिर उठाकर खड़े होने का साहस दिया। उनका कार्य केवल उनके अपने देश के लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण मानव जाति के भविष्य के लिए एक पथ-प्रदर्शक है।
आने वाली पीढ़ियां शायद ही कभी यह विश्वास कर पाएंगी कि हाड़-मांस का बना ऐसा कोई व्यक्ति कभी इस धरती पर चला था। यदि मनुष्य जाति को जीवित रहना है और आत्मविनाश की अंधी खाई से बचना है, तो उसे उस मार्ग को अपनाना होगा, जो गांधी ने हमें दिखाया है। वह राजनेताओं में सबसे दुर्लभ हैं-वह एक ऐसे नेता हैं, जो अपनी अंतरात्मा की आवाज पर चले और जिन्होंने साबित किया कि शांति कोई निष्क्रिय विचार नहीं, बल्कि संसार की सबसे प्रभावी सक्रिय शक्ति है।