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जीवन धारा: आदमी के गात में करामात एक बात है, व्यवहार में सच्चे बनें

Wed, 02 Apr 2025 07:30 AM IST
निर्मल कांत बालकृष्ण भट्ट

सार

अक्सर लोग अपनी बदकिस्मती के लिए रोते और पछताते हैं, पर सच पूछें तो बदकिस्मती से उनका उतना नहीं बिगड़ा, जितना उनकी लापरवाही और जी लगाकर मेहनत न करने से बिगड़ता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : फ्रीपिक
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विस्तार
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यदि इस बात पर ध्यान दें कि मनुष्य को अपने काम में सफल होने के लिए कौन-कौन से उत्तम गुण प्राप्त करने चाहिए, तो व्यवहार में सफाई या ईमानदारी पहली बात होगी। इसके बिना कोई भी अपने रोजगार व कारोबार में प्रतिष्ठा या समृद्धि हासिल नहीं कर सकता। ‘आदमी के गात में करामात एक बात है,’ इस कहावत की पूरी सार्थकता अक्सर ईमानदार रोजगारियों में ही पाई जाती है। जो अपनी बात बनाए रखता है, वह बिना कुछ लिखे-पढ़े, केवल अपनी बात पर हजारों-लाखों रुपये जब चाहे ले सकता है, और लोग बिना किसी शंका के खुशी से उसे दे देते हैं। सच पूछें तो यहां का व्यापार अब तक इसी ईमानदारी के भरोसे चलता रहा है। जैसे-जैसे सरकारी कानून में बारीकियां और हिंदी की चिंदी निकलती गईं, विश्वास उठता गया और लेन-देन में जालसाजी व छल को बढ़ावा मिलता गया। यहां तक कि भाई-भाई और बाप-बेटे में भी मौखिक हिसाब-किताब की कोई हकीकत नहीं रह गई, जब तक कानून की चुस्त इबारतों में लिख-पढ़कर हस्ताक्षर न कर दिया जाए। हिंदुस्तान के व्यापार घटने के जहां बहुत से कारण हैं, उनमें कानून की बारीकियां भी एक है। कितने तरह के रोजगार और पेशे बदनाम हैं कि वे अच्छे, शिष्ट पुरुष के करने योग्य समाज में नहीं समझे जाते, लेकिन निश्चय मानें कि वह काम या पेशा अपने-आप में बुरा नहीं है, बल्कि जो लोग उसे करते हैं, उनके कारण वह बदनाम हो गया है। कोई भी काम, जो ईमानदारी से किया जाए और उचित लाभ के अतिरिक्त एक पैसा भी बेईमानी का उसमें न आए, वह सर्वथा प्रतिष्ठित और सराहना के योग्य है।

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किसी ऊंचे लक्ष्य के लिए छोटा काम करना भी बुरा नहीं है, बशर्ते उसकी ईमानदारी में कोई बट्टा न लगे। मनु महाराज ने शौच-अशौच के प्रसंग में अर्थ-शौच को सबसे बड़ा और पवित्र रहने का द्वार बताया है। हाथ, पांव आदि अंग जल से शुद्ध और साफ होते हैं, पर मन केवल सत्य से शुद्ध होता है। जिसका मन दृढ़ है और डिगता नहीं, वही अपनी कड़ी मेहनत की कौड़ी को अपनी मानता है। वह बेईमानी से मिले अनुचित लाभ को, चाहे वह सोना ही क्यों न हो, मिट्टी का ढेला मानता है। विलायत में बहुत से ऐसे लोग हुए हैं, और आज भी मौजूद हैं, जिन्होंने शुरू में मोची की नौकरी या पेशा अपनाकर कड़ी मेहनत के साथ ईमानदारी बरती। उसी में निरंतर उद्यम करते हुए वे अंत में ऊंचे पद पर पहुंचे। कड़ी मेहनत, ईमानदारी और मुस्तैदी-ये तीन बातें रोजगार के लिए बहुत जरूरी हैं। अक्सर लोग अपनी बदकिस्मती के लिए रोते और पछताते हैं, पर सच पूछें तो बदकिस्मती से उनका उतना नहीं बिगड़ता, जितना उनकी लापरवाही और जी लगाकर मेहनत न करने से बिगड़ता है। हम भले ही बहुत योग्य और लायक हों, पर यदि चौकसी और अपने काम में मुस्तैद रहना नहीं जानते, तो हमसे वह बेहतर है, जो भले ही बहुत योग्य न हो, किंतु मुस्तैदी और चौकसी से काम में जुटा रहता है, तो उसे सफलता अवश्य मिलती है।

व्यवहार में सच्चे बनें
वास्तव में, जो ईमानदार हैं, वे अपने काम और बर्ताव, सब में स्वच्छता और सफाई रखने से नहीं चूकते। समाज में वे छोटे से छोटे और बड़े से बडे़ लोगों के बीच सम्मान पाते हैं। वहीं, जो व्यवहार में सच्चा नहीं है, वह कितना ही बड़ा विद्वान और धनवान हो, विश्वास हासिल नहीं कर सकता। इसलिए अपने व्यवहार में सच्चे बनें।

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