नई तकनीक से तैयार ईंटों पर आग का असर तुरंत नहीं होता, बल्कि ये हल्की मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ती हैं, जिससे आग बुझाने में मदद मिलती है।
हवा से कार्बन डाइऑक्साइड संग्रहीत करने का कार्य दुनिया भर में बड़े स्तर पर हो रहा है। ईंट और टाइल कारगर साबित हुईं, तो इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश होगा व रोजगार बढ़ेगा।
अमेरिकी वैज्ञानिकों ने हवा से कार्बन डाइऑक्साइड सोंखकर ईंट और टाइल्स बनाने की नई तकनीक विकसित की है। यह तकनीक बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण, धरती के बढ़ते तापमान, ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन जैसी विकट समस्याओं के लिए भी कारगर हो सकती है। यह तकनीक कोरल रीफ (समुद्री प्रवाल) से प्रेरित है और पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद है। एनपीजे एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, इस तकनीक से 3डी प्रिंटेड ढांचों को एक खास कोटिंग देकर कैल्शियम और कार्बन डाइऑक्साइड के घोल में डुबोने पर एक ठोस और टिकाऊ ईंट व टाइल जैसी सामग्री तैयार हो जाती है।
इससे तैयार ईंटों की एक खासियत यह है कि इन पर आग का असर तुरंत नहीं होता है, बल्कि इनमें 30 मिनट तक तापमान सहने की क्षमता है। आग लगने पर ये हल्की कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा छोड़ती हैं, जिससे आग बुझाने में मदद मिलती है। कार्बन रहित भवनों के निर्माण, कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को कम करने में यह तकनीक बेहद कारगर साबित हो सकती है। स्विट्जरलैंड में स्थापित एक नई मशीन हवा से कार्बन डाइऑक्साइड चूस रही है। यह दुनिया का सबसे बड़ा व्यावसायिक संयंत्र है।
जानकारी के मुताबिक, ज्यूरिख के निकट क्लाइमर्क्स एजी सुविधा, हवा से औद्योगिक पैमाने पर कार्बन डाइऑक्साइड को एकत्रित करने और इसे सीधे खरीदारों को बेचने वाली पहली सुविधा बन गई है। इस मशीन को विकसित करने वाले प्रबंधक के अनुसार, यह संयंत्र हर साल 900 टन कार्बन डाइऑक्साइड सोंखता है।
क्लाइमर्क्स के मुताबिक, दुनिया की एक प्रतिशत कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को पकड़ने के साथ यह संयंत्र कृषि के लिए बेहद कारगर साबित हो सकता है, लेकिन इसके लिए 2,50,000 ऐसे और संयंत्रों को लगाने की जरूरत होगी। जिस तकनीक पर यह संयंत्र कार्य करता है, वह महंगी जरूर है, लेकिन प्रदूषण को कम करने की दिशा में बहुत बड़ी उम्मीद जगाती है।
अमेरिका के दक्षिण पूर्व प्रांत हंड्सबिले, अलबामा में एक व्यावसायिक सेंटर पर ऐसा संयंत्र लगा है, जिसके विशालकाय पंखे हवा को चैंबर में खींचते हैं। इस उपकरण के जरिये 4,000 टन कार्बन डाइऑक्साइड सोंखी जा सकती है, जो 870 कारों द्वारा उत्सर्जित प्रदूषण के बराबर है। हवा से सीधे कार्बन डाइऑक्साइड संग्रहीत करने का कार्य दुनिया भर में बड़े स्तर पर हो रहा है। अत: ईंट और टाइल कारगर साबित हुईं, तो आने वाले वक्त में इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पूंजी निवेश होगा और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।