आजादी कोई ऐसी चीज नहीं है, जो सिर्फ बाहर से दिखे, जैसे खुला मैदान। अगर आंखों पर पट्टी बंधी हो, तो उसका क्या फायदा? असली आजादी वह है, जो हमारे दिल और दिमाग में ताकत भर दे। हमारे कामों को नई दिशा दे और हमें अपने सपनों को सच करने का हौसला दे। लेकिन जब आजादी सिर्फ बाहरी हो, तो उसका कोई लाभ नहीं है। मैंने हाल ही में पश्चिमी देशों की यात्रा की, और मुझे लगा कि वहां आजादी का विचार कमजोर पड़ गया है। लोग आजादी को सिर्फ एक बाहरी चीज समझते हैं, जिसके कारण उनके समाज और राजनीति में दबाव और जबर्दस्ती बढ़ रही है।
पुराने समय में राजा अपने दरबार में झूठ, चापलूसी और साजिशों से घिरा रहता था। उसे लगता था कि वह दुनिया का सबसे आजाद इन्सान है, लेकिन असल में वह एक शानदार जेल में कैद था। आज पश्चिमी देशों के लोगों के साथ भी ऐसा ही हो रहा है। उन्हें लगता है कि वे आजाद हैं, लेकिन वे एक सख्त व्यवस्था के जाल में फंसे हैं, जो उनकी जिंदगी को जकड़ कर रखती है। भारत में भी कमोबेश यही हाल है। हमारी सभ्यता एक सांचे की तरह है, जो इन्सान को जकड़ लेती है। हमने अपने लोगों की आत्मा की उड़ान को रोक दिया है। हमने उन्हें सदियों पुराने रीति-रिवाजों और नियमों के बोझ तले दबा दिया है। इस कारण हमारी राष्ट्रीय एकता कमजोर हो गई है, और हम बाहरी तथा आंतरिक समस्याओं का सामना नहीं कर पाते। जो लोग अपने ही भाइयों और बहनों को हमेशा बच्चा समझते हैं, उनकी हर छोटी-मोटी बात में दखल देते हैं, उन्हें डराते-धमकाते हैं, वे कभी भी आजादी की असली जिम्मेदारी नहीं निभा सकते।
पश्चिमी सभ्यता एक मशीन की तरह है, जो चलती रहती है और इन्सानों की जिंदगी को ईंधन की तरह जलाती है। यह आजादी का दिखावा तो करती है, लेकिन असल में यह गुलामी को बढ़ावा देती है। दूसरी ओर, भारत की सभ्यता एक कठोर सांचे की तरह है। हमें इन दोनों से बाहर निकलकर असली आजादी को अपनाना होगा, जो हमें अपने भाग्य को खुद बनाने की ताकत दे। जो व्यक्ति दूसरों की आजादी छीनता है, वह अपनी नैतिक आजादी का हक खो देता है। देर-सवेर वह शारीरिक और नैतिक गुलामी के जाल में फंस जाता है। मैं अपने देशवासियों से कहना चाहता हूं कि वे खुद से पूछें कि क्या वे जिस आजादी की चाहत रखते हैं, वह सिर्फ बाहरी परिस्थितियों की आजादी है? क्या यह सिर्फ एक ऐसी चीज है, जिसे खरीदा-बेचा जा सकता है? क्या उन्हें आजादी से सच्चा प्यार है? क्या वे इसमें विश्वास रखते हैं? क्या वे अपने समाज में ऐसी जगह बनाने को तैयार हैं, जहां उनके बच्चों का दिमाग मानव गरिमा के आदर्श में बिना किसी अन्यायपूर्ण और तर्कहीन बंधनों के विकसित हो सके?
क्रिएटिव यूनिटी’ पुस्तक के अनूदित अंश
सूत्र: विचारों को नई दिशा दें
यदि आप उड़ना चाहते हैं, तो विचारों को नई दिशा दें, आजाद मन से विचार करें। जब तक हम आजादी को सच्चे मन से नहीं अपनाएंगे, उसकी ताकत और जोखिम को नहीं समझेंगे, तब तक हम जीवन में सही मायने में सफल नहीं होंगे। हम बाहरी और आंतरिक समस्याओं का सामना नहीं कर पाएंगे, इसलिए खुले मन से विचार करें।