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जीवन धारा: हर दिन एक नया अवसर होता है, आत्म-जागरूकता से करनी चाहिए शुरुआत

Wed, 06 May 2026 07:52 AM IST
निर्मल कांत बेंजामिन फ्रैंकलिन

सार

लोग जीवन में इसलिए असफल होते हैं, क्योंकि वे अपने दिन को बिना स्पष्ट उद्देश्य के व्यतीत करते हैं। यदि व्यक्ति हर दिन खुद से पूछे कि ‘मैं आज क्या अच्छा कर सकता हूं’, तो वह अधिक रचनात्मक व अनुशासित बन सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
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जीवन में हमें रोज सुबह खुद से एक सवाल जरूर पूछना चाहिए कि आज मैं क्या अच्छा काम करूंगा? यह सवाल हमारे पूरे जीवन-प्रबंधन, आत्म-सुधार और नैतिक अनुशासन का केंद्रीय सूत्र है। इसलिए, इसे हमें दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बना लेना चाहिए। मैं सुबह उठते ही खुद से सवाल करता था कि आज मुझे कौन-सा अच्छा और उपयोगी काम करना है। मेरे लिए यह सवाल सिर्फ सफलता का माध्यम नहीं, बल्कि नैतिकता व आत्म-विकास का आधार था। साथ ही, समाज के लिए उपयोगी भी।
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मेरा मानना है कि हर एक दिन हमें एक नए अवसर की तरह मिलता है। यदि वह दिन उद्देश्यपूर्ण ढंग से जिया जाए, तो हम अपने जीवन को उत्कृष्ट बना सकते हैं। यही उत्कृष्टता हमारे जीवन की सफलता की नींव तैयार करती है।  अच्छा जीवन बड़े आदर्शों की घोषणाओं से नहीं, बल्कि रोजाना किए गए छोटे-छोटे सार्थक कार्यों से बनता है। इसलिए, हमें हर दिन की शुरुआत आत्म-जागरूकता से करनी चाहिए। ‘आज मैं क्या अच्छा काम करूंगा’ यह प्रश्न हमें निष्क्रियता से बाहर लाता है और अपने दिन को सार्थक दिशा देने के लिए प्रेरित करता है। साथ ही, यह सवाल जीवन के प्रति सक्रिय और सकारात्मक दृष्टिकोण है, जिसमें व्यक्ति परिस्थितियों के अनुसार बहता नहीं, बल्कि अपने मूल्यों व लक्ष्यों के अनुसार दिन का निर्माण करता है।

याद रखें, सारे दिन की कामयाबी इस बात से मापी जानी चाहिए कि आज मैंने खुद अपने लिए और समाज के लिए कितना सकारात्मक काम किया। हमारे जीवन का हर दिन संयम, व्यवस्था, मेहनत, सत्यनिष्ठा और विनम्रता के अभ्यास का अवसर होना चाहिए। ज्यादातर लोग जीवन में असफल इसलिए नहीं होते कि उनमें क्षमता नहीं होती, बल्कि इसलिए होते हैं कि वे अपने दिन को बिना स्पष्ट उद्देश्य के व्यतीत करते हैं। यदि व्यक्ति हर दिन खुद से पूछे कि ‘मैं आज क्या अच्छा कर सकता हूं’, तो वह अधिक रचनात्मक व अनुशासित बन सकता है। यह आदत धीरे-धीरे चरित्र का निर्माण करती है।
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दरअसल, चरित्र कोई अचानक हासिल होने वाली चीज नहीं होती, बल्कि यह रोजाना किए गए सही फैसलों का ही समुच्चय होती है। इसी तरह रात को सोने से पहले भी हमें खुद से पूछना चाहिए कि आज मैंने क्या अच्छा किया? बस फर्क यही है कि सुबह का प्रश्न संकल्प था और रात का प्रश्न आत्म-मूल्यांकन। इन दोनों के बीच पूरा दिन उद्देश्यपूर्ण जीवन का अभ्यास बन जाता है। यही आत्मनिरीक्षण सफलता का वास्तविक रहस्य है। ऐसा करते रहना हमें अपने आदर्शों के प्रति जवाबदेह बनाता है। जब मनुष्य दिन की शुरुआत इस विचार से करता है कि उसे कुछ अच्छा करना है, तो उसके निर्णय अधिक सजग और सकारात्मक होते हैं। खुद से पूछे जाने वाले ये दो सरल प्रश्न जीवन में स्पष्टता ला सकते हैं और दिन को केवल बिताने के बजाय उसे सार्थक बनाने की प्रेरणा देते हैं।

सूत्र: खुद को चुनौती देते रहें
जब दिन की शुरुआत संकल्प से और अंत आत्म-मूल्यांकन से होती है, तब जीवन में निरंतर सुधार संभव होता है। सफलता केवल उपलब्धियों में नहीं, बल्कि रोज किए गए सकारात्मक कर्मों में छिपी होती है। जो व्यक्ति हर दिन खुद को चुनौती देता है, वही अपने जीवन को उत्कृष्ट बना पाता है। इसलिए हर दिन को सार्थक बनाइए।
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