पंडित शर्मा अपनी झूठी-सच्ची कहानियां बताकर आगंतुकों का मन मोह लेते थे।
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नेहरू जी और शेख अब्दुल्ला पहुंचे मांडू
बहरहाल, प्रधानमंत्री रहते शेख अब्दुल्ला ने शायद 1950 या 1951 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और विजयलक्ष्मी पंडित के साथ मांडू का दौरा किया था और बतौर सैलानी वहां रात गुजारी थी, तब मध्य भारत के मुख्यमंत्री मिश्रीलाल गंगवाल के सूचना अधिकारी के तौर पर देवीलाल बाफना तैनात थे। बाफना ने अपने संस्मरणों को कलमबद्ध किया है।
'यादों के झरोखे से: कुछ ऐतिहासिक संस्मरण' नाम से प्रकाशित पुस्तिकानुमा किताब में पंडित नेहरू, विजयलक्ष्मी पंडित और शेख अब्दुल्ला का मांडू दौरा भी शामिल है। बाफना ने अपनी किताब में उस दौरे की तारीख को दर्ज नहीं किया है, इसलिए इस दौरे की ठीक-ठीक तारीख पता नहीं है।
बाफना ने लिखा है कि इस दौरे के वक्त मिश्रीलाल गंगवाल भी तीनों नेताओं के साथ थे। बाफना के मुताबिक ऐसे महत्वपूर्ण दौरों के वक्त किले के मुख्य गाइड पंडित शर्मा सफेद झोगा और पगड़ी पहनकर तैयार रहते थे।
बाफना के मुताबिक, पंडित शर्मा अपनी झूठी-सच्ची कहानियां बताकर आगंतुकों का मन मोह लेते थे। (जैसे) किस तरह बेगमें अब भी रात्रि को आकर जहाज महल में नाचती हैं, नहाती हैं आदि-आदि। बाफना उस दौरे के बारे में लिखते हैं, “इसी तरह सब उनकी रोचक कहानियां-किस्से सुनाते रूपमती पवैलियन पहुंचे। वहां शर्मा जी ने रूपमती और बाजबहादुर के प्रेम के अनेक किस्से सुनाए। यह पवैलियन मांडू का सबसे ऊंचा स्थान है, जहां से घाटी का रोचक नजारा दिखाई देता है। ”
“हमारे प्रधानमंत्री जानना चाहते हैं कि कश्मीर पाकिस्तान के साथ रहेगा या भारत के?
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बाफना के मुताबिक, पंडित शर्मा सबको इको प्वाइंट पर ले गए, जहां से आवाज देने के बाद टकराकर लौट आती है। वहां ले जाकर पंडित शर्मा ने पंडित नेहरू से कहा कि इस घाटी में बहुत दूरी पर एक दैत्य रहता है और उसकी बताई भविष्यवाणी कभी गलत नहीं होती।
चूंकि इस दौरे में नेहरू के साथ शेख अब्दुल्ला भी थे और उन दिनों भी कश्मीर देश के लिए ज्वलंत मुद्दों में से एक था, इसलिए पंडित शर्मा ने चतुराई दिखाते हुए पंडित नेहरू से पूछ लिया, “यदि हुजूर की इजाजत हो तो इससे (दैत्य से) पूछ लेता हूं कि कश्मीर भारत के साथ रहेगा या पाकिस्तान के साथ।”
बाफना ने अपनी किताब में लिखा है कि पंडित नेहरू को इस सवाल में कौतुक लगा तो उन्होंने मुस्कुराते हुए घाटी के कथित दैत्य से कश्मीर के भविष्य के बार में सवाल पूछने की इजाजत दे दी। तब किले के मुख्य गाइड पंडित शर्मा बहुत खुश हुए और बाफना के मुताबिक उन्होंने घाटी में चिल्ला पड़े, “हमारे प्रधानमंत्री जानना चाहते हैं कि कश्मीर पाकिस्तान के साथ रहेगा या भारत के। तुरंत आवाज लौट आई, भारत के...” देवीदयाल बाफना के मुताबिक, घाटी के इको सिस्टम की वजह से लौटी इस आवाज को सुनकर नेहरू, शेख अब्दुल्ला, विजयलक्ष्मी पंडित और मिश्रीलाल गंगवाल, सभी हंसने लगे।
देवीलाल बाफना बाद में मध्य प्रदेश सरकार के भी वरिष्ठ सूचना अधिकारी रहे। उन्होंने दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी के तौर पर भी सेवाएं दी हैं। उन्होंने अपनी पुस्तिका में ऐसे कई रोचक संस्मरण लिखे हैं।
बहरहाल, शेख अब्दुल्ला से जुड़ा यह किस्सा बेहद दिलचस्प है। पता नहीं, मांडू की घाटी का दैत्य असल में है भी या नहीं, लेकिन उसकी जम्मू-कश्मीर को लेकर की गई भविष्यवाणी सही तो साबित हुई है। जम्मू-कश्मीर ना सिर्फ भारत के साथ रहा, बल्कि अब तो अभिन्न अंग बन गया है।
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