इस्राइल की गिनती कभी सर्वाधिक जल तनाव वाले देशों में होती थी, लेकिन प्रभावी जल प्रबंधन और उन्नत तकनीक के बल पर वह अपने नागरिकों को पर्याप्त, नियमित और सुरक्षित जल उपलब्ध कराने में न सिर्फ कामयाब हुआ है, बल्कि इस मामले में पथ-प्रदर्शक भी बन चुका है। दुनिया इस्राइल के अनुभवों से बहुत कुछ सीख सकती है।
जलवायु संकट के बीच जल संकट से निपटने के प्रयोग
इस्राइल ने 1948 में स्वतंत्रता की घोषणा तो कर दी, लेकिन उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती जल संकट की थी। आधे से अधिक भू-भाग पर फैले रेगिस्तान, तेजी से बढ़ती जनसंख्या और जलवायु संकट के बीच जल संकट से निपटने के लिए उसने ऐसे कई प्रयोग किए, जो आगे चलकर दुनिया के लिए उदाहरण भी बने। इस्राइल ने 1950 के दशक में 130 किलोमीटर लंबी जल परियोजना ‘नेशनल वाटर कैरियर’ शुरू की, जिसके जरिये वह देश के उत्तर से मध्य और शुष्क दक्षिणी क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने में सफल रहा। इससे न सिर्फ सूखे क्षेत्रों की पानी की आवश्यकता पूरी हुई, बल्कि कृषि और जनजीवन में भी सुधार आया।
खेती में पानी की कमी से बचने के लिए ड्रिप सिंचाई तकनीक ईजाद की
इसके एक दशक बाद इस्राइल ने कृषि क्षेत्र में पानी की मांग को पूरा करने और बर्बादी नियंत्रित करने के लिए ड्रिप सिंचाई तकनीक ईजाद की, जिसने दुनिया को कम पानी में अधिक पैदावार की राह दिखाई। साथ ही, इस्राइल ने अपशिष्ट जल के उपचार पर भी ध्यान दिया।
दुनिया को दिखाई नई राह, इस्राइल में 90 प्रतिशत अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण
आज इस्राइल की अपशिष्ट जल उपयोग दर दुनिया में सबसे अधिक है। वह कृषि के लिए लगभग 90 प्रतिशत अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण करने में भी सफल रहा है। इस्राइल का सबसे बड़ा अपशिष्ट जल उपचार संयंत्र शफदान में स्थापित है। 1985 में इस्राइल ने अपने ‘राष्ट्रीय जल वाहक’ के माध्यम से उपचारित अपशिष्ट जल को खेतों तक भेजना शुरू कर दिया।
नगरपालिका और औद्योगिक जल की जरूरतों का 90 फीसदी हिस्सा यहां से आता है
जल प्रबंधन की सतत रणनीति के तहत 1999 में खारे समुद्री पानी को विलवणीकरण करने का निर्णय लिया गया, जिसके परिणामस्वरूप आज वह अपनी नगरपालिका और औद्योगिक जल आवश्यकताओं का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा अलवणीकृत जल से पूरा कर रहा है।
इस्राइल आज जल-प्रबंधन की अग्रणी शक्ति
भारत के पास 11,098.81 वर्ग किमी लंबी तटरेखा है। ऐसे में यह तकनीक अपनाकर भारत जल संकट पर नियंत्रण पा सकता है। बहरहाल, ड्रिप सिंचाई से जल-संरक्षण, अपशिष्ट जल का उपचार एवं पुन: उपयोग और समुद्री जल के विलवणीकरण पर जोर देकर इस्राइल आज जल-प्रबंधन की अग्रणी शक्ति बन गया है। इन रणनीतियों को अपनाकर कोई भी देश पानी की उपलब्धता और वितरण संबंधी परेशानियों को मात दे सकता है। इस दिशा में ठोस संकल्प की दरकार है।