दुनिया भर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पाकिस्तान की भूमिका हमेशा से संदिग्ध ही रही है। कहने को तो आतंकवाद के खिलाफ लड़ी जाने वाली लड़ाई में पाकिस्तान पश्चिमी देशों का घोषित सहयोगी है, लेकिन यह हकीकत से मीलों दूर है। पाकिस्तान आज से नहीं दशकों से आतंकवादियों और चरमपंथी समूहों को न सिर्फ समर्थन देता आया है, बल्कि उनको दुनिया भर में अस्थिर करने के लिए अपनी जमीन भी मुहैया करा रहा है। पाकिस्तान की हकीकत का अंदाजा इस बात से लगाए जा सकता है कि 1980 के दशक में जब अफगानिस्तान में सोवियत संघ ने आतंक का मुंह तोड़ने के लिए हमला किया तो पाकिस्तान ने आतंकियों को प्रशिक्षण देने के लिए अपनी जमीन मुहैया करा दी। हालात ये हो गए कि 80 के दशक में पाकिस्तान आतंकियों को प्रशिक्षण देने का सबसे बड़ा केंद्र बन गया। दरअसल, पाकिस्तान की ओर से आतंकियों को मुहैया कराई गई अपने हिस्से की जमीन एक सोची समझी रणनीति और साजिश के तहत ही दी जाती रही थी, क्योंकि पाकिस्तान जान बूझकर भविष्य के लिए आतंकवादी नेटवर्क का बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए यह रणनीति अपना रहा था।
2002 में पत्रकार डेनियल पर्ल की हत्या को कोई भला कैसे भूल सकता है। पर्ल तो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों और कट्टरपंथी इस्लामी समूह के बीच के संबंधों की तहकीकात ही तो कर रहे थे, लेकिन उनका अपहरण कर उनकी हत्या कर दी जाती है। इस हत्या ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। पाकिस्तान के आतंकी नेटवर्क ने पर्ल की हत्या करने के लिए कैसे एक बड़ी कड़ी के रूप में काम किया यह बात पूरी दुनिया को पता चली। सिर्फ यही नहीं पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान तब और एक्सपोज हुआ जब 2011 में अमेरिका के जवानों ने पाकिस्तान के एबटाबाद स्थित प्रमुख सैन्य अड्डे के पास से ओसामा बिन लादेन को ढूंढ निकाला और मार दिया। इस घटना ने पूरी दुनिया में पाकिस्तान की खूब फजीहत कराई, क्योंकि पाकिस्तान ने इस बात को कभी स्वीकार ही नहीं किया था कि दुनिया का सबसे खूंखार आतंकवादी ओसामा बिन लादेन उसकी ही जमीन पर रहकर पूरी दुनिया में आतंकवाद फैला रहा है। हालांकि, पाकिस्तान के हुक्मरानों ने इसमें जरा भी शर्मिंदगी नहीं महसूस की कि दुनिया का सबसे बड़ा आतंकी उसके यहां पाला पोसा जा रहा था।
सिर्फ यही नहीं, अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क को पनाह देने और उसको आगे बढ़ाने में भी पाकिस्तान की बड़ी भूमिका रही। हक्कानी नेटवर्क पाकिस्तान के ही एक बड़े जमीनी हिस्से संघीय प्रशासित जनजातीय क्षेत्र (FATA) से ऑपरेट किया जाता रहा है। यह वह जमीनी हिस्सा है जिसको लंबे वक्त से अफगानिस्तान में तालिबान के क्रूर चेहरे को पूरी दुनिया में फैलाया जाता रहा। अफगानिस्तान में एक समय सबसे ज्यादा घातक और खतरनाक हमले के लिए जिम्मेदार प्रमुख संगठन के आकाओं की सबसे सुरक्षित पनाहगाह पाकिस्तान की यही जमीन रही। ऐसा नहीं था कि इस बात की जानकारी पश्चिमी देशों को नहीं थी। 2012 में जब अमेरिका की ओर से अफगानिस्तान में घातक हमलों के जिम्मेदार संगठनो को आतंकी संगठन घोषित किया गया उस वक्त भी यह पूरा का पूरा नेटवर्क पाकिस्तान की जमीन से ही चल रहा था।
2008 की शुरुआत में ही अमेरिका की खुफिया एजेंसियों ने इस बात की चेतावनी दी थी कि अलकायदा पश्चिम पर नए हमले की तैयारी कर रहा है। खुफिया एजेंसियों ने स्पष्ट रूप से कहा था कि इसके लिए पाकिस्तान की संघीय प्रशासित जनजातीय क्षेत्र (FATA) की जमीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों के साथ इस क्षेत्र में आतंकवाद को हमेशा खाद पानी मिलता रहा। जिसने दुनिया को न सिर्फ अस्थिर किया बल्कि दुनिया में आतंकवाद को बढ़ावा देने के अभियान को भी जारी रखा है। अमेरिका ने पाकिस्तान के इसी हिस्से में अरबों डॉलर खर्च करके आतंकवाद की कमर तोड़ने की कोशिश की लेकिन कामयाबी उस कदर नहीं मिली। क्योंकि पाकिस्तान तमाम छल कपट करके अपनी जमीन पर आतंकवाद न सिर्फ सुरक्षित करता रहा बल्कि बढ़ावा देता रहा।
बात 2017 की है। जब यूरोपीय संसद ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए चरमपंथी समूह को खुलेआम काम करने की अनुमति देने के लिए इसकी निंदा की थी। पाकिस्तान से यूरोपीय संसद ने कहा था कि चरमपंथी समूहों को खुलेआम काम करने की अनुमति देने की बजाय आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें और आतंकवाद को खत्म करने में उसकी मदद करें। पाकिस्तान के भीतर धार्मिक अल्पसंख्यकों के ऊपर हो रहे हमलों पर भी कड़ा रुख यूरोपीय संसद ने अख्तियार किया था। लेकिन पाकिस्तान के ऊपर इसका कोई असर नहीं हुआ। बल्कि उल्टा पाकिस्तान ने मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ाते हुए कई बड़े अल्पसंख्यक धार्मिक नेताओं को बेवजह जेल में डाला और कुछ की हत्याएं भी हुईं।
2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो आतंकी संगठनों को पनाह देने और आतंकवाद को बढ़ावा देने पर पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगाई थी। यही नहीं पाकिस्तान पर अफगानिस्तान के आतंकवादियों को अपने मुल्क की सुरक्षित जमीन बतौर पनाहगाह देने का आरोप लगाते हुए ट्रंप ने करोड़ों डॉलर की सहायता भी रोक दी थी। इस दौरान पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए अमेरिका ने कहा था कि वह कट्टरपंथियों को अपना समर्थन देना बंद करें। यही नहीं अमेरिकी प्रशासन से पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया गया था कि अफगानिस्तान में पनपे आतंकवाद को पाकिस्तान की ओर से पनाह दी जा रही है। पाकिस्तान को वाशिंगटन की ओर से मिली चेतावनी के बाद पूरी दुनिया में स्पष्ट हो गया था कि आतंक की मूल जड़ पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में ही पनप रही है। हालांकि पाकिस्तान बार-बार पूरी दुनिया के सामने यह साबित करने की कोशिश करता रहा कि वह खुद आतंकवाद से पीड़ित है। लेकिन जब-जब सच्चाई सामने आई है उसमें पाकिस्तान पीड़ित नहीं बल्कि आतंकवाद को खाद पानी देने वाले देश के तौर पर सबूतो के साथ पकड़ा गया।
पाकिस्तान लगातार आतंकवाद को अपनी गोद में बिठाकर पूरी दुनिया को तबाह कर रहा है। कश्मीर की पहलगाम घाटी में जिस तरीके से बर्बरता पूर्वक मासूम लोगों को मारा है उससे उसका घिनौना चेहरा फिर सामने आ गया। पाकिस्तान के ही आतंकी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी ली। हमने अपने मासूम लोगों की मौत का बदला तो ले लिया लेकिन पाकिस्तान के भीतर जड़ों में बैठा आतंकवाद इन हमलों से पूरी तरीके से खत्म हो जाएगा इसकी गारंटी नहीं है। क्योंकि पाकिस्तान कट्टरपंथियों और आतंकवादियों को बढ़ावा देकर पूरी दुनिया को अशांत करने का एक अभियान चला रहा है। हाल में ही पाकिस्तान सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने एक विश्वविद्यालय में बेहद भड़काऊ बयानबाजी देते हुए दोहराया कि अगर आप हमारा पानी रोकते हैं तो हम आपकी सांसे रोक देंगे। यह भड़काऊ बयान आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला ही है। यही नहीं पूरी दुनिया ने देखा कि किस तरीके से मुरीदके में आतंकवादियों के अंतिम संस्कार में पाकिस्तान सेना के बड़े-बड़े अधिकारी शामिल हुए। यही नहीं चिंताजनक तो यह भी है कि पाकिस्तान सरकार ने आतंकी मसूद अजहर के परिवार को 14 करोड़ रुपए का मुआवजा देने का ऐलान किया है। मसूद अजहर संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकी है। इस आतंकी के रिश्तेदार भारतीय हवाई हमले में मारे गए। उनको ही मुआवजा पाकिस्तान की सरकार अब दे रही है। पाकिस्तान सेनाअध्यक्ष आसिम मुनीर का वह बयान जो हिंदू विरोध में बोला गया और उसके बाद पहलगाम की घटना हुई, सीधे-सीधे तस्दीक करती है कि पाकिस्तान आतंकवाद को न सिर्फ पाल पोस रहा है बल्कि वह बड़ी घटनाओं के लिए कैसे भूमिकाएं तैयार करता है।
पाकिस्तान वह रक्तबीज है जो सिर्फ और सिर्फ आतंकवाद पैदा करता है। इस देश में आतंकवाद को बढ़ावा देने की ऐसी न जाने कितनी तारीखें इतिहास में दर्ज हो चुकी हैं। जो इस बात की तस्दीक करती हैं कि पाकिस्तान दुनिया का वह नासूर देश बन चुका है जो न तो खुद आगे बढ़ेगा और और जो देश आगे बढ़ रहे हैं उसको आतंकवादियों और कट्टरपंथियों की शह पर अस्थिर करता रहेगा। यही वजह है कि पाकिस्तान को दुनिया भर की अलग-अलग एजेंसियों से मिलने वाली वित्तीय मदद को रोका जाना चाहिए। पाकिस्तान को मिलने वाली वित्तीय मदद का इस्तेमाल उसके हुक्मरान आतंकवादियों को पालने पोसने और आतंकवादियों के कुनबे को आगे बढ़ाने में खर्च करते हैं। इसलिए ऐसी किसी भी वित्तीय मदद को तत्काल प्रभाव से रोका जाना चाहिए।