लक्षद्वीप के द्वीप इस साल काफी चर्चा में रहे हैं। उनके सफेद रेतीले तट और नीले लैगून ने इन्हें बहुत से लोगों की यात्रा की सूची में शामिल कर दिया है। लेकिन, हम अक्सर इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं कि ये द्वीप वास्तव में कितने अद्भुत हैं।
लक्षद्वीप के द्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के विपरीत, एटोल्स (प्रवाल द्वीप) की श्रृंखला में आते हैं। इसका मतलब है कि इनका आधार लगभग पूरी तरह से कैल्शियम कार्बोनेट से बना है, जो प्रवाल (यानी कि कोरल्स) और अन्य समुद्री जीवों द्वारा उत्पन्न होता है। यही रीफ इन द्वीपों का अस्तित्व सुनिश्चित करता है और उन्हें लहरों और तूफानों से सुरक्षा प्रदान करता है। प्रवाल रीफ समुद्र के वर्षावनों की तरह होते हैं, जो कई प्रकार के जानवरों, पौधों और अन्य जीवों को घर प्रदान करते हैं। इसीलिए, ये जीव स्थानीय मत्स्यपालन और द्वीपवासियों के जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
मगर इन रीफ में इन जानवरों और पौधों की भूमिका होती क्या है?
रोजाना इन जीवों के बीच कई प्रक्रियाएं और इंटरैक्शन होते हैं। जैसे कि सबसे छोटे प्लांकटन से लेकर बड़े जीवों तक, सबका भोजन श्रृंखला में योगदान होता है, जो स्थानीय मत्स्यपालन को सहारा देता है। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात तो है कि ये जीव द्वीपों के अस्तित्व के लिए आवश्यक हैं।
कैसे?
प्रवाल समुद्र में रहने वाले जीव होते हैं, जो अपने नरम शरीर के चारों ओर कैल्शियम कार्बोनेट की संरचनाएं बनाते हैं। ये संरचनाएँ समय के साथ और अधिक प्रवालों और अन्य जीवों द्वारा बनाई जाती हैं, और इस प्रकार प्रवाल रीफ का निर्माण होता है।
साथ ही, कुछ जीव रीफ का अपरदन भी करते हैं। पैरेटफिश—जिनके बड़े, खरगोश की तरह सामने के दांत होते हैं—प्रवाल के टुकड़े काटकर उसमें बसने वाले शैवाल (या ऐल्गे) को खाते हैं। इनमें से कुछ पैरेटफिश प्रवालों पर उग रहे शैवाल को खुरचते हैं और इस प्रक्रिया में नीचे मौजूद मृत प्रवाल को भी खुरच लेते हैं। समुद्री अर्चिन, जो समुद्र में कांटेदार गोल जीव होते हैं, भी यही काम करते हैं।
लक्षद्वीप में एक विशेष प्रकार का समुद्री अर्चिन भी अत्यधिक प्रचुर मात्रा में पाया जाता है और यह रीफ में खुदाई कर उसमे खोखले छेद बना देता है। ये सभी जीव प्रवाल को छोटे-छोटे कणों में तोड़ देते हैं, जो बाद में धाराओं द्वारा अन्य द्वीपों पर पहुँच जाते हैं और वहाँ बालू का निर्माण करते हैं। इसके अलावा, हवा और लहरों जैसी अजैविक ताकतें भी मृत प्रवाल को घिसकर बालू का निर्माण करती हैं।
एक्रोपोरा - एक तेजी से बढ़ने वाला लेकिन नाजुक प्रवाल, जिसमें मछलियां छुपी हुई हैं।_ सिद्धी जयशंकर इन अपरदन और वृद्धि प्रक्रियाओं के बीच संतुलन बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। रीफ में वृद्धि प्रक्रिया, अपरदन के मुकाबले मे, तेजी से होनी चाहिए। है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ग्लोबल वार्मिंग के कारण दुनिया भर में समुद्र का स्तर बढ़ रहा है, और रीफ को पनपने के लिए एक विशेष गहराई पर रहने की आवश्यकता है, जो केवल तभी हो सकता है जब रीफ समुद्र के स्तर के साथ-साथ बढ़ता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन, विकास के दबाव, और अन्य कारणों से प्रवाल मर रहे हैं।
यदि ऐसा होता है, तो यह द्वीप के लिए कई तरह से आपदा लाएगा। मछलियों की आबादी और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का नष्ट होना तो निश्चित है, लेकिन इसके साथ ही यह द्वीप मे बाढ़ का खतरा भी पैदा करता है (क्योंकि द्वीप की रक्षा करने वाली पानी के नीचे की दीवार अब ऐसा करने में सक्षम नहीं होगी) और तो और इसके बाद, जब द्वीप जलमग्न हो जाए, तो इसके नीचे के पतले मीठे पानी की लेंस भी दूषित हो जाने की सम्भावना है। इसका अर्थ होगा मीठे पानी की अनुपलब्धता। अंततः द्वीप रहने योग्य नहीं रह जाएन्गे। इसीलिए, द्वीपों में अपरदन और विकास दर को मापने के लिये वैज्ञानिक अध्ययन जारी हैं।
सूखे और मृत कोरल से भरा रीफ_ सिद्धी जयशंकर
चूंकि प्रवाल इन द्वीपों के वास्तविक रत्न हैं, इसलिए इनकी सुरक्षा के लिए एकजुट होना बेहद महत्वपूर्ण है। पर्यटकों और इस जगह से मोहित होने वाले अन्य लोगों को इन अद्भुत पारिस्थितिक तंत्र के बारे में अधिक जानने और समझने की कोशिश करनी चाहिए, साथ ही जब वे इन स्थानों पर जाएँ तो जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ पेश आना चाहिए। आखिरकार, इन रीफ्स मे पृथ्वी पर ज्ञात समुद्री प्रजातियों के 25% से अधिक प्राणी पाए जाते हैं, जबकि यह ग्रह के सबसे निराले पारिस्थितिक तंत्रों में से एक हैं।
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