पान सिंह तोमर की शूटिंग के दौरान इरफान की फाइल तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
सभी की मौत तय है, वैसे ही इरफान की भी तय थी। एक दिन किसी अवॉर्ड शो में इरफान पहुंचे थे। किसी बड़ी अभिनेत्री से हाथ मिलाते वक्त उसे इरफान के मुंह से सिगरेट की गंध आ गई। अभिनेत्री ने कहा, इरफान, तुम सिगरेट पीना अब कम कर दो। इरफान ने कहा कि मैडम, मैं आजकल सिगरेट के फ्लेवर वाला डियो लगाता हूं।
इरफान की मौत पर लोग कह रहे हैं कि इतनी जल्दी भला कोई जाता है क्या? लेकिन जाने का समय कौन सा होता है, यह कोई तय नहीं ही कर सकता। वक्त-बे वक्त सभी को जाना है। इरफान तो आज के दौर के सबसे बड़े अदाकार थे। उन्हें देखकर ना जाने कितने किरदार लिखे गए।
इरफान उस दरख्त की तरह हैं, जिन्हें हम रेल की खिड़कियों से गुजरते हुए देखते हैं, लेकिन वो वहीं स्थिर रहते हैं। इरफान भी हमेशा अपनी अमिट अदाकारी से हमारे बीच रहेंगे। इरफान ने जिंदगी को आखिरी कश तक जिया है।
हैदर में इरफान ने बेपरवाही का लिबास ओढे, लेकिन ताकतवर अंदाज में खुद को लाफानी बताते हुए कहा था, दरिया भी मैं, दरख्त भी मैं, झेलम भी मैं, चिनार भी मैं, दैर भी हूं, हरम भी हूं, मैं था, मैं हूं, मैं रहूंगा।
आर्टिस्ट आदमी हो, तुमको याद रखेंगे गुरु हम...ये लाइन इरफान ने एक रंगमंच के पीछे से निकलते हुए 'हासिल' में आसमानी रंग के कुर्ते और गर्दन में गमछा लपेटे बोला था, जिसके बाद से इरफान कल्ट बनकर उभरा था।
खैर, हमारे साथी हैं उन्होंने आज लिखा, 'मौत की खबरें कम ही खारिज होती हैं..! तो सीटी बज गई है और रंगमंच का पर्दा गिर चुका है, लेकिन इस रंगमंच के बचे हुए रंग अब भी हमें खुद के भीतर सारोबोर करने के लिए काफी हैं। इसलिए तालियां बजती रहनी चाहिए।
अलविदा इरफान...