क्या किसी देश में एक महिला का जन्म लेना ही गुनाह है कि उस पर इतनी पाबंदियां लगाई जाएं!
- फोटो : Social Media
पिछले माह यानी की सितंबर में अफगानिस्तान में फुटबॉल मैचों का एक सिलसिला चला। महिलाओं, पुरुषों, युवतियों, युवकों ने हाथ में प्लेकार्ड लिए हुए थे। जिस पर लिखा था कि- "हम उस नीली लड़की के साथ हैं।" वैसे तो अन्तर्राष्ट्रीय जगत् में सहर के लिए सहानुभूति की लहर उठ खड़ी हुई है। ईरान की बहुत आलोचना हुई।
क्या किसी देश में एक महिला का जन्म लेना ही गुनाह है कि उस पर इतनी पाबंदियां लगाई जाएं। सहर को ब्ल्यू गर्ल इसीलिए कहा गया है, क्योंकि उसने अपनी मनपसंद टीम की जर्सी नीली रंग के ही कपड़े पहने थे।
अफगानिस्तान के जिस स्टेडियम में ईरानी युवती सहर खोदियारी के समर्थन में महिला व पुरुषों ने इतनी अधिक संख्या में प्लेकार्ड लिए हुए थे तो कभी उसी स्टेडियम में महिला व पुरुषों को तालिबान हुकुमत के समय में क्रूर सजा यूं सरेआम दी जाती थी। आज उसी स्टेडियम में महिला व पुरुष न केवल मैच देखते हैं बल्कि वहां दोनों के ही कई स्पोर्ट्स भी होते हैं।
कितने आश्चर्य की बात है कि सहर जिस टीम को सपोर्ट करती थी एस्टेगहलाल एफसी उसका फारसी में मतलब होता है। स्वतंत्रता और जिस स्टेडियम में वह मैच देखने के लिए प्रवेश करना चाहती थी उस स्टेडियम का नाम है आजादी स्टेडियम। लेकिन सहर के लिए आजादी एक दुस्वप्न बन कर रह गई।
खुशी की बात यह है कि स्टेडियम में न केवल युवतियों ने बल्कि पुरुषों ने भी उनके साथ मिलकर सहर के समर्थन में नारे लगाए। बात यहां तक पहुंच गई है कि एमन्स्टी इंटरनेशनल ने फीफा और एशियन फुटबॉल कन्फेडेरेशन से एक्शन लेने की अपील की है। अफगानी महिला अधिकारों के संघ की कार्यकर्ता मरियम अताही ने कहा महिलाओं का स्टेडियम में मैच देखना कतई धर्म विरुद्ध नहीं है। यह कोई गुनाह भी नहीं है।
इस अफगानी कार्यकर्ता मरियम अताही ने कहा हमने तालिबानी हुकूमत में बहुत कुछ सहा है। हमें कुचला गया, दबाया गया और बेकसूर होते हुए भी सजाएं दी गई। अब हम ऐसा नहीं होने देंगे। हम केवल अपने लिए ही नहीं बल्कि सभी महिलाओं के अधिकारों के लिए फिर चाहे वह किसी भी मुल्क किसी भी स्थान और धर्म की क्यों न हों मिलकर आवाज उठाएंगे।
इस बात को लिखते-लिखते खबर आई कि दशकों बाद ईरान की महिलाओं को स्टेडियम में जाने की अनुमति मिल गई और तेहरान स्टेडियम में उन्होंने फीफा सॉकर (फुटबॉल) मैच देखा। इसी आजादी स्टेडियम में महिलाओं को आजादी मिली। सहर की कुर्बानी ने महिलाओं को आजादी दिला दी। नीली लड़की की नीलम आभा फैल गई।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।