फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

योग की संस्कृति में घुलता-मिलता यूरोप

विज्ञापन
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भले ही पिछले हफ़्ते गुज़र गया है, लेकिन इसे मनाने का सिलसिला अब भी जारी है। - फोटो : Social Media
विज्ञापन

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भले ही पिछले हफ़्ते गुज़र गया है, लेकिन इसे मनाने का सिलसिला अब भी जारी है। स्वीडन के प्रमुख शहरों में भारतीय दूतावास की तरफ़ से इसका आयोजन किया गया, तो कुछ बड़े समूह व्यक्तिगत तौर पर योग दिवस के आयोजन में अब भी जुटे हुए हैं। यानी यहां योग को दिवस, सप्ताह या माह से जोड़ने का काम अभी चलता रहेगा। 

विज्ञापन


यूरोप में योग की स्थिति 
योग में यूरोप के लोगों की दिलचस्पी नई नहीं है। यहां के आम लोग हों या फिर नामीगिरामी हस्तियां, अधिकांश योग में अपनी गहरी रुचि का बखान करते हैं। हाल में स्टॉकहोम में भारतीय दूतावास की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौक़े पर स्वीडिश अभिनेत्री मालिन बर्गहागेन ने योग से उनके 21 साल पुराने संबंध की दास्तां सुनाई। जबकि योगासन, योग क्रियाओं के महत्व व लाभ को भी विस्तार से बताया। यही नहीं इस दौरान उन्होंने मंगलम् भगवान विष्णु के मंत्र को पूरे राग में गाया, और अंत में ऊँ नमो गुरुदेव नम: से समाप्ति किया। 

इस दौरान हॉल में योगासन के लिए उपस्थित लोगों की संख्या हज़ार से ज्यादा रही होगी। योग दिवस कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑडियो संदेश से हुई। योग से संबंधित इस संदेश में योग के प्रति जनचेतना जगाने, योग से लोगों को जोड़ने और जन-मन को स्वस्थ बनाने जैसी बातें कही गई। इस मौक़े पर भारतीय एंबेसडर मोनिका कपिल मोहता, आर्ट ऑफ़ लिविंग के अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त स्वामी ज्योतिर्मय समेत कई अन्य नामीगिरामी लोग मौजूद थे।
विज्ञापन


इस कार्यक्रम में संस्कृत के कई मंत्रोच्चारण भी हुए। हैरानी तो तब हुई जबकि भारतीय दूतावास के इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में विदेशी आए थे। वे यहां योग क्रियाएं करने और इससे जुड़ी बातों को सुनने व समझने आए थे। उन्हें देखकर सहज अंदाज़ा लगाया जा सकता था कि वे योग के प्रति गंभीर हैं। ऐसा हो भी क्यों नहीं, फ़िट रहना और इसके बेहतर तरीक़ों को अपनाना यहां के लोगों को पसंद है। 

संस्कृत के श्लोकों को भी समझते हैं लोग - फोटो : Social Media
इस कार्यक्रम में ज़ब अभिनेत्री मालिन ने लोगों से पूछा कि कितने लोग घर पर रोज़ योग करते हैं तो हाथ ऊपर करने वाले विदेशी लोगों की संख्या हम भारतीयों से कोई कम नहीं थी। यानी यहां लोगों के लिए योग नया नहीं है। हमारे योग से उनका परिचय हो चुका है, और अब योग से रिश्ते को मज़बूत किया जा रहा है।

आश्चर्य तो तब हुआ जबकि संस्कृत में मंत्रोच्चारण करना और उनका मतलब भी कई एक को यहां पता था। जब मैंने किसी स्थानीय से संस्कृत के श्लोक का मतलब समझना चाहा तो उसने अंग्रेज़ी में इसे ठीक-ठाक समझा भी दिया, और बताया कि ऊँ की तरह ये भी शांति और एकाग्रता देने वाले हैं। 

हमने पहले ही आपको बताया था कि केवल स्टॉकहोम में योग से जुड़ी संस्थाएं व संगठन तक़रीबन सौ से अधिक है। लेकिन बात यहीं ख़त्म नहीं होती। हाल के दिनों में यहां योग वेकेशन, योग ट्रेवल, योग समर, योग मेला जैसे कार्यक्रम शुरू हो गए हैं। इनका उद्देश्य योग के अलग-अलग तरीक़ों से लोगों को रुबरू कराना है। लोगों को स्वस्थ रहने के गुण सिखाना है।  

 
विज्ञापन

योग मेला लोगों के आकर्षण का केंद्र बना है। - फोटो : Social Media
हालांकि योग मेले में जाने का ख़र्च कुछ कम नहीं है। योग के साथ भजन- कीर्तन, नृत्य -संगीत, सत्संग, भारतीय और ईटालियन स्वादिष्ट शाकाहारी भोजन जैसी चीज़ों के लिए अच्छी रकम ख़र्च करनी पड़ेगी। ऐसा ही एक नौ दिवसीय योग मेला 29 जून से स्वीडन में शुरू होने जा रहा है।

आयोजक बताते हैं कि इसमें भारत समेत दूसरे देशों से भी योग शिक्षक और गायक, अलग-अलग क्षेत्रों के कलाकार आ रहे हैं। यह मेला शहर के बाहर लगेगा। जहां ठहरने की व्यवस्था और नौ दिनों के लिए तमाम सुविधाओं व मनोरंजन का ख़्याल रखा जाएगा।

इस शिविर को गर्मी की छुट्टियों का आनंद उठाने और खुद को तरोताज़ा करने की व्यवस्था के रूप में भी देखा जा सकता है। बच्चों के साथ जाएंगे तो उनके मनोरंजन की व्यवस्था और अभिभावकों के योग के दौरान उन्हें व्यस्त रखने के तमाम इंतज़ाम किए गए हैं। लेकिन यहां नौ दिनों तक रहने के लिए एक व्यक्ति को क़रीब 50 हज़ार तक ख़र्च करना पड़ सकता है।

अगर रहने-सोने के लिए लग्ज़री टेंट की व्यवस्था चाहिए तो बजट पौन लाख तक बैठ सकता है। ऐसे ही कई कार्यक्रम यूरोप के अलग-अलग जगहों पर अगले कुछ दिनों में शुरू होने वाले हैं जिसका सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर जमकर प्रचार शुरू हो चुका है। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें