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अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस: भारत की प्राचीन धरोहर को मिला वैश्विक सम्मान

सार

 आज दुनिया के प्रतिष्ठित अस्पताल, विश्वविद्यालय, खेल संस्थान और कॉर्पोरेट संगठन योग को अपनी जीवनशैली और स्वास्थ्य कार्यक्रमों का हिस्सा बना रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी योग की उपयोगिता ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया।
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योग दिवस की शुभकामना संदेश - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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भारत ने विश्व को अनेक अमूल्य ज्ञान परंपराएं दी हैं, लेकिन योग उन विरल उपहारों में से एक है, जिसकी प्रासंगिकता समय के साथ और बढ़ती गई है। हजारों वर्षों से योग भारतीय संस्कृति, दर्शन और जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा रहा है। ऋषियों की तपस्थली से लेकर जनसामान्य के जीवन तक योग ने शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का मार्ग प्रशस्त किया। फिर भी लंबे समय तक योग को वह वैश्विक पहचान नहीं मिल सकी जिसकी वह वास्तविक रूप से पात्र था।

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पिछले एक दशक में इस स्थिति में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा मिली है।

वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत द्वारा रखा गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस का प्रस्ताव केवल एक औपचारिक पहल नहीं थी, बल्कि भारतीय सभ्यता की उस ज्ञान परंपरा को विश्व मंच पर स्थापित करने का प्रयास था जो सदियों से मानव कल्याण का मार्ग दिखाती रही है। रिकॉर्ड 177 देशों द्वारा इस प्रस्ताव का समर्थन इस बात का प्रमाण था कि दुनिया योग के महत्व को स्वीकार करने के लिए तैयार थी।
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आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस केवल कैलेंडर का एक आयोजन नहीं है। यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव का प्रतीक बन चुका है। न्यूयॉर्क से लेकर पेरिस, सिडनी से लेकर टोक्यो और अफ्रीका से लेकर दक्षिण अमेरिका तक करोड़ों लोग योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना चुके हैं। यह किसी राजनीतिक या सरकारी अभियान की सफलता भर नहीं है, बल्कि योग की उस सार्वभौमिक उपयोगिता का परिणाम है जिसे दुनिया ने अनुभव किया है।

संतुलित जीवन का मार्गदर्शक है योग

आधुनिक जीवनशैली ने मानव समाज को अनेक चुनौतियों के सामने खड़ा कर दिया है। तनाव, अवसाद, अनिद्रा, मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी समस्याएं वैश्विक चिंता का विषय बन चुकी हैं। तकनीकी प्रगति ने जीवन को सुविधाजनक बनाया है, लेकिन मानसिक शांति और संतुलन की कमी भी उतनी ही तेजी से बढ़ी है। ऐसे समय में योग केवल व्यायाम की एक पद्धति नहीं, बल्कि संतुलित जीवन का मार्गदर्शक बनकर सामने आया है।

यही कारण है कि आज दुनिया के प्रतिष्ठित अस्पताल, विश्वविद्यालय, खेल संस्थान और कॉर्पोरेट संगठन योग को अपनी जीवनशैली और स्वास्थ्य कार्यक्रमों का हिस्सा बना रहे हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान भी योग की उपयोगिता ने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, मानसिक तनाव कम करने और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने में योग की भूमिका व्यापक रूप से स्वीकार की गई।

योग की बढ़ती लोकप्रियता ने एक नए आर्थिक क्षेत्र को भी जन्म दिया है। आज वैश्विक वेलनेस उद्योग में योग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। योग प्रशिक्षण, वेलनेस सेंटर, योग पर्यटन, ऑनलाइन कक्षाएं, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा और स्वास्थ्य उत्पादों का बाजार निरंतर विस्तार कर रहा है। भारत के लिए यह केवल सांस्कृतिक गौरव का विषय नहीं, बल्कि आर्थिक अवसर का भी महत्वपूर्ण स्रोत बन रहा है। ऋषिकेश, हरिद्वार, वाराणसी और केरल जैसे केंद्र दुनिया भर के योग साधकों को आकर्षित कर रहे हैं।

योग की इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि उसने भारत की सॉफ्ट पावर को नई ऊंचाई प्रदान की है। विश्व राजनीति में प्रभाव केवल सैन्य या आर्थिक शक्ति से नहीं बनता, बल्कि संस्कृति, विचार और मूल्यों से भी बनता है। योग ने भारत को ऐसी पहचान दी है जो सीमाओं, भाषाओं और विचारधाराओं से परे मानवता को जोड़ने का कार्य करती है।

यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि योग ने नए भारत की वैश्विक छवि को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और अंतरिक्ष उपलब्धियों के साथ-साथ योग ने यह भी स्थापित किया है कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराएं आज भी आधुनिक विश्व की समस्याओं का समाधान देने की क्षमता रखती हैं।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस हमें केवल अपनी विरासत पर गर्व करने का अवसर नहीं देता, बल्कि यह स्मरण भी कराता है कि भारत की सभ्यतागत शक्ति उसकी सबसे बड़ी पूंजी है। योग हजारों वर्षों से भारत की आत्मा का हिस्सा रहा है, लेकिन पिछले एक दशक में उसे जो वैश्विक सम्मान और स्वीकार्यता मिली है, उसने इसे भारत की सबसे सफल सांस्कृतिक उपलब्धियों में शामिल कर दिया है।

आज जब पूरी दुनिया योग को अपना रही है, तब यह स्पष्ट है कि भारत ने विश्व को केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि बेहतर जीवन जीने का एक मार्ग प्रदान किया है।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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