अमेरिका के शिकागो शहर में 1886 में अपने हकों की खातिर जिन मजदूरों ने शहादत दी, उनकी याद में मजदूर दिवस मनाया जाता रहा है। पिछले 134 वर्षों के इतिहास में यह पहला अवसर था जब अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर कोविड-19 के चलते कहीं भी न ही रैलियां निकाली जा सकीं और ना ही सभाएं या अन्य कार्यक्रम किए जा सके।
वरिष्ठ अर्थशास्त्री साथी डॉ. जया मेहता की प्रेरणा और पहल से इंदौर में श्रम संगठनों, जन संगठनों, कला-संस्कृति के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों एटक, सीटू, सन्दर्भ, प्रलेस, इप्टा, एनएफआईडब्ल्यू और रूपांकन के संयुक्त तत्वाधान में एक अनूठा और सार्थक कार्यक्रम आयोजित किया। एक वेबिनार, बिल्कुल वैसा ही जैसे हाॅल में किए जाने वाले कार्यक्रम होते हैं।
बस फर्क यह था कि इसमें जुड़ने वाले लोग एक आभासी हाॅल में इंटरनेट कनेक्शन के जरिए इकट्ठे हुए थे। इनमें मेहतकश निर्माण मजदूर थे, कारखानों में काम करने वाले, आंगनबाड़ी-आशा कार्यकर्ता और इन मजदूरों के हक की लड़ाई लड़ने वाले श्रम संगठनों के नेतृत्वकारी साथी भी इसमें शामिल हुए थे।
यह तैयारी थी शासन-प्रशासन द्वारा हाशिये पर फेंक दिए गए पूरे मेहनतकश तबके को, उनकी समस्याओं और उनके जीवन से जुड़े मुद्दों को फिर से उन सारे लोगों के बीच लेकर आना जिन्होंने सोशल मीडिया को ही अपनी दुनिया समझ लिया है। यह कोशिश थी मेहनतकश तबके को वह मंच देने की जिस पर अभी तक तकनीकी सुविधा संपन्न अभिजात्य वर्ग अपना वर्चस्व बनाए हुए है।
'लॉकडाउन के दौरान मेहनतकश जनता' विषय पद आयोजित वेबिनार में विभिन्न क्षेत्रों के मजदूर, विभिन्न ट्रेड यूनियन के नेतृत्वकारी काॅमरेड्स, कलाकारों, लेखकों, युवाओं और तमाम जागरूक लोगों ने सक्रिय रूप से शिरकत की।
इस वेबिनार में इंदौर, पीथमपुर, घाटा बिल्लौद, सहित भारत के विभिन्न नगरों यथा सेंधवा, सागर, अशोकनगर, भोपाल, पुणे, दमोह, शिवपुरी, ग्वालियर, रायगढ़, भिलाई, रायपुर, लखनऊ, दिल्ली से और अमेरिका से भी लॉकडाउन प्रभावित श्रमिकों सहित ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, लेखकों, पत्रकारों, कलाधर्मियों एवं युवा विद्यार्थियों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
मजदूर दिवस को लेकर आयोजित शाम में प्रलेस के राष्ट्रीय सचिव विनीत तिवारी ने मई दिवस की क्रांतिकारी शुभकामनाएं दीं और सभी का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की प्रस्तावना रखी और लॉकडाउन के चलते उत्पन्न हुई परिस्थितियों में वेबिनार तकनीक के जरिये इस लॉकडाउन के दौरान मेहनतकश जनता और विभिन्न क्षेत्रों के मजदूरों से बातचीत के कार्यक्रम के महत्त्व को रेखांकित किया। साथी विनीत तिवारी ने रोजाना निर्माण मजदूरों एवं अन्य दिहाड़ी मजदूरों के मध्य किए जा रहे सर्वे के दौरान हुई बातचीत में इन मजदूरों द्वारा व्यक्त की गई वास्तविक समस्याओं का जिक्र किया।
एटक के वरिष्ठ नेता वसंत शिंत्रे ने कार्यक्रम की शुरूआत में बताया कि यह वर्ष ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कौंसिल (एटक) का 100वां वर्ष है। एटक आजादी से पहले बनी मजदूरों की पहली यूनियन है जो तब से अब तक मजदूरों के हित और अधिकारों के लिए लड़ने वाला संगठन है। एटक के पूर्व राज्य अध्यक्ष एवं सक्रिय साथी दिवंगत काॅमरेड मोहन निमजे को समर्पित इस आयोंजन में काॅमरेड मोहन निमजे और उनके ट्रेड यूनियन मूवमेंट में लंबे योगदान को याद करते हुए काॅमरेड भारत सिंह ने अपने विचार व्यक्त किए।