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विश्व नशा मुक्ति दिवस 2020: नशा है एक धीमा जहर? कैसे बचेगी दुनिया?

सार

  • आज बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक नशे के गुलाम बन चुके हैं।
  • नशा आज स्टेटस सिबंल बन चुका है।
  • आज मां-बाप दुखी हैं कि उनके चिराग नशें की गिरफत में आते जा रहे हैं।
  • हर राज्यों की सहभगिता हो तो नशे पर लगाम लग सकती है।
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दुनिया के देशों में नशा करने वालों की मृत्यु दर भी बढ़ते जा रही है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
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विस्तार
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बेशक प्रतिवर्ष 26 जून 2020 को पूरी दुनिया में अंतराष्टरीय नशा निषेध दिवस मनाया जा रहा है, मगर हर साल औपचारिकता ही निभाई जाती है। संकल्प लिया जाता है, दावे किए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीतियां बनाई जाती हैं। मगर धरातल पर कुछ नहीं होता। नशे के सेवन को रोकने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। नशा एक धीमा जहर है।

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दुनिया के देशों में नशा करने वालों की मृत्यु दर भी बढ़ते जा रही है। तमाम दावों के बावजूद नशा नहीं रुक रहा है। प्रतिवर्ष लाखों लोग दुनिया में नशें के कारण अकाल मौत मर रहे हैं। पूरी दुनिया के देशों में जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। सेमिनार लगाए जाते हैं। नशे के दुष्परिणामों के बारे में विशेषज्ञों द्वारा लोगों को सलाह दी जाती है।


एक दिन ऐसे दिवस मनाने से कुछ नहीं होगा। देशों की एकजुटता से ही नशे को रोका जा सकता है। दुनिया में नशीले पदार्थो की तस्करी की खबरे समाचार पत्रों में प्रकाशित होती हैं। नशीली दवाएं पकड़ी जाती हैं। आज कोकीन,अफीम, गांजा ,हैरोईन व हशीश व ब्राउन शुगर तथा चरस व भांग जैसे नशे किए जा रहे हैं।
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आज बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक नशें के गुलाम बन चुके हैं। नशा आज स्टेटस सिबंल बन चुका है। कैसी विडंबना है कि मानव को नशें से होने वाली बीमारियों का पता है फिर भी खुद ही मौत को दावत दी जाती है। पुरुष तो नशा करते ही हैं मगर आज महिलाए भी नशें की गिरफत में आ चुकी हैं। दर्जनों प्रकार के नशों को करती हैं।

दुनिया में नशा करने वाले लोगों की संख्या में वृ़द्धि बहुत ही चिंताजनक है। नशा छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति केन्द्र खोले जा रहे हैं। बीते 31 मई 2020 को विश्व धूम्रपान निषेध दिवस मनाया गया, मगर ऐसे दिवस औपचारिकता भर ही रह गए हैं। युवा पीढी़ नशें की गुलाम हो चुकी है।

दुनिया भर के युवा नशे की अंधी गलियों में भटक चुके हैं। युवाओं को बाहर निकालना हरेक का नैतिक कर्तव्य है। दुनिया में हर साल लाखों युवा नशे के कारण असमय ही मौत के आगोश में समाते जा रहे हैं। नशा निषेध दिवस पर एक संकल्प लेना होगा।

अक्सर देखा गया है कि उच्च घरानों के युवा मंहगें नशें कर रहे हैं...

छोटे-छोटे बच्चे नशे के आदी हो चुके हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
नशेड़ी होती जा रहे युवा नशें को सब कुछ मान बैठे हैं। आज छोटे-छोटे बच्चे नशें के आदी हो चुके हैं। अभी उनके दूध के दांत भी नही टूटे हैं। मगर ऐसे नशे करते हैं कि रुह कांंपती है। आजकज चिट्टेे व डोडे व भुककी व बूट पालिस व गंदे से गंदा नशा किया जा रहा है।

शराब व दवाओं का नशा किया जा रहा है। हर रोज चिट्टेे व हैरोइन के अवैध कारोबार करने वालों को पकड़ा जा रहा है। नशा आज एक फैशन बन चुका है। नशें के कारण आज कई घरों के चिराग बूझ गए तो कुछ जेलों में चक्की पीस रहें है। जेलों में सड़ रहे हैं।

अक्सर देखा गया है कि उच्च घरानों के युवा मंहगें नशें कर रहे हैं। नशें के बिना रह नहीं सकते। जिंदगियां दाव पर लगा चुके हैं। जिंदा लाशें बनते जा रहे हैं। लाईलाज बीमारियों से ग्रस्त होते जा रहे हैं। आज लाखों युवा नशे के कारण मर चुके हैं। नशे की दलदल में धसते जा रहे हैं। इस दलदल से निकला बहुत ही मुश्किल है।

आज मां-बाप दुखी हैं कि उनके चिराग नशें की गिरफत में आते जा रहे हैं। आज नशे के सौदागर युवाओं के भविष्य खराब करते जा रहे हैं। अगर युवा ही नशे का प्रयोग करेगा तो आने वाला कल अंधकारमय ही होगा। युवा के कंधों पर देश टिका है, मगर यह कंधे थक चुके हैं। नसों में नशा भर चुका है।

जवान काया शिथिल होती जा रही है। नशे के कारण सड़क हादसों में हर साल लाखों युवा बेमौत मारे जा रहे हैं। सरकारों को राजस्व प्राप्त होता है। सरकारों को कर्णधारों की कोई फिक्र नहीं हेैं। राजस्व से ही खजाना भरा जा रहा है। युवा मर रहे हैं।

चंद मिनट के मजे के लिए अनमोल जीवन बरबाद कर रहे हैं। युवतियां भी नशे की दलदल में फंस चुकी हैं। समाचार पत्रों में डरावने समाचरों से पता चलता है कि आज लड़कियां भी चार कदम आगे जा चुकी हैं। सिगरेट व अन्य चरस जैसे नशें शरीर के अंगों को प्रभवित करते हैं।

दुनिया में कैंसर व तपेदिक व गले के कैसर से मौतों का आंकड़ा हर साल बढ़ता ही जा रहा है। अगर इन नशे को नहीं रोका तो आने वाले सालों में भयावह परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। नशा समाज व देशों के लिए नासूर बन गया है। नशे को मिटाने की कसम लेनी होगी।
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समय अभी संभलने का है।समाज को नशें के विरुद्ध आवाज उठानी होगी ताकि युवाओं का भविष्य संवर सके...

सामाजिक संस्थाओं को नशे के खिलाफ अभियान चलाने होगें- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media
आज नशे के कारण इकलौते बच्चे मारें जा रहे हैं। नशे के लिए पैसा न मिलने केे लिए मां-बाप को मौत के घाट उतारा जा रहा है। अगर सरकारों ने अभी भी कुभंकरणी नींद न तोड़ी तो फिर सब कुछ लुट जाएगा। नशें के कारण अपराधों में इजाफा हो रहा है।

समाज को इस बुराई पर मंथन करना होगा ताकि चिरागों को बचाया जा सके। तम्बाकू उत्पादों पर रोक लगानी होगी। अगर दुनिया की सरकारें चाहे तो क्या नहीं कर सकती। राजस्व के लिए और भी साधन हैं। ऐसा राजस्व किस काम जो युवाओं की मौत से प्राप्त हो रहा है।

युवाओं की बलि ली जा रही है। नशे का कारोबार करने वालों पर दंडात्मक कारवाई करनी होगी। स्कूलों व कोलेजों के सौ मीटर के दायरे में धूम्रपान बेचने वालों को सजा दी जाए, जो चंद चांदी के सिक्कों की कमाई के लिए युवाओं का जीवन लील रहे हैं।

लावारिस लाशें मिल रहीं हैं। युवाओं को बचाना हमारी जिम्मेदारी है। अपराध की जननी नशा ही है। नशे के कारण दंगे व फसाद होते जा रहे हैं। नशे में अंधा होकर दुष्कर्म किए जा रहे हैं। युवा अनमोल पूंजी है। युवा देश की धरोहर है। समाज में एक कमेटी गठित करनी होगी तभी यह नशा बंद हो सकता है।

नशा करने वालों को समाज से बहिष्कृत किया जाए, उनका हुक्का पानी बंद किया जाए ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके और युवाओं का जीवन बचाया जा सके। सामाजिक संस्थाओं को नशे के खिलाफ अभियान चलाने होंंगे। युवा ही देश को आगे ले जा सकते है।

समय अभी संभलने का है। समाज को नशे के विरुद्ध आवाज उठानी होगी ताकि युवाओं का भविष्य संवर सके। अगर समाज अब भी नहीं जागा तो युवा नशें की दलदल में धंसता जाएगा। समाज से इस बुराई को जड़ से मिटाना होगा। नशें को बंद करने के लिए कानून बनाना चाहिए।

हर राज्यों की सहभगिता हो तो नशे पर लगाम लग सकती है। नशा मुक्ति केन्द्र खोलने चाहिए ताकि युवाओं की काउंसलिग की जा सके। सरकार को बिना समय गंवाए इस पर रोक लगानी होगी ताकि युवाओं की पीढ़ियां बचाई जा सके। आने वाली पीढ़ीओं को नशे को त्यागना होगा।

जीवन को मत गंवाओ जीवन एक बार ही मिलता है। दुनिया के सभी देशों को सर्तकता बरतनी होगी। नशे का खात्मा करना होगा। नशे का सेवन रोकना होगा। दुनिया के तमाम देशों की भागीदारी से ही नशे को रोका जा सकता है। तभी ऐसे अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवसों की सार्थकता होगी।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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