लड़कियों को सामान्य नजरों से देखना कब शुरू करेगा समाज?
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यही नहीं सिगरेट, शराब पीना तो आजकल का फैशन बना हुआ है। जाहिर है यहां यह कहने का मतलब नहीं है कि ये अच्छी चीज़ है और इसे पीना चाहिए, लेकिन जब आप शराब पीने वाले लड़कों को बेशर्म नहीं कहते तो भला लड़कियों को क्यों कह रहे हैं? यदि लड़कों की तरह ही कोई लड़की अपनी लिमिट में रहकर पार्टी ये दोस्तों के साथ पी रही है तो झट से उसे बेशर्म होने का तमगा क्यों दे दिया जाता है? ऐसे कई सारे क्यों हैं जिन पर सवाल पूछना शुरू करें तो लड़कियों की दुनिया में सवाल ही रह जाएंगे और वे खुद ही एक सवाल बनकर रह जाएंगी।
मसलन
क्यों लड़कियों को बाहर जाना आज भी एक कस्बे में एक सामान्य नहीं बल्कि विशेष घटना मानी जाती है? लड़कियों का कपड़े पहनना, बातें करना, उनका नाचना-गाना और यहां तक की खड़े रहना भी संदेह के कई कोणों से क्यों देखा जाता है? ट्रांस्पेरेंट टॉप से बाहर झांकती लाल रंग के ब्रा की पट्टी या छोटी टीशर्ट पहनकर हाथ ऊपर करने पर टमी दिख जाए तो लड़कियां बेशर्म हो जाती हैं, लेकिन कमर से नीची जींस पहनकर जिसमें लड़कों के अंडरवियर का ब्रांड भी दिख जाए तो वह लड़के संस्कारी ही बने रहते हैं, क्यों भई? देर रात से आने वाले लड़के मर्दानगी का प्रतीक है जबकि लड़की देर रात से घर लौटे तो उसका चरित्र क्यों संदेह के घेरे में आ जाता है?
बहरहाल, सोशल मीडिया और फिल्मों ने लड़कियों को लेकर बहुत हद तक समाज की प्रगतिशील सोच को बढ़ावा दिया है, लेकिन आज भी लड़कियों को उनके स्वाभाविक जीवन को हासिल करने के लिए लंबी लड़ाई दिखाई देती है। हमारी सोसायटी में लड़कियों को लेकर आज भी एक अलग तरह की मानसिकता क्यों काम करती है? परंपरा और संस्कृति की सारी बंदिशें आज भी लड़कियों पर भार की तरह है? भले ही लड़कियां हर मामले में लड़कों से अव्वल और हवाई जहाज उड़ाकर आसमान नाप रहीं हैं।
क्यों के साथ ऐसे कई सारे सवाल हैं जो आज भी लड़कियों के पूरे जीवन पर बंदिशों का ताला लगाकर आज भी उनके अस्तित्व को ही चुनौती दे रहे हैं। आखिर लड़कियों और लड़कों के बीच में अंतर का ये आधार हमारे समाज के कौन से विकास और प्रगतिशीलता की कहानी कह रहा है? आखिर समाज क्यों नहीं समझ पा रहा कि लड़कियां उतनी ही सक्षम हैं जितने लड़के। एक मनुष्य के रूप में लड़कियों की उतनी ही इच्छाएं हैं जितनी की लड़कों की।
लड़कियों को लेकर ये गॉसिप कब बंद होगी? आखिर लड़कियां कब बेशर्म नहीं कही जाएंगी?
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