भारत में काफी लोग पाकिस्तान के साथ सीजफायर से खफा हैं, ऐसा कई सोशल मीडिया पोस्ट से पता चलता है। कांग्रेस ने भी सीजफायर के मुद्दे को लपक लिया है, वो इंदिया गांधी की याद दिला रही है। क्या सच में भारत ने सीजफायर करके गलती की है? क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीजफायर का श्रेय लेने के लिए इसकी पहले घोषणा की दी? जो भारत के लोगों को पसंद नहीं आई। कई सवाल हैं।
बौखलाहट में पाकिस्तान ने भारत पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिनमें से अधिकांश को हमारे एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया। भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने अपनी महारथ का परिचय दिया। पाकिस्तान ने जब भारत के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की तो उसके 11 एयरबेस पर भारतीय सेना ने जिस तह से मिसाइलें बरसाईं, उसने पाकिस्तान की जगहंसाई करा दी। भारत के पलटवार ने पाक सेना की पोल खोलकर दी। यह भारत की बड़ी विजय है।
पाक सेना की स्थिति यह हो गई थी कि रात साढ़े तीन बजे उसका प्रवक्ता प्रेस कॉन्फ्रेंस करने को मजबूर हो रहा था। तीन दिन की लड़ाई में पाकिस्तान को भारी नुकसान पहुंचा है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट हो जाएगा। सीजफायर भले हो गया है, लेकिन भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंक की कोई भी घटना अब एक्ट ऑफ वार, यानी युद्ध माना जाएगा। आगे भारत के पास आतंकी ठिकानों पर हमले के विकल्प खुल गए हैं। यह भारत की बड़ी विजय है।
अब तक भारत ने क्या सीखा?
तीन दिन की लड़ाई से भारत को कुछ सबक भी मिले हैं। तीन दिन हमारे एयर डिफेंस सिस्टम ने भारतीयों को बड़े नुकसान से बचाया है। भविष्य में भारत को अपने दम पर एयर डिफेंस सिस्टम और मजबूत करना होगा। हथियारों को लेकर दूसरे देशों पर निर्भरता को खत्म करने की आवश्यकता है। हालांकि, मेक इन इंडिया के तहत यह कार्य जारी है, लेकिन इसे और पुख्ता करने की आवश्यकता है। इस बार ड्रोन्स का लड़ाई में बहुत बड़ा रोल देखा गया। हमें और घातक ड्रोन्स पर काम करने की आवश्यकता है।
सीजफायर के समय युद्ध रोकने के अलावा किसी दूसरे मुद्दे पर चर्चा नहीं की गई है, यानी सिंधु जल संधि निलंबित रहेगी। पिछले कुछ वर्षों से भारत इसे लेकर अपना रुख स्पष्ट करता आ रहा है। सिंधु जल संधि को पुनः अपनी शर्तों पर निधारित करने की जरूरत है। सिंधु का जल पंजाब, हरियाणा, राजस्थान तक लाया जा सकता है, इस पर तेजी से कार्य होना चाहिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भले सीजफायर पर श्रेय लेने का प्रयास किया है, लेकिन सच यह है कि सीजफायर के लिए फोन पाकिस्तान ने किया। तीन दिन की लड़ाई में पाकिस्तान को समझ में आ गया कि उसके लिए आगे दो-तीन दिन टिक पाना मुश्किल होगा। वैसे भी शुरुआत से उसके नेता बातचीत का राग अलाप रहे थे।
अब यह स्पष्ट है कि आतंक की घटनाओं को भारत कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि पाकिस्तान समर्थिक आतंकियों ने फिर पहलगाम जैसी हिमाकत की तो जवाब इस बार से ज्यादा कड़ा होगा।
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