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ऑपरेशन सिंदूर: क्या इस भारत-पाक संघर्ष से क्षेत्र का भूगोल भी बदल जाएगा?

सार

पहलगाम में पाक पोषित आतंकियों ने 26 निर्दोषों की निर्मम हत्या कर दी थी। यह देखकर समूचे हिंदुस्तान का खून खौल उठा था। 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तरह देर रात भारत की मिसाइलों और ड्रोनों ने सटीक निशाना साधकर पाकिस्तान में आतंकियों के 9 ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। क्या पाकिस्तान के साथ जारी संघर्ष का अंजाम इतिहास के साथ-साथ भूगोल बदलने में भी होगा?
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ऑपरेशन सिंदूर - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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बीते 22 अप्रैल को कश्मीर में पहलगाम के पास बैसरन घाटी में हुए आंतकी हमले में धर्म पूछकर पर्यटकों की की गई निर्मम हत्या तथा कई नवसुहागिनों के माथे का सिंदूर बेरहमी से पोंछ देने के शैतानी कृत्य और उसके बाद पुराने दुश्मन भारत और पाकिस्तान के बीच आई युद्ध की नौबत का अंजाम क्या होगा, इस पर भी विचार जरूरी है।

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भारत का स्पष्ट मानना है कि पहलगाम हमले के पीछे पाकिस्तान की एक सोची-समझी चाल थी, जिसका मकसद धर्म के आधार पर भारत को फिर से बांटकर उसे कमजोर करना था। क्योंकि पूरी दुनिया में एक ही देश में धर्म के आधार पर दो राष्ट्र होने के महाझूठ की बुनियाद पर ही पाकिस्तान का निर्माण हुआ था। पाकिस्तान धर्मांधता की राह और भारत 'सर्व धर्म समभाव' के रास्ते पर चला। ऐसे में भारत का कमजोर होना ही पाकिस्तान के जिंदा रहने की गारंटी है। 

इसमे संदेह नहीं कि पाकिस्तान के जेहादी सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर ने अपनी कट्टरपंथी सोच, सत्ता की महत्वाकांक्षा और खुद को इस्लाम का सच्चा सेवक साबित करने के इरादे से इस सारे घटनाक्रम को आकार दिया। मुनीर का मानना है कि कट्टरपंथी इस्लाम की आड़ में वो अपनी हसरतों को पूरा कर सकता है, भले ही इसकी वजह से पाकिस्तान के फिर टुकड़े हो जाएं।
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इसी संदर्भ में पहलगाम कांड को भी 7 अक्तूबर 2023 को इजराइल पर हमास द्वारा किए हमले की तर्ज पर ही डिजाइन किया गया था। यह बात अलग है कि भारत के सामाजिक एकात्मता के मजूबत ताने बाने ने इस षड्यंत्र को विफल कर दिया।

न केवल पहलगाम हमला बल्कि बाद में भारत के पलटवार का जवाब हमास की तर्ज पर पाक द्वारा भारत पर एक साथ कई मिसाइलों और ड्रोनों से करने के पैटर्न में भी दिखा। लेकिन यह भी भारत की फौलादी एकजुटता और प्रतिरोधक सैन्य शक्ति के आगे नाकाम रहा।

गौरतलब है कि पहलगाम में पाक पोषित आतंकियों ने 26 निर्दोषों की निर्मम हत्या कर दी थी। यह देखकर समूचे हिंदुस्तान का खून खौल उठा था, क्योंकि देश में अब हुई तमाम आंतकी घटनाओं में भी इतनी निकृष्ट रणनीति नहीं अपनाई गई थी।
 

मोदी सरकार की ‘मल्टीपल स्ट्राइक’

लिहाजा मोदी सरकार पर इस बात का पूरा दबाव था कि पहलगाम के अपराधियों और उनके आकाओं को कड़ा दंड दिया जाए। लेकिन यह काम इतना आसान नहीं था और बहुआयामी मोर्चाबंदी और कठोर राजनीतिक इच्छाशक्ति की मांग करता था। वही हुआ भी। मोदी सरकार ने पहलगाम के बदले में सैनिक के साथ साथ कूटनीतिक, कानूनी, आर्थिक और सामाजिक मोर्चों पर तगड़ी मोर्चाबंदी की। इसे ‘मल्टीपल स्ट्राइक’ भी कहा जा सकता है।  

पहलगाम हादसे के तीसरे दिन भारत ने भारत और पाक के बीच सिंधु सहित 6 नदियों के जल बंटवारे की 65 साल पुरानी संधि को स्थगित कर पहली ‘वाटर स्ट्राइक’ की। इससे बौखलाए पाकिस्तान ने इसे ‘एक्ट ऑफ वाॅर’ कहा। पाक की जल सप्लाई पर अंकुश लगाकर भारत ने उसकी कमजोर नस दबा दी।

जवाब में पाकिस्तान में 53 साल पुराने शिमला समझौते को स्थगित कर दिया, जिसके तहत दोनो देशों को कश्मीर समस्या को आपसी संवाद से सुलझाना था तथा 1971 में बनी सरहदों को नियंत्रण रेखा के रूप में स्वीकार करना था। हालांकि व्यवहार में पाक इस संधि को पहले ही धता बता चुका था।
 

ऑपरेशन सिंदूर

लेकिन पहलगाम का घाव ऐसी स्ट्राइकों से नहीं भरने वाला था। लोग चाहते थे कि सरकार और सेना पाक को तगड़ा सबक सिखाए। इसकी तैयारियों में वक्त लगा। अंतत: 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तरह देर रात भारत की मिसाइलों और ड्रोनों ने सटीक निशाना साधकर पाकिस्तान में आतंकियों के 20 में से 9 ठिकानों को ध्वस्त कर दिया।

सेना की इस संयुक्त और सौ फीसदी सफल कार्रवाई से पूरे विश्व में यह संदेश गया कि भारत की सेनाएं उच्च मनोबल के साथ तकनीकी रूप से भी उतनी सक्षम हो चुकी हैं, जो काबिलियत अभी केवल अमेरिका और इजराइल  की सेनाओं के पास ही है। हमारी सेना ने पाकिस्तान में जैश- ए-मोहम्मद, लश्करे तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन के अड्डों पर भीषण वार करके उन्हें न सिर्फ तबाह किया बल्कि सौ से अधिक आंतकियों को मौत के घाट उतार दिया।

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ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को हुआ नुकसान - फोटो : पीटीआई
इस घनाघात से पाक का वह झूठ भी बेनकाब हो गया कि वह आंतकवाद को नहीं पालता। यही नहीं, इस हमले में पाक सेनाध्यक्ष और पाकिस्तानी सेना के अहम पर भी करारी चोट की। जिसका बदला पाक सेना ने 9 मई को भारत में कई ठिकानों पर ड्रोन व मिसाइल हमले से लेने की कोशिश की, जिनमें से ज्यादातर नाकाम कर दिए गए। पाकिस्तान का यह हमला नाक भी अपनी बचाने की नीयत से ज्यादा किया गया था, जिससे भारत के दो एयरबेस को मामूली नुकसान पहुंचा।

उधर भारत के कामयाब एयर डिफेंस सिस्टम ने पाक सेना के तीन लड़ाकू विमानों को मार गिराया। इससे बौखलाए पाकिस्तान ने भारत पर 26 स्थानों पर ड्रोन हमले किए। इसके उत्तर में भारत की वायुसेना ने 10 मई के तड़के पाकिस्तान के 6 एयरबेस बर्बाद कर दिए। इस लड़ाई ने हमारे शस्त्रास्त्रों की सटीकता, कारगरता और प्रामाणिकता पर भी मोहर लगा दी। जबकि पाक के पास मौजूद ज्यादातर चीनी हथियारों की मारक क्षमता ने यही साबित किया कि उनमें और चीनी पटाखों में बहुत अंतर नहीं है। 

सबसे बड़ी बात इस समूचे वार-पलटवार में भारत की रणनीति में एक बुनियादी शिफ्ट नजर आ रहा है। वो ये कि अब भारत उस पर हुए आंतकी हमलों का बदला लेने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मुंह नहीं ताकता  बल्कि अमेरिका और इजराइल की तर्ज पर खुद ही काम तमाम करने में भरोसा रखता है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ इसी सोच का नतीजा है। यह ऑपरेशन भारतीय स्त्री के सुहाग के प्रतीक सिंदूर की अमिटता से ओत-प्रोत है और अभी खत्म नहीं हुआ है।

आतंक के खिलाफ भारत की लड़ाई

दूसरे, भारत ने यह लड़ाई अभी तक आतंक के खिलाफ ही फोकस की हुई है। लेकिन पाकिस्तान ने इसको विस्तार दिया तो उसके नतीजे गंभीर होंगे। भारत उसी अनुपात में बड़ा पलटवार करेगा। वैसे भी भारत ने इस संघर्ष को ‘आधिकारिक युद्ध’ की संज्ञा नहीं दी है, जबकि पाकिस्तान ने इसे अपनी तरफ से ‘युद्ध’ का नाम दे दिया है। तैयारी दोनों तरफ से है।

फर्क इतना है कि पाक का यह कृत्य उसके लिए आत्मघाती हो सकता है तो भारत के लिए अपना पौरूष दिखाने की घडी एक बार फिर से आन पड़ी है। उसे फिर से अर्जुन बनना पड़ेगा। वही होता भी दिख रहा है। 

वैसे इक्कीसवीं सदी में जन्मी जन जेड के लिए दो प्रतिद्वंद्वी देशों के बीच तनाव का यह स्तर, भीषण युद्ध की पूर्व पीठिका के साथ देशभक्ति का ज्वार रोमांचित करने वाला है, क्योंकि उन्होंने पाक के साथ पुराने युद्धों की सिर्फ कहानियां सुनी हैं या फिर मोबाइल में डूबी आत्मकेन्द्रित जिंदगी को ही जिया है। राष्ट्र के लिए प्राणोत्सर्ग का इको सिस्टम उनके लिए कुछ अनोखा और कुतूहल से भरा है। जीवन और इतिहास की तल्ख सच्चाइयों से रूबरू कराने वाला है। 

अब सबसे सवाल यह है कि इस लड़ाई का अंजाम क्या होगा? यह संघर्ष कहां जाकर थमेगा? या और बढ़ेगा? इन सवालों के उत्तर अभी भविष्य के गर्भ में हैं। लेकिन इसके संकेत पहलगाम हमले के बाद नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के उस सम्बोधन में खोजे जा सकते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘समय सीमित है, लक्ष्य बड़े हैं।‘ बड़े लक्ष्य से क्या तात्पर्य है?  

क्या पाकिस्तान के साथ जारी संघर्ष का अंजाम इतिहास के साथ-साथ भूगोल बदलने में भी होगा? क्योंकि भारत सरकार जिस व्यापक और बहुआयामी स्तर पर तैयारियां कर रही है, उससे यही लगता है कि पहलगाम के धमाके दूर तक सुनाई देंगे। यह अनुगूंज किस रूप में होगी? क्या भारत पाकिस्तान को झटका देकर रूक जाएगा या फिर पाकिस्तान में 1971 फिर से दोहराया जाएगा?

भारत और पाक के बीच विवाद के मूल में कश्मीर है। तो क्या अब कश्मीर के संदर्भ में 1947 में हुई राजनीतिक भूल को सुधारा जाएगा? निश्चित रूप से क्या होगा कहना मुश्किल है। मगर पाकिस्तान के लिए जो होगा, वो ऐतिहासिक होगा।


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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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