हिंदी का प्रथम समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तंड’
1820 के युग में बंगाली, उर्दू तथा कई भारतीय भाषाओं में पत्र प्रकाशित हो चुके। 1819 में प्रकाशित बंगाली दर्पण के कुछ हिस्से हिंदी में भी प्रकाशित हुआ करते थे लेकिन हिंदी के प्रथम समाचार पत्र होने का गौरव ‘उदन्त मार्तंड’ को प्राप्त है। इसका प्रकाशन जुगल किशोर शुक्ल ने किया। यह समाचार पत्र हिंदी की खड़ी बोली और ब्रज भाषा के मिश्रण में प्रकाशित होता था।
इसके प्रथम अंक की 500 प्रतियां प्रकाशित की गयी थी। यह समाचार पत्र प्रत्येक मंगलवार को प्रकाशित होता था। 30 मई 1826 को प्रकाशित होने वाला यह समाचार पत्र 5 दिसम्बर 1827 को बंद हो गया। इसके बंद होने में ब्रिटिश प्रशासन की असहयोग नीति प्रमुख रही। भारत के प्रमुख हिंदी समाचार पत्र के प्रकाशक पंडित जुगल किशोर मूलतः कानपुर के निवासी थे। वे सिविल एवं राजस्व उच्च न्यायलय कलकत्ता में पहले कार्यवाहक रीडर तथा बाद में वकील बन गए।
इसके बाद हिंदी का अग्रणी समाचार पत्र बनारस अखबार का प्रकाशन हुआ। गोविन्द रघुनाथ इसके संपादक थे। 1854 में हिंदी का प्रथम दैनिक समाचार पत्र ‘समाचार सुधावर्षण’ का प्रकाशन कलकत्ता से हुआ। यह समाचार पत्र बाबू श्याम सुन्दर सेन के संपादन में प्रकाशित हुआ।
1857 के बाद अंग्रेजों द्वारा सम्पादित और प्रकाशित पत्रों में प्रमुख समाचार पत्र थे, टाइम्स ऑफ इंडिया 1861, स्टेट्समेन- 1878, फ्रेंड ऑफ इंडिया तथा इंग्लिशमेन, कलकत्ता से प्रकाशित होते थे। मद्रास मेल मद्रास से, पायोनीयर इलाहबाद से तथा सिविल एवं मिलेट्री गजट- 1878 लाहौर से प्रकाशित हो रहे थे। बम्बई में प्रकाशित होने वाले पत्रों में मराठा और केसरी प्रमुख है।
मराठा अंग्रेजी भाषा में एक साप्ताहिक पत्र के रूप में तथा केसरी मराठी भाषा में 1881 से एक साथ प्रकाशित हुए। इसके बाद निरंतर समाचार पत्र पत्रिकाओं के प्रकाशन का सिलसिला चलता रहा जो आज तक जारी है।
भारतीय पत्रकारिता के इन 245 वर्षों के इतिहास में देश के दूरदराज दूरस्थ स्थानों, छोटे शहरों, कस्बों, नगरों, महानगरों से अनेक पत्र पत्रिकाओं का प्रकाशन का इतिहास दर्ज है।
छोटे और लघु समाचार पत्र कमजोर आर्थिक स्थिति एवं विज्ञापनों से प्राप्त आय के आभाव में भी निरंतर प्रकाशित होते रहें हैं। कुछ बंद हुए तो अनेक नए समाचार पत्र प्रकाशित होने लगे।
पत्रकारिता में नवाचार
इन वर्षों में पत्रकारिता में कई तरह की नवीन प्रवृत्तियों को देखा गया। इसमें प्रिंटिंग प्रेस की नवीनतम तकनीक, समाचार सेवाओं की स्थापना, रंगीन मुद्रण, साप्ताहिक परिशिष्ठ, तथा पेपर खरीदने पर आकर्षक गिफ्ट और उपहारों का चलन, बहु संस्करण प्रकाशन, नए ब्यूरों का गठन, फ्रीलांसर की आवश्यकता अनुरूप सेवा लेना तथा नए स्तंभों का चलन, करियर, युवा, कृषि, खेल पर प्रथम पृष्ठ एवं इनपर विशेषज्ञों द्वारा लेखन सभी इन खास प्रवृत्तियों को दर्शाते हैं।
प्रिंट के अलावा सोशल मीडिया, पॉडकास्ट, स्लॉग और ऑनलाइन पोर्टल दर्शकों को जोड़ने और इंटरैक्टिव समुदाय बनाने के शक्तिशाली रूप में सामने आए हैं। रेडियो और टेलीविजन पत्रकारिता तो काफी पहले ही व्यापक स्वरुप ले चुकी है।
मलयालम मनोरमा, द हिन्दू, द इंडियन एक्सप्रेस, मातृभूमि, द हिंदुस्तान टाइम्स, बिजनेस स्टैण्डर्ड, मिंट, आन्ध्र ज्योति, साक्षी, इनाडू, डीएनए, आनंद बाजार पत्रिका, द स्टेट्स मेन, दिव्य भास्कर, द सियासत डेली, ग्रेटर कश्मीर आदि अखबार और विभिन्न अनेक देश के कोने-कोने से प्रकाशित होने वाले अखबार पत्रकारिता का गौरव सभी पत्रकारिता का गौरव सभी इतिहास लिख रहे हैं।
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