कर्तव्य पथ पर एक और शक्तिशाली आधुनिक उपकरण जो दिखा, वो संजय (युद्धक्षेत्र निगरानी प्रणाली) व्हीकल है। इसे महाभारत के संजय, जो धृतराष्ट्र को युद्ध का आंखों देखा हाल बताते थे, का नाम दिया किया गया है। इसकी खासियत यह है कि यह स्वचलित प्रणाली सेंसर के जरिए दुश्मन की जानकारी एकत्रित कर लेती है। संजय पूर्णतः स्वदेशी है। इसे भारतीय सेना और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड ने संयुक्त रूप से तैयार किया है। इसी साल मार्च से अक्टूबर के बीच तीन चरणों में संजय को भारतीय सेना में शामिल कर लिया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार हथियारों और रक्षा उपकरणों को लेकर मेक इन इंडिया पर जोर दे रहे हैं। भारत न केवल स्वयं हथियार विकसित कर रहा है, बल्कि निर्यातक देशों की सूची में शामिल हुआ है। वर्ष 2023-24 के वित्तीय वर्ष में भारत ने 21 हजार करोड़ रुपए के हथियार 85 देशों को निर्यात किए। भारत अफ्रीकी और एशियाई देशों को हथियार बेचने पर जोर दे रहा है। रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-2025 की पहली तिमाही में हथियारों के निर्यात में 78 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। भारत की इस तरक्की ने दुनिया को हैरान किया है।
पिछले कुछ सालों में दुनिया के कई देश आपस में युद्ध में उलझे हुए हैं। यूक्रेन व रूस के अलावा इजराइल का हमास, लेबनान व ईरान के साथ भिड़ंत को दुनिया ने देखा है। हम रूस और इजराइल जैसे हथियारों के निर्यातक देशों को जूझते देख रहे हैं। यदि युद्ध थोड़ा लंबा खींचता है तो बड़े-बड़े देशों में हथियारों की कमी हो जाती है। यदि कोई देश हथियारों को लेकर केवल दूसरे देशों पर निर्भर होता है तो युद्ध में उसकी हार निश्चित होती है। भारत पूर्व में ऐसे संकट से गुजर चुका है। पिछले एक दशक से भारत की रणनीति यही रही है कि दूसरे देशों से हथियार लेने की निर्भरता को न केवल कम किया जाए, बल्कि स्वदेशी तकनीक से स्वयं के हथियार विकसित किए जाएं। गणतंत्र दिवस परेड में संजय और प्रलय ने भारत की इसी इच्छाशक्ति को प्रदर्शित किया।
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