नामुराद पाकिस्तान पर भारत की अब यह खेल मैदान में चौथी ‘हैंड शेक स्ट्राइक’ है। यानी सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक, ऑपरेशन सिंदूर के बाद हलवाई स्ट्राइक और अब हैंड शेक स्ट्राइक।
सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में एशिया कप क्रिकेट टूर्नामेंट में पहले भारतीय टीम ने पाक टीम को 7 विकेट से धोया और फिर पारंपरिक सौजन्य को बाउंड्री से बाहर कर भारतीय कप्तान ने पाक कप्तान सलमान अली आगा से हाथ तक न मिलाया। संदेश साफ था कि जब सामने वाले के दिल में काला हो तो अपने हाथ भी क्यों खराब किए जाएं। कुछ लोग इसे भारत की ‘स्पोर्टिंग डिप्लोमेसी’ (खेल कूटनीति) भी मान रहे हैं तो आलोचकों का तर्क है कि हमारी विेदेश नीति की कमजोरी को नई खेल कूटनीति से पाटा जा रहा है।
जो भी हो, दुबई के इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में भारत पाक मैच के बाद इस अप्रत्याशित ‘हैंड शेक स्ट्राइक’ से बौखलाए पाकिस्तानी टीम के कप्तान सलमान आगा ने मैच के उपरांत माइक पर आने से परहेज किया और पाक क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी में अपील कर इस घटनाक्रम के लिए मैच के रैफरी को दोषी मानते हुए टूर्नामेंट से हटाने की मांग की, जिसे अपेक्षानुरूप आईसीसी ने खारिज कर दिया।
हालांकि इतनी बेइज्जती के बाद पाक टीम टूर्नामेंट छोड़ने की धमकी दे रही है, हकीकत में ऐसा होने की संभावना कम है।
हैंड शेक न करने को लेकर बौखलाया पाकिस्तान
रहा सवाल बौखलाए पाकिस्तान द्वारा रेफरी एंडी पायक्रॉफ्ट को टूर्नामेंट से हटाने का तो यह मांग बेतुकी ही थी। रेफरी का काम मैच के दौरान खेल नियमों के मुताबिक निर्णय देना है न कि प्रतिद्वंद्वी टीमों के कप्तानों के हाथ मिलवाना। हाथ मिलाना सौजन्य की परंपरा है, खेल रणनीति या दांव-पेंच का हिस्सा नहीं।
वैसे जानकारों का यह भी कहना है कि एशियन क्रिकेट काउंसिल (एसीसी) के कुछ अधिकारी, जिनमें पीसीबी (पाक क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) के डायरेक्टर भी शामिल थे, को पहले से पता था कि दोनों कप्तान मैच के बाद हैंडशेक नहीं करेंगे। इसके बावजूद पीसीबी और उसके अध्यक्ष मोहसिन रजा नकवी, जो एसीसी के अध्यक्ष भी हैं, ने बखेड़ा खड़ा किया।
पीसीबी की लिखित शिकायत के मुताबिक रेफरी एंडी पायक्रॉफ्ट ने पाकिस्तान के कप्तान सलमान अली आगा को सुझाव दिया था कि वे सूर्यकुमार यादव से हाथ न मिलाएं। ऐसा करना आचार संहिता का उल्लंघन है। लेकिन जय शाह की अध्यक्षता वाली आईसीसी ने जांच के बाद पीसीबी की मांग को खारिज कर दिया।
हालांकि इसके बाद तिलमिलाए पाक ने अपना गुस्सा अपने इंटरनेशनल क्रिकेट ऑपरेशंस के डायरेक्टर उस्मान वहला को निलंबित कर उतारा। कहा गया कि उस्मान हैंडशेक विवाद पर समय रहते कदम नहीं उठा पाए।
पाक टीम से हाथ मिलाने से इंकार, इस मैच के पहले भारत-पाक मैच की मुखालिफत करने वालों को भी संदेश है कि मैच भले खेल भावना को कायम रखने के लिए खेला गया, लेकिन जीत हासिल होने के बाद हाथ मिलाने की कोई मुरव्वत नहीं की गई।
सूर्यकुमार यादव ने कहा कि हम खिलाड़ी हैं, लेकिन ऑपरेशन सिंदूर में हुए आतंकी हमले में षड्यंत्रपूर्वक मारे गए लोगों के दुख में सहभागी हैं। कुछ बातें खेल भावना से ऊपर होती हैं। यह जीत हम देश और भारतीय सेना को समर्पित करते हैं।
सोशल मीडिया पर लोग इसे भारत का "साइलेंट बॉयकॉट" (सांकेतिक बहिष्कार) बता रहे हैं। मैच के बाद भारतीय खिलाडि़यों ने ड्रेसिंग रूम भी भीतर से बंद कर लिया। उधर हार के मारे पाक खिलाड़ी बाहर मैदान पर इंतजार ही करते रहे।
'पहले बल्ले से ठुकाई फिर जज्बात से धुलाई'
भारतीय टीम द्वारा विरोध और दिली जज्बे के इजहार का यह तरीका एकदम अलग और सुनियोजित था। यानी पहले बल्ले से ठुकाई और बाद में जज्बात से धुलाई। हालांकि बहुत से लोगों को लगता था कि ऑपरेशन सिंदूर का रंग पोंछे हुए अभी 6 महीने भी नहीं कि दुश्मन पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना कौन सी इंसानियत है, कौन सी खेल भावना है।
सौहार्द का जवाब अगर सामने वाला संगीनों से दे तो काहे की आपसदारी? ऐसे दुश्मन का, भले ही वो पड़ोसी क्यों न हो, हर मंच, हर मौके और हर कीमत पर बहिष्कार करना ही विरोध का श्रेष्ठ तरीका है। पाक के साथ खेलना अपने गुस्से पर खुद ही मरहम लगाने जैसा होगा। कहा तो यह भी गया कि बीसीसीआई ने एशिया कप से होने वाली कमाई के लालच में पाक के साथ खेलने से परहेज नहीं किया (इस बारे में बताया जाता है कि बीसीसीआई एसीसी की कमाई में हिस्सा नहीं लेती। यह कमाई दूसरे देशों के क्रिकेट कंट्रोल बोर्डों के बीच बराबर बंटती है)।
इससे भी बढ़कर हैरानी यह थी कि हर मुनासिब मौके पर पाक को कोसने वाली मोदी सरकार ने भी इस तरह खेलने को मंजूरी कैसे दे दी जबकि खुद मोदी ने शंघाई सहयोग सम्मेलन में पाक पीएम शहबाज शरीफ से हाथ मिलाना तो दूर, उनकी तरफ देखा तक नहीं। जबकि यहां भारतीय टीम पैड बांधकर पाक के साथ खेलने पिच पर उतर गई थी।