चंद्रयान 3 को लेकर बड़ी आशाएं
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चांद पर क्या-क्या करेगा चंद्रयान 3
इसरो के अनुसार चंद्रयान-3 चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में उतरेगा जहां अभी तक कोई देश नहीं पहुंचा है। इसका मकसद, चंद्रमा की जानकारी जुटाना है। ऐसी खोज करना जिनसे भारत के साथ ही पूरी मानवता को फायदा होगा। इन परीक्षणों और अनुभवों के आधार पर ही भावी चंद्र अभियानों की तैयारी में जरूरी बड़े बदलाव होंगे, ताकि भविष्य के चंद्र अभियानों की नई टेक्नोलॉजी को बनाने और उन्हें तय करने में मदद मिले।
चंद्रयान-3 में कुल सात वैज्ञानिक पेलोड है, इनमें चार लेंडर के दी रोवर में तथा एक प्रपल्सन माड्यूल में लगाए गए हैं। लैंडर का वजन 1,752 किलोग्राम है तथा इसमें चार वैज्ञानिक पे लोड शामिल किए गए है। इसमें एक पे लोड चंद्रमा के ध्रुवीय क्षेत्र में चंद्र सतह के तापीय गुणों को मापेगा, जबकि एक अन्य उपकरण की मदद से चंद्रमा पर भूकंपीय गतिविधियों का आकलन होगा।
तीसरे उपकरण लैग्मुइर प्रोब (एलपी) के जरिए चंद्रमा पर प्लाजमा घनत्व तथा इसकी विविधता का आकलन किया जाएगा। चौथा उपकरण, चंद्र सतह पर परिवेश का पता लगाएगा। रोवर में भी दो उपकरण या पेलोड लगे हैं, जो चांद पर मौजूद सतह की विस्तृत पड़ताल करेंगे।
साउथ पोल पर कदम रखने वाला पहला देश बन सकता है भारत
दरअसल, चांद फतह कर चुके अमेरिका, रूस और चीन ने अभी तक चांद के साउथ पोल पर कदम नहीं रखा है। चांद के इस भाग के बारे में अभी बहुत जानकारी भी सामने नहीं आ पाई है। भारत के चंद्रयान-1 मिशन के दौरान साउथ पोल में बर्फ के बारे में पता चला था। तभी से चांद के इस हिस्से के प्रति दुनिया के देशों की रुचि जगी है।
भारत इसबार के मिशन में साउथ पोल के नजदीक ही लैंड करेगा। ऐसे में माना जा रहा है कि भारत मिशन मून के जरिए दूसरे देशों पर बढ़त हासिल कर लेगा। कहा जा रहा है कि चंद्रयान-3 के जरिए भारत एक ऐसे अनमोल खजाने की खोज कर सकता है जिससे न केवल अगले करीब 500 साल तक इंसानी ऊर्जा जरूरतों को पूरा किया जा सकता है बल्कि खरबों डॉलर की कमाई भी हो सकती है।
चांद से मिलने वाली यह ऊर्जा ने केवल सुरक्षित होगी बल्कि तेल, कोयले और परमाणु कचरे से होने वाले प्रदूषण से मुक्त होगी। स्पेक्टोमीटर (एपीएक्सएस) की मदद से सात धातुओं की खोज का भी प्रयास रहेगा। इनमें मैग्नीशियम, सिलिकॉन, पोटेशियम, कैल्शियम, टाइटेनियम, आयरन तथा एलुमिनियम शामिल है। इस उपकरण से निकलने वाली किरणें इन धातुओं को खोजने का प्रयास करेंगी।
इसके पीछे मकसद यह देखना है कि क्या वहां ऐसी धातुएं अभी हैं या कभी थीं, जो इंसानी जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं। इससे चंद्रमा की संरचना को समझने में भी मदद मिलेगी। धातुओं से ही यह पता चलेगा कि चांद इंसानी जीवन के लिए कितना उपयोगी है।
मिशन चंद्रयान-3 में भारत के लिए चुनौतियां भी कम नहीं हैं। भारत दूसरी बार चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। चांद पर सफल लैंडिंग करते ही भारत ऐसा करने वाले अमेरिका, रूस और चीन के साथ चौथा देश हो जाएगा। कुल मिलाकर चंद्रयान 3 मिशन की सफलता भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है साथ ही यह मिशन भविष्य में अंतरिक्ष शोध की नई संभावनाओं को भी जन्म देगा।
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