यह नाम मिस्र के अचमेनिद प्रांत तक भी जाना गया जहां जहां लगभग 500 ईसा पूर्व, डेरियस प्रथम की मूर्ति पर इसे "H-n-d-wꜣ-y" लिखा गया। यह चौकोर मुहर आज भी ईरान के तेहरान स्थित म्यूजियम में मौजूद है। किसी पुरातात्विक प्रमाण के रूप में 'हिंदू' लिखा यह पहला शब्द है। धीरे धीरे ये शब्द भारत में प्रचलित होने लगा। पृथ्वीराज रासो ने पृथ्वीराज चौहान को गर्व से 'हिंदू' लिखा।
पुराणों के बीच हिंदू शब्द
'हिंदू' शब्द 'भविष्य पुराण' में आ गया जो इतना नया है कि कोई हैरत नहीं कि 18वीं सदी में लिखा गया हो। सदियों की इस यात्रा में भारतवासी खुद को हिन्दू मानने लगे। वैदिक नदियों का समूह 'सप्त सिंधु', 'हफ्त हिन्दू' बन गया।
इसी इंडो ईरानी भाषा संसार से भारतवासियों के धर्म का नाम "हिंदू धर्म" पड़ गया जो अब तक कहीं वैदिक धर्म तो कहीं ब्राह्मण धर्म के नाम से प्रचलन में रहा होगा। सच तो यह है कि हिंदुओं ने धर्म को एक जीवन शैली माना न कि मजहब या रिलीजन। इसीलिए भारत के विचारकों ने शुरू से अपने धर्म को कोई नाम नहीं दिया।
इधर हाल में हिंदू शब्द को विदेशी मानने वालों ने हिंदू धर्म को सनातन धर्म का नामकरण कर दिया। जबकि सनातन शब्द एक विश्लेषण है संज्ञा नहीं। सबसे पहले महात्मा बुद्ध ने सनातन पद का प्रयोग किया। कहा- 'एस धम्मो सनंतनो' (बौद्ध ग्रंथ धम्मपद देखें सूत्र 5) लेकिन यह दूसरे अर्थो में प्रयुक्त हुआ पद है। पूरा सूत्र कहना है- "वैर से वैर खत्म नहीं होता, अवैर से वैर खत्म होता है। यही संसार का सनातन नियम है।"
(धम्मवदमं, अनुवाद- भदंत आंनद कौसल्लायन) ऋग्वेद में हिंदू नाम का कोई धर्म नहीं था। लेकिन वैदिक संस्कृति में सदकर्मों के पथ को सनातन कहा गया। गीता में ईश्वर को सनातन कहा गया। लेकिन ईसा से 600 साल पहले तक इंडो यूरोपीय भाषा परिवार के एशिया माइनर में भारत के लिए हिंदू शब्द प्रचलित हो चुका था। बस इसी "हिंदू" शब्द से इंडिया का जन्म हुआ।
सिकंदर और हिंदू शब्द
सिकंदर के जमाने के बहुत पहले से फारस और ग्रीस में करीबी संबंध थे। एक यूनानी इतिहासकार और भूगोलवेत्ता हेरोडोटस ने ग्रीको-फ़ारसी युद्धों का ब्योरा दिया है। इतिहासकार हेरोडोटस ऐतिहासिक घटनाओं की व्यवस्थित जांच करने वाला पहला लेखक था। प्राचीन रोमन वक्ता सिसरो ने उसे "इतिहास का पिता" की उपाधि दी थी। उसे फारसियों से 'सिंधु' के लिए 'हिंदृ' शब्द मिला। तो "हिंदू" नदी शब्द ग्रीक के पास आया तो वह इंडोज या 'इंडिया' बन गया क्योंकि ग्रीस के लोगों का लैटिन लिप्यंतरण 'ह' की जगह 'इ' और 'द' की जगह 'ड' था।
दिलचस्प है कि हेरोडोटस ने सिंधु बेसिन व फारस के पूर्व में रहने वाले सभी लोगों के लिए "इंडिया" शब्द का सामान्यीकरण कर दिया। जबकि उन्हें हमारी जन्म भूमि के भूगोल का कोई ज्ञान नहीं था। इसीलिए बाद में सिकंदर के साथ भारत आए मेगस्थनीज ने अपनी किताब का नाम ही "इंडिका" दे दिया। "इंडिया" पर किसी विदेशी की लिखी यह दुनिया की पहली किताब है।
"इंडिका" की मूल किताब या उसकी कोई प्रति तो दुनिया के किसी संग्रहालय में अब मौजूद नहीं है। लेकिन उसके ठीक बाद के ग्रीक व लैटिन इतिहासकारों ने इंडिका में वर्णित भारत का खूब जिक्र किया। यानी सिकंदर ने जब 'इंडिका' पर हमला किया तो उसे हमारे देश के मूल नाम के बारे में कोई खबर नहीं थी।
ईसा के जन्म से 500 साल पहले 'इंडिया' का असली नाम क्या था इसका कोई लिखित या पुरात्विक प्रमाण इतिहासकारों को नहीं मिलता। आर्यावर्त, ब्रह्मावर्त, जम्बूद्वीप, भारत, भारतवर्ष, भारतम जैसे नाम हो सकता है कि प्रचलन में हों लेकिन ये शब्द बहुत बाद में लिखत पढ़त में आया।
शेष अगले भाग में-
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