फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

काम से प्यार हो, तो मेहनत बोझ नहीं लगती: मैंने हार को भी अपने जीवन का शिक्षक माना

सार

गाजीपुर का गहमर एशिया का सबसे बड़ा गांव है। पर, इसकी उससे भी बड़ी पहचान है कि यह देश में सबसे ज्यादा सैनिकों वाला गांव है।
विज्ञापन
ब्लॉग - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पूर्वांचल के गाजीपुर का गहमर एशिया का सबसे बड़ा गांव है। लेकिन, इसकी उससे भी मजबूत और शौर्य से गूंथी पहचान है कि यह देश में सबसे ज्यादा सैनिकों वाला गांव है। यहां के हर परिवार में कम से कम एक सैनिक है। हर चौखट पर लगे नाम-पते के आगे एक रैंक लिखी है, सूबेदार, कैप्टन, मेजर आदि। घर की दीवारें और तिजोरी मेडल और यूनिफॉर्म सहेजे हैं। गांव के ठीक बीचों-बीच बना है विश्वयुद्ध की याद में शहीद स्तंभ।  
विज्ञापन


गांव में देशभक्ति की जो दीवानगी पसरी है, उसकी जड़ों में दो कहानियां मशहूर हैं। पहली यह कि यहां एक कप्तान रामस्वरूप सिंह थे। अंग्रेजी सेना गहमर गांव को उड़ाने आई, लेकिन रामस्वरूप सिंह को वर्दी और तमगा पहने देख लौट गई। वहीं दूसरी कहानी है कि इसी गांव के सूबेदार मेजर सीताराम सिंह ने रुड़की में अंग्रेजों को गार्ड ऑफ ऑनर देते समय दो राइफल तोड़ दी थीं। यहां की मांएं बेटों को सरहद पर जाने से मना नहीं करतीं। गांव की सरहद संभाले बैठी मां कमच्छा से वह मन्नत मांगती हैं कि उनके बेटे का चयन हो जाए। 

यहां ऐसे भी परिवार हैं, जिनके दादा 1971 की लड़ाई में, पिता कारगिल में और भाई कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते बलिदान हुए। गहमर पर हुए बीएचयू के एक शोध के मुताबिक, जवान से लेकर जनरल तक, गांव के करीब 12 हजार लोग वर्तमान में सेना में हैं और 15,000 से ज्यादा पूर्व सैनिक हैं। दूसरे विश्वयुद्ध में यहां से 228 जवान सेना में भर्ती हुए थे और उनमें से 21 को वीरता पदक मिले थे। गांव में गंगा किनारे बुलाकीदास मठिया मैदान भी है, जहां कई सौ बच्चे दौड़ लगाने आते हैं। माना जाता है कि जो बच्चा यहां दौड़ता है, उसका चयन तय है। मैदान के एक छोर पर बुलाकीदास का मंदिर है। इन्हें सेना में सिलेक्शन करवाने वाला देवता माना जाता है। इनकी देहरी पर एक लटकने वाली चौखट बनी है। दौड़ के लिए आए लड़के-लड़कियां यहां तीन बार लटकते हैं, क्योंकि यह प्रणाम करने का तरीका भी है और टोटका भी।
विज्ञापन
विज्ञापन


गांव की सुंदर तस्वीर यही परंपरा, भरोसा व पूजा है, जो दौड़कर देश की खातिर पूरी की जाती है और जिसकी बदौलत गहमर सैनिकों वाला गांव कहलाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें