मैंने फुटबॉल को सिर्फ एक खेल की तरह कभी नहीं देखा। मेरे लिए यह जीवन का एक आईना था, जिसने मुझे सिखाया कि सपने देखना आसान है, लेकिन उन्हें सच करने के लिए लगातार मेहनत करनी पड़ती है। लोग अक्सर मुझसे पूछते हैं कि क्या मैं जन्मजात फुटबॉल चैंपियन था, किंतु मेरा हमेशा से मानना रहा है कि दुनिया में कोई भी इन्सान पैदाइशी उस्ताद नहीं होता। हो सकता है, ईश्वर ने आपको कोई हुनर या प्रतिभा देकर भेजा हो, लेकिन केवल प्रतिभा के दम पर आप महानता के शिखर तक नहीं पहुंच सकते।
मैं भी जब पीछे मुड़कर अपने जीवन को देखता हूं, तो मुझे लगता है कि सफलता अचानक मेरे दरवाजे पर नहीं आई थी। उसके पीछे अनगिनत घंटों की मेहनत, अभ्यास, गलतियां, असफलताएं और फिर से कोशिश करने का साहस था। जब मैं बच्चा था, तब मेरे पिता ने मुझे एक बात सिखाई थी कि सब कुछ अभ्यास ही है। अभ्यास के बिना कोई भी प्रतिभा वक्त के साथ धुंधली पड़ जाती है। मैंने बहुत छोटी उम्र में फुटबॉल से प्यार करना शुरू किया था। उस समय मेरे पास बहुत कुछ नहीं था, लेकिन मेरे पास एक सपना था। तभी मैंने यह भी सीखा कि आपके पास शुरुआत करने के लिए दुनिया की सारी सुविधाएं होना जरूरी नहीं है।
जरूरी यह है कि जो कुछ आपके पास है, उससे आप क्या कर सकते हैं। समय के साथ मैंने यह भी समझा कि प्रतिभा आपको दूसरों से आगे ले जा सकती है, लेकिन केवल प्रतिभा ही आपको वहां नहीं पहुंचा सकती, जहां आप जाना चाहते हैं। आपको लगातार सीखते रहना पड़ता है। आपको अपनी गलतियों को स्वीकार करना पड़ता है और हर दिन खुद को कल से बेहतर बनाने की कोशिश करनी पड़ती है। फुटबॉल ने मुझे अकेले जीतना नहीं, साथ मिलकर जीतना सिखाया। मैदान पर कोई एक खिलाड़ी पूरी टीम नहीं होता। आप कितना भी अच्छा खेल लें, आपको अपने साथियों की जरूरत पड़ती ही है। इसीलिए, जब मेरी टीम जीतती थी, तो वह सिर्फ मेरी जीत नहीं होती थी; वह उन सभी लोगों की जीत होती थी, जिन्होंने मेरे साथ मेहनत की थी।
मैंने हार को भी अपने जीवन का शिक्षक माना। बेशक हार हमेशा सुखद नहीं होती, पर वह आपको आपके बारे में ऐसी बातें बताती है, जो जीत शायद कभी नहीं बता सकती। उनसे डरने के बजाय मैंने उन्हें अपनी अगली जीत की तैयारी माना। और सबसे महत्वपूर्ण बात, मैंने अपने काम से प्यार करना सीखा। अगर आपको अपने काम से सच्चा प्रेम है, तो मेहनत बोझ नहीं लगती। आप गिरेंगे, थकेंगे, कभी-कभी निराश भी होंगे, लेकिन फिर उठ खड़े होंगे, क्योंकि आपके भीतर आगे बढ़ने की इच्छा बची रहेगी। मैंने जीवन से यही सीखा-सपना देखना, मेहनत करना, हार से सीखना, दूसरों के साथ आगे बढ़ना और हर दिन अपने भीतर के खिलाड़ी को थोड़ा-थोड़ा बेहतर बनाते रहना। -माई लाइफ एंड द ब्यूटीफुल गेम के अनूदित अंश
गलतियों से सीखें
सपने देखना आसान है, लेकिन उन्हें सच करने के लिए लगातार मेहनत, अभ्यास और धैर्य जरूरी है। प्रतिभा आपको शुरुआत में आगे बढ़ा सकती है, मगर महानता तक पहुंचने के लिए निरंतर सीखना और अपनी गलतियों से सबक लेना पड़ता है। हार को अंत नहीं, बल्कि अगली जीत की तैयारी समझें। रोज खुद को कल से बेहतर बनाएं।